गाय के घी को नाक में डालने के फायदे
गाय के घी को नाक में डालने के फायदे

देसी गाय की पहचान : देसी गाय की पहचान बहुत ही सरल है।
- जिस गाय के हंप है, कूबड़, थुआ, खान्दा हो वह देसी गाय है।
- जिस देसी गाय के गले में लटकन हो, कामल, गलकामल, झालर है वो श्रेष्ठ देसी नस्ल की गाय है।
- देसी गाय की सभी नस्लों के सींग का आकर अलग अलग होता है।
- देसी गाय की आंत बड़ी होती है बनिस्पत जर्सी गाय के।
- देसी गाय शुद्ध और साफ़ जगह पर ही बैठती है, अशुद्ध जगह पर नहीं बैठती है जबकि जर्सी गाय कहीं भी बैठ जाती है।
- जर्सी गाय अपने बछड़े की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देती है जबकि देसी गाय का पूरा ध्यान अपने बछड़े पर रहता है। जर्सी गाय का ध्यान अपने बछड़े पर कम रहता है।
- देसी गाय की आँखों में आपको ममता दिखाई देगी.
- बढे हुए तापमान पर देसी गायों की सांस नहीं फूलती है जबकि विदेशी नस्ल की गायें हांफने लग जाती हैं।
- देसी गाय का सबसे बड़ा गुण है वात्सल्य, वह अपने बच्चे को बहुत प्रेम करती है। अपने बच्चे को खतरे में देख कर आक्रामक हो जाती है जबकि जर्सी गाय का अपने बच्चे से लगाव नहीं करती है।
- देसी गाय ऊंचाई पर चढ़ जाती है जबकि जर्सी चढ़ाई पर चढ़ नहीं पाती है, सही मायने में उसे चलना भी किसी आफत से कम नहीं लगता है चढ़ाई तो दूर की बात है।
- सूर्यास्त होने के बाद देसी गाय खाना खाती है जबकि जर्सी कभी भी खा सकती है। देसी गाय का भोजन ग्रहण करने का नियत वक़्त होता है जबकि जर्सी गाय को रात दिन कभी भी खाने को दो खाने लग जायेगी।
- स्वदेशी देसी गाय का बछड़ा अपनी माँ को पहचानता है जबकि जर्सी गाय का बछड़ा अपनी माँ को नहीं पहचान सकता है या कम पहचान कर पाता है।
- देसी गाय जर्सी के मुकाबले ज्यादा बार माँ बन सकती है।
घी खाने का सही तरीका और घी के फायदे | A Yogic Superfood for Better Digestion | Sadhguru Hindi
गाय के घी फायदे Benefits of Cow's Ghee
जिनके सर दर्द और माइग्रेन की समस्या रहती है उन्हें रात को सोने से पहले नाक में दो बून्द डालने से पुराने सरदर्द और माइग्रेन में आराम मिलता है।
- मस्तिष्क की ताकत बढ़ाने के लिए : इससे आचर्यजनक रूप से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
- अनिंद्रा और तनाव घटता है।
- बाल झड़ना, असमय सफ़ेद होना जैसे रोगों के लिए नाक में घी डालना फायदेमंद रहता है।
- बढ़ती उम्र के साथ स्मरण शक्ति का ह्रास को यह रोकता है।
- थाइराइड में इसके सकारात्मक लाभ मिलते हैं।
- नस्य से वात रोगों में लाभ मिलता है।
- दांत दर्द, ढीले मसूड़ों के समस्या में लाभदायी।
- टॉन्सिल्स में फायदेमंद होता है।
- गर्दन के दर्द में प्रभावी होता है।
- आखों से सबंधित विकारो में लाभदायक।
- हकलाहट में लाभदायी होता है।
- कानों की समस्या में प्रभावी।
- गले में खरांस, सूखे गले की समस्या में लाभदायक।
- कैल्शियम के शरीर में अवशोषण में प्रभावी।
- नस्य करने से सीधे मस्तिष्क पर इसका लाभदायक असर होता है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
- पागलपन और मिर्गी जैसे रोगों में नाक से घी डालने का परिणाम बहुत अच्छा होता है।
- लकवा रोगों में भी नाक से घी डालने का सकारात्मक परिणाम होता है।
- भांग, शराब और अन्य रोगों से मुक्ति के लिए नाक से घी डालने से लाभ मिलता है।
- एसिडिटी और कब्ज की समस्या दूर होती है।
- कैंसर जैसी भयंकर बिमारी में भी नस्य के सकारात्मक लाभ मिलते हैं।
- एलर्जी और संक्रमण में लाभ मिलता है।
- शारीरिक शक्ति का विकास होता है।
- घी की प्रकृति ठंडी होती है लेकिन शरीर की तेरह प्रकार की अग्नि को जाग्रत करता है।
- नकसीर रोकने में सहायक।
- छींक आने बार बार नाक से पानी आने को रोकता है।
- खर्राटे रोकने में लाभदायी होता है।
- ब्रेन स्ट्रोक, लकवा आदि रोगों में लाभदायी।