कब्ज दूर करने की आयुर्वेदक ओषधियाँ
कब्ज दूर करने की आयुर्वेदक ओषधियाँ
हमारे शरीर की सभी गतिविधियां बिगड़ जाती हैं यदि पाचन ठीक नहीं है और इसलिए हमें सबसे पहले हमारे पेट पर ध्यान देना चाहिए। पाचन तंत्र के सुदृढ़ होने पर पोषक तत्वों का शरीर में संग्रह होता है और व्यक्ति कई प्रकार की अन्य बिमारियों से बचा हुआ रहता है। हम कुछ तो हमारे खाने पिने की आदतों में बदलाव करके और कुछ आयुर्वेदा की शरण में जाकर अपने पाचन को मजबूत बना सकते हैं। कोशिश तो हमें ही करनी होगी।कब्ज क्या होता है
कब्ज के कारण
- आहार में फाइबर की कमी का होना।
- शारीरिक मेहनत का अभाव होना।
- बढ़ती उम्र के कारन कब्ज का होना।
- ज्यादा मसालेदार और तैलीय प्रदार्थों का सेवन करना।
- अनियमित दिनचर्या और समय पर शौच न जाना।
- दवाओं का अत्यधिक सेवन करना।
- प्रयाप्त मात्रा में पानी न पीना।
- गर्भावस्था के दौरान कब्ज का होना।
- मानसिक तनाव और चिंता करना।
- प्रयाप्त नींद की कमी।
- अस्त व्यस्त जीवन शैली का होना
- कम फाइबर का सेवन: फाइबर मल को नरम और आसानी से गुजरने में मदद करता है। फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स शामिल हैं।
- पर्याप्त पानी न पीना: पानी मल को नरम करने में भी मदद करता है।
- पर्याप्त व्यायाम न करना: व्यायाम आंतों को मल को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
- दवाएं: कुछ दवाएं, जैसे दर्द निवारक और एंटीडिपेंटेंट्स, कब्ज का कारण बन सकती हैं।
- अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियां: कब्ज कुछ अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों का लक्षण हो सकता है, जैसे कि हाइपोथायरायडिज्म, पार्किंसंस रोग और मल्टीपल स्केलेरोसिस।
कब्ज के कारण अन्य विकारों का जोखिम
कब्ज के कुछ जोखिम निम्नलिखित हैं:- बवासीर: कब्ज के कारण मल त्याग के दौरान जोर लगाने की आवश्यकता होती है, जिससे बवासीर हो सकती है। बवासीर गुदा या मलाशय के आसपास सूजन या उभरे हुए मांस के टुकड़े होते हैं।
- एनल फिशर: एनल फिशर एक छोटा आंसू होता है जो गुदा में होता है। कब्ज के कारण मल त्याग के दौरान दबाव पड़ने से एनल फिशर हो सकता है।
- मलाशय की दीवारों का उभार: कब्ज के कारण मलाशय की दीवारें बाहर निकल सकती हैं। यह स्थिति मलाशय की दीवारों को नुकसान पहुंचा सकती है और संक्रमण का कारण बन सकती है।
- गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं: कब्ज कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है, जैसे कि पाचन तंत्र में रुकावट, गुदा कैंसर, और हार्मोनल असंतुलन।
कब्ज के लिए आयुर्वेद जड़ी-बूटियाँ
- स्वर्णपत्री (सेन्ना): यह एक रेचक है जो आंतों को उत्तेजित करके मल त्याग को प्रोत्साहित करता है।
- अरग्वधा (प्यूर्जिंग कैसिया): यह एक हल्की रेचक है जो पित्त को बढ़ावा देता है और पाचन में सहायता करता है।
- मेथी: यह फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, जो मल को नरम और आसानी से निकलने में मदद करता है।
- आंवला: यह विटामिन सी और फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, जो पाचन में सुधार करने और कब्ज को रोकने में मदद कर सकता है।
- अदरक: यह पाचन में सहायता करता है और कब्ज से राहत देता है।
- इसबगोल: यह एक प्रकार का फाइबर है जो मल में मात्रा बढ़ाता है और मल त्याग को प्रोत्साहित करता है।
- गंधर्वहस्ता (अरंडी): यह एक शक्तिशाली रेचक है जो बृहदान्त्र को उत्तेजित करता है।
- हरीतकी: यह वात को संतुलित करता है और पाचन में सहायता करता है।
- अजवाइन: यह पाचक रसों के उत्पादन को उत्तेजित करता है और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।
- त्रिवृत: यह एक विरेचक है जो बवासीर के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है।
कब्ज के लक्षण एवं संकेत
कब्ज एक ऐसी स्थिति है जिसमें मल त्यागने में कठिनाई होती है। यह एक सामान्य समस्या है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।- सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग करना
- सूखा, कठोर मल आना
- मल त्यागने के लिए जोर लगाना
- ऐसा महसूस होना मानो आपने अपनी आंतें पूरी तरह से खाली नहीं की हैं
- ऐसा महसूस होना जैसे आपके मलाशय में कोई रुकावट है
- अपने मलाशय को खाली करने के लिए सहायता की आवश्यकता है - जैसे पेट पर दबाव डालना
कब्ज को कैसे दूर करें
- भोजन में हरी सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करें।
- फाइबर युक्त आहार लें। मैदा और महीन पीसे हुए अनाज के सेवन में सतर्क रहे।
- खाना खाने के थोड़ी देर बाद टहलें।
- दिन में प्रयाप्त मात्रा में पानी पिए।
- शारीरिक मेहनत करें।
- स्ट्रेस मैनेजमेंट करें और खुश रहें।
- समय पर शौच जाएँ और मूत्र / मल को कभी रोकें नहीं।
- खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पिए।
- ताजे फल और सब्जियों का उपयोग अधिक करें।
- डिब्बाबंद भोजन से दूर रहें।
कब्ज दूर करने के लिए आयुर्वेदिक दवा
त्रिफला चूर्ण
त्रिफला चूर्ण कैसे लें
बहेड़ा चूर्ण
शुद्धि चूर्ण
गैस हर चूर्ण
आदतों में सुधार करके इस व्याधि से छुटकारा पा सकते हैं। पतंजलि चिकित्सालय में आप अपनी जांच करवा सकते हैं और यह जाने की आपका शरीर की प्रवृति का है। उसके उपरांत निर्णय लें की आपके खाने पीने में किन चीजों को जोड़ना है और किनका सेवन नहीं करना है। (अधिक जाने : गैस हर चूर्ण क्या है, लाभ और उपयोग )
विशेष : आप अपनी प्रकृति के अनुसार इन दवाओं का सेवन करें जो आपको वैद्य ही बता सकता है। कब्ज की बीमारी के लिए आप पतंजलि के स्टोर पर बैठने वाले वैद्य से इस बारे में दिशा निर्देश प्राप्त करें।
