गिलोय के गुण उपयोग और फायदे
पीयुषबिन्दवः पेतुस्तेभ्यो जाता गुडूचिका॥
गिलोय के गुण उपयोग और फायदे

गिलोय (Tinosporacordifolia (Willd.) Miers)
इसका रस कड़वा होता है। रक्त वर्धर्क इसका गुण है। यह ज्वर नाशक है। गिलोय त्रिदोष नाशक होती है, यानी ये कफ, वात और पित्त को संतुलित करती है। इसके गुणों के कारण ही इसे अमृता कहा गया है और माना गया है की जो व्यक्ति नियमित रूप से गिलोय का सेवन करता है वह अपनी पूर्ण आयु को प्राप्त करता है बिना किसी रोग दोष के।
गिलोय के पत्ते
गिलोय की तासीर
गिलोय के गुण
रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए
बुखार और त्वचा के संक्रमण से सबंधित रोग होते हैं। गिलोय शरीर को इन संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है। सुबह खाली पेट गिलोय स्वरस इसके लिए बेहतर उपाय हो सकता है। यदि आप स्वंय इसका रस घर पर बनाना चाहते हैं तो या तो आप इसके पत्ते चिक्तिसक की सलाह के अनुसार मुँह में चबा कर खाएं या फिर आप आधे गिलास पानी में गिलोय के कुचले हुए तने और पत्तों को धीमी आंच पर उबाले। इस काढ़े तो तब तक उबलने दें जब तक की ये चाय के छोटे कप जितना ना रह जाय। इसके बाद इसे छान लें और गुनगुने काढ़े को चाय की तरह पिए, इससे सर्दी जुकाम और अन्य संक्रमण में मदद मिलेगी।
बवासीर में लाभदायक
रक्त को बनाये साफ़
गिलोय से मानसिक तनाव कम करें
गिलोय का उपयोग त्वचा के लिए
अस्थमा के लिए गिलोय
पेशाब की रुकावट के लिए गिलोय का उपयोग
गिलोय का स्वरस उपयोगी होता है। गिलोय रस के साथ यदि अश्वगंधा की जड़ों को भी उपयोग में लिया जाय तो इसके लाभ बढ़ जाते हैं।
गिलोय का उपयोग पाचन तंत्र के सुधार के लिए
हाथ पैरों में जलन के लिए
कान में दर्द के लिए
खुजली के लिए गिलोय
गठिया रोग में गिलोय का योगदान
गिलोय का उपयोग बुखार के लिए
मोटापा दूर करने के लिए गिलोय
उलटी के लिए गिलोय
कैंसर में गिलोय का प्रयोग
हृदय रोग और ब्लड प्रेशर के लिए गिलोय
मधुमेह में गिलोय का लाभ
गिलोय के अन्य लाभ :
- मस्तिष्क से सबंधित बिमारियों और स्मरण शक्ति के विकास के लिए गिलोय लाभदायक हो सकती है।
- पेट से सबंधित बिमारियों के उपचार के लिए गिलोय सहायक हो सकती है।
- गिलोय के सेवन से गुप्त रोगों के उपचार में सहायता मिलती है, इसके लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेवें।
- रक्त से सबंधित व्याधियों के लिए गिलोय का सेवन लाभदायक हैं।
- त्रिफला के साथ गिलोय का नित्य सेवन करने से पुराना कब्ज दूर होता है।
- मूत्र सबंधी विकारों में गिलोय लाभदायक होती है।
- गिलोय के सेवन से शरीर में रक्त बढ़ता है।
- गिलोय के रस का नित्य सेवन करने से स्मरण शक्ति में इजाफा होता है और यह एक तरह से मस्तिष्क के लिए टॉनिक का काम करता है|
- शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाता है।
- खाँसी, मलेरिया, शीत ज्वर (विषाणुक संक्रमण) में इसका उपयोग लाभदायक होता है।
- गिलोय के सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रण में रखा जा सकता है।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
- गिलोय के सेवन से त्वचा जवान बनी रहती है और त्वचा के संक्रमण दूर होते हैं।
- कुष्ठ रोगों में इसका सेवन लाभकारी होता है।
- गिलोय का सेवन लिवर की देखभाल के लिए लाभदायक होता है।
- गिलोय शरीर के विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में लाभदायी होता है।
- पीलिया में इसका उपयोग किया जाता है।
- गठिया और अन्य जोड़ों के दर्द में इसका सेवन लाभदायक होता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम में उपयोगी। शुगर के मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए या फिर डॉक्टर की राय लेनी चाहिए।
- गिलोय के रस को शहद के साथ सेवन करने से पेट से जुड़े रोग ठीक होते हैं
- राजयक्ष्मा रोग (Tuberculosis) में लाभ मिलता है।
- शरीर की इम्युनिटी को बढाती है |
- शरीर की सुजन कम करने में लाभकारी होती है
- गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक, ओजवर्धक, हृदयरोगनाशक ,शोधनाशक और लीवर टॉनिक भी है।
- गिलोय के तने को तुलसी, पपीते के पत्ते, एलोवेरा और अनार के रस के साथ जूस बनाकर पीने से डेंगू रोग में सुधार होता है।
- इसके रस का सेवन करने से खून की कमी दूर होती है| साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है| यह कोलेस्ट्रोल (Cholesterol) कम करती है|
- गिलोय के रस को शहद के साथ लेने से शारीरिक कमज़ोरी दूर होती है|
- गिलोय का सेवन निश्चित मात्रा से अधिक नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।
- गर्भावस्था के दौरान भी गिलोय का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।
- यदि आपका ब्लड शुगर कम है तो भी आप गिलोय का सेवन नहीं करें क्योंकि गिलोय के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर और अधिक कम हो जाता है।
- छोटे शिशु को गिलोय देने से परहेज करें या चिकित्सक की सलाह लें।
गिलोय के कुछ प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
इम्यूनिटी को बढ़ाता है गिलोय
गिलोय एक औषधीय पौधा है जिसे आयुर्वेद में कई बीमारियों के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। इसे गुडुची, अमृता या त्रिफला के नाम से भी जाना जाता है। गिलोय की लताएं हमेशा हरी रहती हैं और यह अन्य पेड़ों पर चढ़ती है। गिलोय की पत्तियां, तने और जड़ें तीनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं।गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और कैंसर रोधी गुण होते हैं। यह इम्यूनिटी को बढ़ाने, बुखार को कम करने, पीलिया, गठिया, डायबिटीज, कब्ज़, एसिडिटी, अपच, मूत्र संबंधी रोगों आदि में लाभकारी होता है।
गिलोय के इम्यूनिटी को बढ़ाने वाले गुणों के पीछे इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जिम्मेदार हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
एसिडिटी और अपच को ठीक करता है
गिलोय में एसिडिटी और अपच को ठीक करने के गुण होते हैं। गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पेट में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो एसिडिटी और अपच का कारण बन सकती है। गिलोय में मौजूद पाचक एंजाइम भी भोजन को पचाने में मदद करते हैं, जिससे एसिडिटी और अपच को दूर करने में मदद मिल सकती है।गिलोय में मूत्र संबंधी रोगों को ठीक करने के गुण भी होते हैं। गिलोय में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मूत्राशय में संक्रमण को रोकने और मूत्र संबंधी रोगों को ठीक करने में मदद कर सकते हैं।
बुखार को कम करता है गिलोय
गिलोय के बुखार को कम करने वाले गुणों के पीछे इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीपायरेटिक गुण जिम्मेदार हैं। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो शरीर के तापमान को बढ़ा सकता है। एंटीपायरेटिक गुण शरीर के तापमान को कम करने में मदद करते हैं।पीलिया को ठीक करता है गिलोय
गिलोय के पीलिया को ठीक करने वाले गुणों के पीछे इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण जिम्मेदार हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो लिवर को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। डिटॉक्सिफाइंग गुण शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जो लिवर के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।गठिया को ठीक करता है गिलोय
गिलोय में कई औषधीय गुण होते हैं, जिनमें से कुछ सूजन को कम करने और गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। गिलोय में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। गिलोय में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं, जो गठिया के विकास में योगदान कर सकते हैं। गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि गिलोय का सेवन करने से गठिया के रोगियों में जोड़ों के दर्द और सूजन में कमी आई। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि गिलोय का सेवन करने से गठिया के रोगियों में यूरिक एसिड के स्तर में कमी आई।पाचन बनाए बेहतर
गिलोय में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाचन में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। गिलोय में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं, जो पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाचन तंत्र में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को पैदा कर सकता है।मस्तिष्क के टॉनिक के रूप में
गिलोय को मस्तिष्क के टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। गिलोय में कई औषधीय गुण होते हैं, जिनमें से कुछ मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। गिलोय में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट मस्तिष्क को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं, जो मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मुक्त कण तनाव, बुढ़ापे और कुछ बीमारियों के कारण हो सकते हैं।गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मस्तिष्क में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो मस्तिष्क के कार्य को प्रभावित कर सकता है। गिलोय में मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। न्यूरोट्रांसमीटर मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संकेतों को भेजने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
गिलोय के सेवन में सावधानिया
गिलोय पांच साल की उम्र या इससे ऊपर के बच्चों के लिए सुरक्षित है। हालांकि, गिलोय की खुराक दो सप्ताह से ज्यादा या बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के नहीं दी जानी चाहिए।अगर आप डायबीटीज की दवाई ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के इस जड़ी बूटी का सेवन नहीं करना चाहिए। गिलोय रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है, जिससे डायबिटीज की दवाओं के साथ प्रतिक्रिया हो सकती है।
गिलोय कब्ज और कम रक्त शर्करा की समस्या भी पैदा कर सकता है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है तो गिलोय का सेवन करने से पहले डॉक्टर से बात करें। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय का सेवन करने से पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए। गिलोय एक सुरक्षित और प्रभावी जड़ी बूटी है, लेकिन इसका सुरक्षित और प्रभावी तरीके से उपयोग करना महत्वपूर्ण है। गिलोय का सेवन करने से पहले डॉक्टर से बात करना हमेशा सबसे अच्छा होता है, खासकर अगर आप किसी अन्य दवा का सेवन कर रहे हैं या कोई स्वास्थ्य समस्या है।