स्तनपान कब शुरू करें
स्तनपान कब शुरू करें

स्तनपान कब शुरू किया जाना चाहिए When to Start Breastfeeding
स्तनपान जन्म के एक घंटे के उपरांत कर देना चाहिए। यदि शल्य क्रिया से शिशु पैदा होता है तो शल्य क्रिया में बेहोश के लिए उपयोग में ली जाने वाली दवा के चार घंटे उपरांत या फिर डॉक्टर की सलाह से दूध पिलाया जाना चाहिए।ऑपरेशन (शल्य क्रिया ) से उत्पन्न माँ को शिशु को कब स्तनपान करवाना चाहिए
शल्य क्रिया के उपरांत माँ को लगभग चार घंटे बाद या अनिस्थितिया से बाहर आने के बाद स्तनपान करवाना चाहिए। स्तनपान में नर्स की सहायता लें और डॉक्टर से परामर्श लेने के उपरांत स्तनपान शुरू करवाएं।कोलोस्ट्रम क्या है? तथा यह बच्चे के लिए कैसे लाभदायक हैं
कोलोस्ट्रम शिशु के जन्म के बाद उत्पन्न माँ का पहला दूध होता है। इस दूध का रंग पीला होता है। माँ का यह दूध लगभग ४०० पोषक तत्वों से भरपूर होता है। माँ के इस दूध से नवजात शिशु को पोषण मिलता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। माँ का यह दूध पोषक तत्वों और एंटीबॉडिज़ से भरपूर होता है, यह बच्चे को बीमारी और संक्रमण से भी बचाता है। पीले रंग का द्रव, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, शिशु को संक्रमण से बचाने और उसकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का सबसे अच्छा उपाय है।स्तनपान शिशु के लिए आवश्यक क्यों होता है
माँ का दूध शिशु के लिए किसी अमृत से कम नहीं होता है। इसमें समस्त पोषक तत्व और शिशु के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर होता है। यह शिशु को उचित पोषण प्रदान करता है। शिशु के प्रथम एक वर्ष की आयु तक माँ का दूध आवश्यक होता है जो उसके शरीर को स्ट्रांग बनाता है और। इस अवधि में संक्रमण की सबसे अधिक आशंका बनी रहती है इसलिए माँ के दूध का कोई विकल्प नहीं होता है। कामकाजी महिलायें अक्सर बोतल का दूध पिलाने लग जाती है जो शिशु के लिए किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं होता है। प्रतिवर्ष में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों को स्तनपान के सबंध में जागरूक करना होता है। माँ के दूध से शिशु संक्रामक रोगो से बचा रह सकता है। माँ का दूध डायरिया, दस्त एक्यूट, ओटिटिस मीडिया और श्वसन संक्रमण में दन्तक्षय और दांतों की अपूर्ण स्थिति की रोकथाम में सहयोगी होता है। ऐसा नहीं है की स्तनपान से केवल शिशु को ही लाभ होता है अपितु स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में कैंसर की सम्भावना भी कम हो जाती है। माँ को उच्च रक्चाप की समस्या भी नहीं होती है।स्तनपान से शिशु को तो लाभ मिलता ही है इसके अलावा स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी इसका लाभ मिलता है। ताजा शोध में यह बात सामने होकर आयी है की अवसाद, हृदय से सबंधित रोग, स्तन कैंसर, कैंसर-डिम्बग्रंथि के कैंसर और स्तन कैंसरआदि की से स्तनपान करवाने से लाभ मिलता है। प्रसव के उपरांत स्तनपान तत्काल शुरू करने से स्तनों में सूजन या प्रसवोत्तर रक्तस्राव की शिकायत नहीं होती।
नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद से लेकर छह माह तक स्तनपान करवाना चाहिए। छह माह के उपरांत जब शिशु अपनी गर्दन सँभालने लग जाये और बैठने की और अग्रसर होने लगे तो शिशु को सप्लीमेंटरी आहार के साथ ०२ वर्ष तक जारी रखना चाहिए। जब तक शिशु ०२ वर्ष का ना हो जाय तब तक या इससे अधिक समय तक भी इसे चालू रखा जा सकता है। धीरे धीरे स्तनपान के प्रति शिशु की भी रूचि कुछ कम हो जाती है। इसलिए यह सलाह दी जाती है की जब तक माँ दूध पिला सकने में सक्षम हो या जब तक शिशु दूध पिए तब तक दो वर्ष तक शिशु को दूध पिलाना श्रेयकर होता है।
यह सुद्ध रूप से शिशु की भूख पर निर्भर करता है। दिन में छह से १८ बार तक बच्चा दूध का सेवन कर सकता है। यह कोई नियम नहीं होता है यह शिशु की भूख पर निर्भर करता है। माँ को कोशिश करनी चाहिए की जब भी शिशु को स्तनपान करवाएं उसे शोरगुल से दूर स्थान पर तसल्ली से स्तनपान करवाएं। यह भी सुनिश्चित करें की शिशु को उचित अवस्था में रखे। अनकम्फर्टेबले पोजीशन में शिशु दूध पिने पर ध्यान नहीं लगा पाता है और चिड़चिड़ा होकर बार बार रोने लगता है।
स्तनपान कैसे कराया जाता है, गोदी में करवाएं या फिर सो कर ?
कोशिश की जानी चाहिए की एक बार में एक स्तन का पूरा दूध पिलाया जाय। क्यों की शुरू में दूध गाढ़ा आता है और बाद में वसायुक्त पतला दूध आता है। शिशु को जब पतला दूध नहीं मिलता है तो वह चिड़चिड़ा होकर रोने लगता है। इसलिए पहले एक स्तन का दूध पिलायें और अगर शिशु इससे संतुष्ट नहीं होता है तो दूसरे स्तन का भी दूध दिया जा सकता है।