गिलोय से बढाए रोग प्रतिरोधक क्षमता
पीयुषबिन्दवः पेतुस्तेभ्यो जाता गुडूचिका॥
गिलोय से बढाए रोग प्रतिरोधक क्षमता
आजकल आप देखते होंगे की बाबा रामदेव किस प्रकार से गिलोय को ब्रह्माण्ड की सर्वश्रेष्ठ ओषधि बताते हैं। ऐसा नहीं है की बाबा ने यूँ ही गिलोय को सर्वश्रेष्ठ ओषधि बोल दिया हो। गिलोय आज से नहीं बल्कि हजारों वर्षों से आयुर्वेद का अहम् भाग रहा है। बाबा को नमन है की उन्होंने गिलोय और इसके गुणों को आम जन तक पहुंचाया है, इसका श्रेय तो रामदेव बाबा को ही जाता है। आजकल हर व्यक्ति गिलोय के बारे में खोज रहा है, और ये सही भी है। सबको पता होना चाहिए इस दिव्य ओषधि के प्रभावों का, तो आइये जानते है की गिलोय क्या है, कैसे ये रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करती है और इसके लाभ क्या हैं जो हम प्राप्त कर सकते हैं।
गिलोय (Tinosporacordifolia (Willd.) Miers)
गिलोय का वैज्ञानिक नाम 'टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया' (Tinospora cordifolia) होता है। गिलोय एक ओषधीय बेल / लता होती है जो असंख्य गुणों से परिपूर्ण होती है। आयुर्वेद में गिलोय को अमृता कहा गया है। गिलोय को अंग्रेजी में टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया कहा जाता है जो की इसका वानस्पतिक नाम है। आयुर्वेद में इसके गुणों को पहचान कर इसके बारे में विस्तार से बताया गया है और आयुर्वेद में इसे अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी आदि नामो से जाना जाता है। यह बेल पहाड़ों, खेतों के मेड़ों पर और पेड़ों के आस पास पायी जाती है और जिस पेड़ के सहारे ये ऊपर चढ़ती है उसके गुणों का समावेश स्वंय में कर लेती है। इसलिए नीम पर चढ़ी गिलोय को "नीम गिलोय" कहा जाता है। नीम के सारे गुण अपने में समावेश कर लेती है इसीलिए नीम पर चढ़ी गिलोय को श्रेष्ठ माना जाता है। आचार्य चरक ने इसके गुणों के बारे में विस्तार से वर्णन किया है। आयुर्वेद में इसका वर्णन प्राप्त होता है। इसका रस कड़वा होता है। रक्त वर्धर्क इसका गुण है। यह ज्वर नाशक है। गिलोय त्रिदोष नाशक होती है, यानी ये कफ, वात और पित्त को संतुलित करती है। इसके गुणों के कारण ही इसे अमृता कहा गया है और माना गया है की जो व्यक्ति नियमित रूप से गिलोय का सेवन करता है वह अपनी पूर्ण आयु को प्राप्त करता है बिना किसी रोग दोष के।गिलोय के पत्ते
गिलोय बेल का हर हिस्सा गुणकारी होता है। गिलोय के पत्ते हलके कसेले, तीखे और कड़वे होते हैं जो मुंह में चिकना स्वाद छोड़ते हैं। गिलोय के पत्ते पान के पत्ते से मिलते जुलते होते हैं। आप चाहे तो दो पत्ते रोज गिलोय की बेल से तोड़कर सीधे ही सेवन कर सकते हैं। गिलोय के पत्ते में कैल्शियम, प्रोटिन, फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसके तनों में स्टॉर्च पाया जाता है। बुजुर्ग लोग इसकी महत्ता को समझते थेऔर इसे नीम के पास लगाते थे। आप भी गिलोय के बेल को अवश्य लगाएं और इसके ताजे हरे पत्ते खाएं और रोगों से मुक्त रहे। औषधीय रूप में गिलोय के पत्ते कटु, तिक्त मधुर, उष्णवीर्य, लघु, त्रिदोष शामक, रसायन, अग्निदीपक, बलकारक, मलरोधक, चक्षुष्य तथा पथ्य होते हैं। गिलोय के पत्तों का सेवन करने से वातरक्त, तृष्णा, दाह, प्रमेह, कुष्ठ, कामला तथा पाण्डु रोग में लाभ प्राप्त होता है। गिलोय का प्रधानता से वातरक्त, पाण्डु, ज्वर, छर्दि, जीर्णज्वर, कामला, प्रमेह, अरुचि, श्वास, कास, हिक्का, अर्श, दाह, मूत्रकृच्छ, प्रदर आदि रोगों की उपचार में किया जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए
बवासीर में लाभदायक
रक्त को बनाये साफ़
गिलोय से मानसिक तनाव कम करें
गिलोय का उपयोग त्वचा के लिए
अस्थमा के लिए गिलोय
पेशाब की रुकावट के लिए गिलोय का उपयोग
गिलोय का उपयोग पाचन तंत्र के सुधार के लिए
हाथ पैरों में जलन के लिए
कान में दर्द के लिए
खुजली के लिए गिलोय
गठिया रोग में गिलोय का योगदान
गिलोय का उपयोग बुखार के लिए
मोटापा दूर करने के लिए गिलोय
उलटी के लिए गिलोय
कैंसर में गिलोय का प्रयोग
हृदय रोग और ब्लड प्रेशर के लिए गिलोय
मधुमेह में गिलोय का लाभ
गिलोय का उपयोग पेट दर्द के लिए
गिलोय के अन्य लाभ
- मस्तिष्क से सबंधित बिमारियों और स्मरण शक्ति के विकास के लिए गिलोय लाभदायक हो सकती है।
- पेट से सबंधित बिमारियों के उपचार के लिए गिलोय सहायक हो सकती है।
- गिलोय के सेवन से गुप्त रोगों के उपचार में सहायता मिलती है, इसके लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेवें।
- रक्त से सबंधित व्याधियों के लिए गिलोय का सेवन लाभदायक हैं।
- त्रिफला के साथ गिलोय का नित्य सेवन करने से पुराना कब्ज दूर होता है।
- मूत्र सबंधी विकारों में गिलोय लाभदायक होती है।
- गिलोय के सेवन से शरीर में रक्त बढ़ता है।
- गिलोय के रस का नित्य सेवन करने से स्मरण शक्ति में इजाफा होता है और यह एक तरह से मस्तिष्क के लिए टॉनिक का काम करता है|
- शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाता है।
- खाँसी, मलेरिया, शीत ज्वर (विषाणुक संक्रमण) में इसका उपयोग लाभदायक होता है।
- गिलोय के सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रण में रखा जा सकता है।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
- गिलोय के सेवन से त्वचा जवान बनी रहती है और त्वचा के संक्रमण दूर होते हैं।
- कुष्ठ रोगों में इसका सेवन लाभकारी होता है।
- गिलोय का सेवन लिवर की देखभाल के लिए लाभदायक होता है।
- गिलोय शरीर के विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में लाभदायी होता है।
- पीलिया में इसका उपयोग किया जाता है।
- गठिया और अन्य जोड़ों के दर्द में इसका सेवन लाभदायक होता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम में उपयोगी। शुगर के मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए या फिर डॉक्टर की राय लेनी चाहिए।
- गिलोय के रस को शहद के साथ सेवन करने से पेट से जुड़े रोग ठीक होते हैं
- राजयक्ष्मा रोग (Tuberculosis) में लाभ मिलता है।
- शरीर की इम्युनिटी को बढाती है |
- शरीर की सुजन कम करने में लाभकारी होती है
- गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक, ओजवर्धक, हृदयरोगनाशक ,शोधनाशक और लीवर टॉनिक भी है।
- गिलोय उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए, शर्करा का स्तर बनाए रखने में मदद करता है। यह शरीर को दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है।
- गिलोय गुर्दे और लीवर के सारे विषाक्त पदार्थों को दूर करता है।
- गिलोय के तने को तुलसी, पपीते के पत्ते, एलोवेरा और अनार के रस के साथ जूस बनाकर पीने से डेंगू रोग में सुधार होता है।
- इसके रस का सेवन करने से खून की कमी दूर होती है| साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है| यह कोलेस्ट्रोल (Cholesterol) कम करती है|
- गिलोय का पत्ता पीलिया रोग में बहुत ही फायदेमंद होता है। 1 चम्मच गिलोय, 1 चम्मच शहद और त्रिफला को मिलकर खाने से पीलिया जैसा रोग दूर हो सकता है।
- गिलोय के रस को शहद के साथ लेने से शारीरिक कमज़ोरी दूर होती है|
- गिलोय में एंटी-पाइरेटिक कम्पाउंड होता है जो क्रोनिक बुखार से बचाता है।
- गिलोय तथा ब्राह्मी का मिश्रण सेवन करने से दिल की धड़कन को काबू में लाया जा सकता है।
गिलोय का उपयोग कब नहीं किया जाना चाहिए
गिलोय का सेवन निश्चित मात्रा से अधिक नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।
गर्भावस्था के दौरान भी गिलोय का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।
यदि आपका ब्लड शुगर कम है तो भी आप गिलोय का सेवन नहीं करें क्योंकि गिलोय के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर और अधिक कम हो जाता है।
छोटे शिशु को गिलोय देने से परहेज करें या चिकित्सक की सलाह लें।