कपर्दक भस्म के फायदे और उपयोग
कपर्दक भस्म के फायदे और उपयोग
कपर्दक भष्म की तासीर क्या होती है ?
कपर्दक भस्म की तासीर गर्म होती है। कपर्दक भष्म का रस तिक्त और कटु होता है, इसका विपाक कटु और वीर्य उष्ण होता है।कपर्दक भष्म का उपयोग कहाँ किया जाता है ?
अम्लपित्त : कपर्दक भष्म का उपयोग अम्लपित्त के उपचार के लिए किया जाता है। अम्लपित्त जिसे हम सामान्य रूप से एसिडिटी कहते हैं एक तरह उदर व्याधि है जिसमें पित्त बिगड़ जाता है। पित्त अम्लीय हो जाता है और खट्टी डकारें आने लगती हैं। पित्त का खट्टा हो जाना ही अम्ल पित्त होता है। उल्लेखनीय है की सामान्य पित्त खट्टा नहीं होता है और दुर्गन्ध नहीं देता है तथा स्वाद में कटु और गर्म होता है। अम्ल पित्त कई कारणों से पैदा होता है यथा शरीर में पित्त के अधिकता, अधिक मिर्च मसालों का तैलीय भोजन, पाचन तंत्र की कमजोरी और दूषित भोजन आदि। अम्ल पित्त के लक्षणों में खट्टी डकारों का आना, कब्ज रहना, आफरा, छाती में जलन, गैस का बनना, मुंह में पानी का आना, मानसिक तनाव, पेट का भारी रहना, दांतों और आखों का कमजोर होना, मुंह के छाले, पेट में जलन, पेशाब में जलन आदि। कपर्दक भस्म अम्ल पित्त के उपयोगी होती है। कपर्दक भस्म के अतिरिक्त आमलकी चूर्ण, यष्ठीमधु चूर्ण आदि अम्लपित्त के लिए उपयोगी होते हैं।
- अजीर्ण -पाचन के कमजोरी।
- पेट का भारीपन।
- एसिडिटी,
- पक्तिशूल (Duodenal ulcer)
- रक्तपित्त (रक्त का बहना)
- अग्निमांद्य (Digestive impairment)
- कर्ण स्राव (Otorrhoea)
- नेत्ररोग (Eye disorder)
- क्षय (Pthisis)
- स्फोट (Boil)
- यह पाचन उत्तेजक होती है।
- कपर्दक भस्म अम्लत्वनाशक होती है।
- यह ओषधि आक्षेपनाशक होती है।
- यह उदर वायुनाशी होती है।
- जी मिचलाना और खट्टी डकारों के साथ यह वमनरोधी होती है।
- यह आम पाचक, अध्यमान रोकने वाला भी होती है।
कपर्दक भस्म के फायदे/लाभ Kapardak Bhasma Ke Benefits
- अम्ल पित्त के निदान के लिए कपर्दक भस्म का उपयोग श्रेष्ठ होता है। इसके साथ अविपत्तिकर चूर्ण, हिंग्वाष्टक चूर्ण, अग्निसंदीपन चूर्ण, बिल्वादि चूर्ण श्रेष्ठ परिणाम देते हैं। पाचन तंत्र के दुरुस्त होने पर भूख में भी वृद्धि होती है। यह बढे हुए अम्ल को निष्क्रिय करती है।
- पेट दर्द में भी कपर्दक भस्म लाभकारी होती है।
- आँतों की सूजन और आँतों के दर्द को दूर करने में भी कपर्दक भस्म अत्यंत ही लाभकारी होती है।
- पेट के आफरा (गैस/पेट का फूलना) विकार में भी कपर्दक भस्म के सेवन से लाभ मिलता है।
- कपर्दक भस्म वायुनाशक, सूजन दूर करने वाली और वात शामक होती है।
- यह भस्म उदर अम्ल स्त्राव को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
- कपर्दक भस्म भूख को जाग्रत करती है और भोजन में रूचि पैदा करने में सहायक होती है।
- मुंह के सूखने पर इसे आप आवला चूर्ण के साथ या मुलेठी चूर्ण के साथ कपर्दक भष्म का उपयोग लाभकारी होता है। हाथ पैर की जलन भी इससे ठीक होती है।
- मघपिप्पल चूर्ण और शहद के साथ इसका सेवन करने से स्वांस नली के संक्रमण, सांस का उठना आदि में लाभ मिलता है।
- स्वास विकारों को दूर करने के लिए आप कपर्दक भस्म का उपयोग मक्खन के साथ करने पर लाभ मिलता है।
- यह रोगप्रतिरोधक शक्ति का विकास करने में सहायक होती है।
- कर्णस्राव होने पर कपर्दक भस्म को कान में डाला जाता है इसके उपरान्त निम्बू का रस या मीठा तेल /सिद्ध तेल डालने से कान से पानी निकलना विकार दूर होता है।
- आमातिसार और ग्रहणी विकारों में लाभदाई होती है।
- खराब पाचन के कारण पेट में गैस के गोले बनना और इधर उधर सरकना, पेट का दर्द होना आदि विकारों में कपर्दक भस्म के साथ आरोग्यवर्धिनी वटी के सेवन से लाभ मिलता है।
कपर्दक भस्म का उपयोग और सेवन विधि
कपर्दक भस्म/पीली कौड़ी भस्म कैसे बनती है ?
भस्म बनाने के लिए आप हम लगभग आधा किलो उपले का आंच तैयार करेंगे और उस पर तवे को गर्म कर लेंगे। तवे के गर्म होने पर हम इस पर शुद्ध किये गए कौड़ी को रखेंगे और ऊपर से किसी अन्य तवे या ढकने के पात्र से ढक देंगे। इसके उपरान्त आप कोयले से ही ऊपर से ढक दें। कोयले के ठन्डे होने पर आप कौड़ी को निकाल लें। आप देखेंगे की भस्म पक कर सफ़ेद हो जाती है। अब इसे खरड़ में पीस लें। इसे अब आप काँच के पात्र में स्टोर कर लें।
इसके सेवन में सावधानियां Precaution of Usages of Kapardak Bhasma
- कपर्दक भस्म का सेवन वैद्य द्वारा बताई गई निश्चित मात्रा और सेवन विधि के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
- कपर्दक भस्म का उपयोग सीधे नहीं करना चाहिए इसे गिलोय सत, मिश्री, गाय का घी या मुलेठी के साथ लिया जाना चाहिए।
- इस ओषधि के सेवन करने के दौरान दूध का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
- आप दूध के स्थान पर दही और छाछ का उपयोग करें।
- केला और अनार का सेवन अधिक करें।
कपर्दक भष्म के साइड इफेक्ट्स, दुष्परिणाम Side Effects of Kapardak Bhashma Hindi
कपर्दक भष्म प्राइस Kapardak Bhashma Price
पतंजलि कपर्दक भष्म Patanjali Kapardak Bhasma
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Baidyanath Kapardak Bhasma बैद्यनाथ कपर्दक भस्म
घटक द्रव्य: पीली कौड़ी निंबू स्वरस में शास्त्रानुसार विधि से निर्मित
चिकित्सीय उपयोग: पेट दर्द ,अम्ल पित्त, भूख की कमी, गैस इत्यादि रोगों में उपयोगी
संदर्भ: रसेंद्र सार संग्रह
सेवन मात्रा: २ रति से ४ रत्ती सुबह शाम शहद से या चिकित्सक के परामर्श अनुसार.
Link : https://www.baidyanath.co.in/hindi/1875-details.html
- Evaluation of varatika bhasma for its ulcer protective effect on albino rats
- Bhasma : The ancient Indian nanomedicine
- CHEMICAL STANDARDISATION STUDIES ON VARATIKA BHASMA
- Bhasma : The ancient Indian nanomedicine
- Formulation, Standardization and Comparative Evaluation of Ancient Nanomedicine Varatika Bhasma International Journal of Pharmaceutical and Drug Analysis, 2015; Vol: 3; Issue: 4, 126-134.
- Preparation and Characterization of Metal Oxide as Nano Particles -Varatika Bhasma
- RESEARCH ARTICLEI-,PHARMACEUTICO-ANALYTICAL STUDY OF VARATIKA BHASMA,WITH SPECIAL REFERENCE TO ITS TYPES ACCORDING TO,RASATARANGINI
