पतंजलि श्वासारि प्रवाही फायदे घटक सेवन विधि
पतंजलि श्वासारि प्रवाही फायदे घटक सेवन विधि
It is the best tonic for all types of respiratory problems. even the children could take it. Its use treats cold, serious cough, asthma, cough, problem in ribs and other such diseases. Dosage and Usage : 5 to 10 ml in a day, according to the need. Draveshu chirakalasyam dravyam yatsandhitam bhavet, Asvarishta Bedaistu prochyate bheshajochitam. The preparation of asav, arishta and liquid decoction in Divya Pharmacy and Patanjali Ayurveda is done under the strict vigilance of experienced vaidhyas attentively, with complete adherence of Ayurvedic Science. The purity, quantity and quality of the herbs utilized are the top most priority. Hence, the asavas / aristas of Divya Pharmacy and Patanjali Ayurveda are qualitative and effective.
पतंजलि श्वासारि प्रवाही के घटक (Composition of Patanjali Shawasri Pravahi) Patanjali Swasari Pravahi Ke Ghatak Hindi Me
- काली मिर्च Kali Marich (Piper longum)
- मुलेठी Mulethi (Glycyrrhiza glabra)
- छोटी कटेली Kateli badi (Solanum indicum)
- काला वासा Kala vasa (Justicia gendarussa)
- सफ़ेद वासा Safed vasa (Adhatoda vasica)
- बनफ्शा Banfsa (Viola osorata)
- छोटी पिप्पल Chhoti pipal (Piper longum)
- तुलसी देसी Tulsi Desi (Ocimum sanctum)
- दालचीनी Dalchini (Cinnamomum zeylanicum)
- लवंग Lavang (Syzgium aromaticum)
- सोंठ Sonth (Zingiber officinale)
- तेजपत्र Tejpatra (Cinnamomum tamala)
- भांगरा (भृंगराज ) Bhangra (Eclipta alba)
- लसोड़ा Lishoda (Cordia dichotoma)
- अमलतास Amaltas (Cassia fistula)
- सोमलता Ephedragerardiana
पतंजलि श्वासारि प्रवाही के फायदे (Benefits of Shvashari Pravahi in Hindi ) Patanjali Swasari Pravahi Ke Fayade Hindi
- यह दवा कफ्फ को ढीला करके शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है।
- खांसी के कारण गले में आयी खरांस और स्वांस की नली में आयी सूजन को कम करने में लाभदायी।
- निमोनिया रोग में भी लाभदायी।
- फेफड़ों के संक्रमण/फेफड़ों के दर्द में लाभदायी।
- इस दवा के सेवन से फेफड़ों में कफ्फ का निर्माण कम होता है।
- फेफड़ों में कफ्फ को जमा होने से रोकता है और जमा कफ्फ को दूर करने में लाभदायी होती है।
- सामान्य सर्दी झुकाम, खांसी, कफ आदि में लाभदायी।
- स्वांस नली में आयी रुकावट को दूर करके स्वांस लेने की प्रक्रिया को सुधरने में लाभदायी।
- अस्थमा रोग में भी लाभदायी।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करने में सहयोगी।
- शीत रोगों में अत्यंत ही लाभकारी।
- सूखे कफ्फ में भी अत्यंत ही प्रभावी दवा।
पतंजलि श्वासारि प्रवाही का कर्म Gun Karma of Patanjali Swasari Pravahi
- कफहर- कफ दूर करना
- छेदन:-जमे हुए कफ को दूर करना
- दीपन-भूख बढ़ाना
- पित्तकर-पित्त बढ़ाना
- रुचिकारक-स्वाद बढ़ाना
- वातहर-वात दोष को दूर करना
- श्लेष्महर-कफ को दूर करना
पतंजलि श्वासारि प्रवाही को कहाँ से खरीदें : इसे आप पतंजलि ऑनलाइन स्टोर्स या फिर ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। इसके लिए आप पतंजलि की अधिकृत वेबसाइट पर विजिट करें जिसका लिंक निचे दिया गया हैं।
https://www.patanjaliayurved.net/product/ayurvedic-medicine/syrup/divya-swasari-pravahi/185
मुलेठी (Glycyrrhiza Glabra)मुलेठी क्वाथ के विषय में जानने से पहले जाहिर सी बात है की हमें मुलेठी को जान लेना चाहिए। औशधिय गुणों से भरपूर मुलेठी एक झाड़ीनुमा पौधा होता है जिसका वानस्पतिक नाम Glycyrrhiza glabra Linn ग्लीसीर्रहीजा ग्लाब्र, और इसका कुल - Fabaceae होता है जिसे प्राचीन समय से ही उपयोग में लिया जाता रहा है। इसको कई नामो से जाना जाता है यथा यष्टीमधु, यष्टीमधुक, मधुयष्टि, जलयष्टि, क्लीतिका, मधुक, स्थल्यष्टी आदि। पंजाब के इलाकों में इसे मीठी जड़ के नाम से भी जाना जाता है। यह पौधा भारत के अलावा अरब, ईरान, तुर्कीस्तान, अफगानिस्तान, ईराक, ग्रीक, चीन, मिस्र दक्षिणी रूस में अधिकता से पाया जाता है। पहले यह खाड़ी देशों से आयात किया जाता था लेकिन अब इसकी खेती भारत में भी की जाने लगी है।
इसको पहचाने के लिए बताये तो इसके गुलाबी और जामुनी रंग के फूल होते हैं और इसके पत्ते एक दुसरे के पास (संयुक्त) और अंडाकार होते हैं। मुलेठी या मुलहटी पहाड़ी क्षेत्रों की माध्यम ऊँचाई के क्षेत्रों में अधिकता से पायी जाती है। इसका पौधा लगभग 6 फूट तक लम्बाई ले सकता है। इस पौधे की जो जड़े होती/ भूमिगत तना ही ओषधिय गुणों से भरपूर होता हैं। मुलेठी से हमें मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा आदि प्राप्त होते हैं। मुख्यतः मुलेठी जी जड़ों को ही उपयोग में लिया जाता है। इसकी मांग को देखते हुए पंजाब के कई इलाकों में इसकी खेती की जाने लगी है।
- गले की खरांस, सर्दी जुकाम और खांसी के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- मुलेठी गले, दाँतों और मसूड़ों के लिए लाभदायक होती है।
- दमा रोगियों के लिए भी मुलेठी अत्यंत लाभदायी होती है।
- वात और पित्त रोगों के लिए मुलेठी सर्वोत्तम मानी जाती है।
- खून साफ़ करती है और त्वचा के संक्रमण को दूर करती है।
- मुलेठी चूर्ण को दूध और शहद में मिलाकर लेने से कमोत्त्जना की बढ़ोत्तरी होती है।
- मुलेठी की एक डंडी को मुंह में रखकर देर तक चूसते रहे इससे गले की खरांस और खांसी में लाभ मिलता है।
- स्वांस से सबंधित रोगों में भी मुलेठी क्वाथ से लाभ मिलता है।
- हल्दी के साथ मुलेठी चूर्ण को लेने से पेट के अल्सर में सुधार होता है।
- पेट दर्द के लिए भी आप मुलेठी चूर्ण की फाकी ले सकते हैं जिससे पेट दर्द और एंठन में लाभ मिलता है।
- स्वांस नली की सुजन के लिए भी यह श्रेष्ठ है।
- एंटी बेक्टेरिअल होने के कारन यह पेट के कर्मी को समाप्त करती है और त्वचा के संक्रमण के लिए भी लाभदायी होती है।
- खांसी या सुखी खांसी के लिए आप मुलेठी चूर्ण को शहद में मिलाकर दिन में दो बार चाटे तो लाभ मिलता है इसके साथ ही आप मुलेठी का एक टुकड़ा मुंह में भी रखे तो जल्दी आराम मिलता है।
- यदि मुंह में जलन हो / इन्फेक्शन हो / छाले हो तो आप मुलेठी को सुपारी जितने आकार के टुकड़ों में काट लें और इनपर शहद लगाकर मुंह में रखे और इसे चूसे इससे लाभ मिलता है।
- मुलेठी चूर्ण को नियमित रूप से दूध में लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।
- पीलिया, अल्सर, ब्रोंकाइटिस आदि विकारों में भी मुलेठी लाभदायी होती है।
- अन्य दवाओं के योग से ये स्त्रियों के रोगों के लिए भी उत्तम होती है। इसके सेवन से सौन्दय भी बढ़ता है।
- अपच, अफरा, पेचिश, हाइपर एसिडिटी आदि विकारों में भी मुलेठी के सेवन से लाभ मिलता है।
- अल्सर के घावों को शीघ्र भरने वाले विभिन्न घटक ग्लाइकेसइड्स, लिक्विरीस्ट्रोसाइड्स, आइसोलिक्विरीस्ट्रोसाइड आदि तत्व भी मुलेठी में पाये जाते हैं।
- मुलेठी वमननाशक व पिपासानाशक होती है।
- मुलेठी अमाशय की अम्लता में कमी व क्षतिग्रस्त व्रणों में सुधार लाता है।
- अम्लोतेजक पदार्थ खाने पर होने वाली पेट की जलन, दर्द आदि को चमत्कारिक रूप से ठीक करता है
सफ़ेद वासा Safed vasa (Adhatoda vasica) : यह भी वासा की ही प्रजाति का एक पौधा होता है। इसे भी सामान्य रूप से अल्डुसा के नाम से जाना जाता है। गुण धर्म में इसका उपयोग भी कफ्फ को पतला करने, खांसी को दूर करने, गले की खरांस को कम करना आदि कार्यों में किया जाता रहा है।
- लौंग के तेल से दांत के कीड़ों को दूर किया जाता है और साथ ही मसूड़ों की सूजन को कम करने में सहायक होता है।
- लौंग के चूर्ण को पानी के साथ लेने से कफ्फ बाहर निकलता है और फेफड़ों में कफ के जमा होने के कारण आने वाली खांसी में आराम मिलता है।
- लौंग के चूर्ण की गोली को मुंह में रखने से सांसों के बदबू दूर होती है और गले की खरांस भी ठीक होती है।
- कुक्कर खांसी में भी लौंग के सेवन से लाभ मिलता है।
- छाती से सबंधित रोगों में भी लौंग का सेवन लाभदायी होता है।
सोंठ : अदरक ( जिंजिबर ऑफ़िसिनेल / Zingiber officinale ) को पूर्णतया पकने के बाद इसे सुखाकर सोंठ बनायी जाती है। ताजा अदरक को सुखाकर सौंठ बनायी जाती है जिसका पाउडर करके उपयोग में लिया जाता है। सौंठ का स्वाद तीखा होता है और यह महकदार होती है। अदरक गुण सौंठ के रूप में अधिक बढ़ जाते हैं। अदरक जिंजीबरेसी कुल का पौधा है। अदरक का उपयोग सामान्य रूप से हमारे रसोई में मसाले के रूप में किया जाता है। चाय और सब्जी में इसका उपयोग सर्दियों ज्यादा किया जाता है। अदरक के यदि औषधीय गुणों की बात की जाय तो यह शरीर से गैस को कम करने में सहायता करता है, इसीलिए सौंठ का पानी पिने से गठिया आदि रोगों में लाभ मिलता है। सामान्य रूप से सौंठ का उपयोग करने से सर्दी खांसी में आराम मिलता है। अन्य ओषधियों के साथ इसका उपयोग करने से कई अन्य बिमारियों में भी लाभ मिलता है। नवीनतम शोध के अनुसार अदरक में एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण पाए जाते हैं जो शरीर से विषाक्त प्रदार्थ को बाहर निकालने में हमारी मदद करते हैं और कुछ विशेष परिस्थितियों में कैंसर जैसे रोग से भी लड़ने में सहयोगी हो सकते हैं। पाचन तंत्र के विकार, जोड़ों के दर्द, पसलियों के दर्द, मांपेशियों में दर्द, सर्दी झुकाम आदि में सौंठ का उपयोग श्रेष्ठ माना जाता है। सौंठ के पानी के सेवन से वजन नियंत्रण होता है और साथ ही यूरिन इन्फेक्शन में भी राहत मिलती है। सौंठ से हाइपरटेंशन दूर होती है और हृदय सबंधी विकारों में भी लाभदायी होती है। करक्यूमिन और कैप्साइसिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट के कारन सौंठ अधिक उपयोगी होता है।
