सारस्वत घृत के उपयोग फायदे घटक और सेवन विधि
सारस्वत घृत के उपयोग फायदे घटक और सेवन विधि
सारस्वत घृत ओषधि क्या है परिचय
यह एक प्राचीन ग्रंथों आधारित ओषधि है जो की मस्तिष्क, वाणी, तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने के लिए उपयोग में लाइ जाती है। इस ओषधि के घटक मस्तिष्क विकारों को दूर करने के लिए बहुत प्रभाव हैं। जैसे ब्राह्मी, मंडूकपर्णी और जटामांसी आदि जो की स्मरण शक्ति को बढ़ाने, भरम दूर करने, माइग्रेन, अनिद्रा विकारों में बहुत लाभकारी हैं।ऐतिहासिक संदर्भ और पारंपरिक रूप से उपयोग
सारस्वत घृत का उल्लेख भैषज्य रत्नावली जैसे अमूल्य ग्रंथों में प्राप्त होता है। ग्रन्थ में इस ओषधि को वाणी को सुचारु करने, स्मृति विलोप दूर करने में लाभकारी बताया गया है। शारंगधरा संहिता, चरक संहिता, अष्टांग हृदयम् आदि में इसे रसायन कहा गया है जो तंत्रिका तंत्र को शक्ति देने वाला, नसों के दर्द को दूर करने वाला, अनिंद्रा विकार दूर करने वाला बताया है। वृद्धावस्था में मनोभ्रंश, अल्जाइमर रोग आदि विकारों में भी यह ओषधि लाभकारी है।वाचां वृद्धिकरं श्रेष्ठं मेध्यं सर्वरोगनुतम्॥
सारस्वतं घृतं श्रेष्ठं मेध्यं वाग्वर्धनं परम्।
स्मृतिदोषहरं दीप्तं बुद्धिस्थानगतं शुभम्॥
सारस्वत घृत के घटक
- हरीतकी (Terminalia chebula)- आयुर्वेद में “औषधियों का राजा” कही जाने वाली हरीतकी स्मृति, ध्यान और पाचन को मजबूत बनाती है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
- सुंठी (Zingiber officinale)- अदरक के सूखे रूप सुंठी मस्तिष्क की सूजन घटाती है और वाणी संबंधी दोषों में राहत देती है।
- पिप्पली (Piper longum)- जीवनदायी पिप्पली रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है तथा तनाव से मुक्ति दिलाती है।
- वाचा (Acorus calamus)- वाचा वाणी की स्पष्टता बढ़ाती है और मानसिक स्पष्टता प्रदान करती है।
- ब्राह्मी (Bacopa monnieri)- मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए विख्यात ब्राह्मी स्मृति व एकाग्रता में सुधार लाती है।
- अश्वगंधा (Withania somnifera)- अश्वगंधा तनाव कम करती है तथा मस्तिष्क की रक्षा करती है।
- गुडुची (Tinospora cordifolia)- गुडुची प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनाती है और शरीर को शुद्ध करती है।
- शंखपुष्पी (Convolvulus pluricaulis)- शंखपुष्पी चिंता दूर करती है तथा स्मृति को तीक्ष्ण बनाती है।
- यष्टिमधु (Glycyrrhiza glabra)- यष्टिमधु गले की परेशानियों में लाभकारी है तथा श्वास संबंधी विकारों में सहायक।
- तुलसी (Ocimum sanctum)- तुलसी तनाव घटाती है तथा श्वासनली की समस्याओं में आराम देती है।
सारस्वत घृत गुण कर्म
रस (स्वाद) : मुख्य रूप से मीठा (मधुर), जिसमें ब्राह्मी और मंडुकापर्णी के कारण हल्का कड़वा (तिक्त) और कसैला (कषाय) स्वाद होता है।वीर्य (शक्ति) : उष्ण (गर्म), अग्नि (पाचन अग्नि) और तंत्रिका-संवहनी में उपयोगी ।
विपाक (पाचनोत्तर प्रभाव) : मधुर, धातुओं का पोषण करती है।
प्रभाव : शांत, नींद लाने वाली और तनाव दूर करने वाली।
- यह संज्ञानात्मक गुणों से युक्त है, जो स्मृति, बुद्धि और ध्यान को बढ़ाता है।
- वाक् शक्ति को मजबूत बनाता है तथा कंठ/गले से संबधित कार्यों को सुधारता है।
- यह अवसादरोधी प्रभाव रखता है, जो चिंता और मानसिक असंतुलन को दूर करता है।
- इम्यूनो मॉड्यूलेटर के रूप में कार्य करता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शक्ति देता है।
- सूजन-रोधी तथा रोगाणुरोधी गुणों से युक्त है, जो संक्रमणों कोदूर करता है।
- यह ओषधि मेध्य रसायन के गुणों से युक्त है।
सारस्वत घृत के फायदे
ओषधि स्मृति वर्धक और मस्तिक को शक्ति प्रदान करने के लिए
वाणी विकारों को दूर करने के लिए
सारस्वत घृत का उपयोग वाणी विकारों को दूर करने में लाभकारी है। इस ओषधि के सेवन से वाणी में स्पष्टता आदि है। अन्य वाक् विकारों में भी यह ओषधि लाभकारी है।पाचन तंत्र को बल देने के लिए उपयोगी
सारस्वत घृत के उपयोग से पाचन अग्नि को बल मिलता है। हरीतकी और सौंठ पाचन को बल देते हैं।अन्य लाभ/फायदे
- सुंठी और यष्टिमधु के कारण इस ओषधि से सुजन दूर होती है और सुजन के कारण होने वाले दर्द दूर होता है।
- मस्तिष्क में ऑक्सीज़न का स्तर सुधरता है।
- एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण रोग प्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है।
- वाणी का हकलाना, दुर्बलता को दूर कर वाणी को स्पष्ट करने में बहुत लाभकारी है।
- तंत्रिका तंत्र के विकार को दूर करने में लाभकारी।
- माइग्रेन, सरदर्द में भी यह ओषधि उपयोगी है।
- मानसिक कमजोरी, थकान को दूर करने में लाभकारी।
सारस्वत घृत की निर्माण विधि
इस ओषधि के निमार्ण के लिए आयुर्वेदिक ग्रंथों में एक परिष्कृत प्रक्रिया प्राप्त होती है। इस ओषधि को धीमी अग्नि पर पकाई जाती है ताकि औषधीय प्रभाव अधिकतम हो। पारंपरिक तरीका आधुनिक संक्षिप्त विधियों से श्रेष्ठ माना जाता है। सबसे पहले आप प्रामाणिक और जैविक जड़ी-बूटियों का चयन किया जाता है, जो शास्त्रोक्त गुणों वाली हों। जड़ी बूटियों का महीन चूर्ण बना 'कल्क' (गीला पेस्ट) बना लें, इसके लिए आप बकरी के दूध या पानी का उपयोग कर सकते हैं. इसके उपरान्त इस पेस्ट का काढ़ा तैयार करें। जब यह चौथाई रह जाए, इसका जल समाप्त हो जाए तो इसमें घी और डालें। इस घोल को धीमी आंच पर पकाएं और अंत में जब पानी पूर्ण रूप से समाप्त हो जाए तो घृत को छानकर काच के कंटेनर में स्टोर करें।
सारस्वत घृत का उपयोग /सेवन विधि
इस ओषधि का सेवन करने से पूर्व आप वैद्य की सलाह लें। सामान्य रूप से इसकी खुराक खुराक 3-6 ग्राम (लगभग आधा से एक चम्मच) दिन में एक या दो बार होती है।सरस्वती घृत के दुष्प्रभाव
सरस्वती घृत, एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से बुद्धि, स्मृति और वाणी दोषों के उपचार के लिए प्रयुक्त होती है, सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर कफ प्रकृतिवाले व्यक्तियों में हल्की अपच, भारीपन या दस्त जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप या अग्निमांद्य से ग्रस्त रोगियों को चिकित्सकीय सलाह बिना सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह घृतमय होने से पाचन तंत्र पर प्रभाव डाल सकता है।- Potential of Saraswata Ghrita against Alzheimers disease- A review
- https://www.bibliomed.org/fulltextpdf.php?mno=85160
- GC-MS/MS and HR-LCMS-QTOF analysis of various extracts of Saraswata Ghrita: A comprehensive dataset on phytochemical compounds
- Alzheimer's disease: A case study involving EEG-based fE/I ratio and pTau-181 protein analysis through nasal administration of Saraswata Ghrita
- Formulation composition of Saraswata Ghrita
- शारंगधरा संहिता,
- चरक संहिता,
- अष्टांग हृदयम

