पतंजली गिलोय क्वाथ के फायदे
पतंजली गिलोय क्वाथ के फायदे
ततो येयु प्रदेशेषु कपिगात्रात् परिच्युताः।पीयुषबिन्दवः पेतुस्तेभ्यो जाता गुडूचिका॥गिलोय के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है: गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं।
- पाचन में सुधार करता है: गिलोय में पाचन एंजाइम होते हैं, जो भोजन को पचाने और अवशोषित करने में मदद करते हैं। यह कब्ज, अपच और गैस जैसी पाचन समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।
- बुखार को कम करता है: गिलोय में एंटीपिरेटिक गुण होते हैं, जो बुखार को कम करने में मदद करते हैं।
- मधुमेह को नियंत्रित करता है: गिलोय में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
- कैंसर को रोकने में मदद करता है: गिलोय में एंटी-कैंसर गुण होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद करते हैं।
- त्वचा रोगों को दूर करता है: गिलोय में एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा रोगों जैसे कि मुंहासे, खुजली और दाद को दूर करने में मदद करते हैं।
गिलोय एक सुरक्षित और प्रभावी औषधीय पौधा है। इसका उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है।
गिलोय (Tinosporacordifolia (Willd.) Miers):
जाती है और जिस पेड़ के सहारे ये ऊपर चढ़ती है उसके गुणों का समावेश स्वंय में कर लेती है। इसलिए नीम पर चढ़ी गिलोय को "नीम गिलोय" कहा जाता है। नीम के सारे गुण अपने में समावेश कर लेती है इसीलिए नीम पर चढ़ी गिलोय को श्रेष्ठ माना जाता है। आचार्य चरक ने इसके गुणों के बारे में विस्तार से वर्णन किया है। आयुर्वेद में इसका वर्णन प्राप्त होता है। इसका रस कड़वा होता है। रक्त वर्धर्क इसका गुण है। यह ज्वर नाशक है। गिलोय त्रिदोष नाशक होती है, यानी ये कफ, वात और पित्त को संतुलित करती है।
गिलोय के पत्ते : Giloy Ke Patton Ke Fayade Hindi
इसकी महत्ता को समझते थे और इसे नीम के पास लगाते थे। आप भी गिलोय के बेल को अवश्य लगाएं और इसके ताजे हरे पत्ते खाएं और रोगों से मुक्त रहे। औषधीय रूप में गिलोय के पत्ते कटु, तिक्त मधुर, उष्णवीर्य, लघु, त्रिदोष शामक, रसायन, अग्निदीपक, बलकारक, मलरोधक, चक्षुष्य तथा पथ्य होते हैं। गिलोय के पत्तों का सेवन करने से वातरक्त, तृष्णा, दाह, प्रमेह, कुष्ठ, कामला तथा पाण्डु रोग में लाभ प्राप्त होता है। गिलोय का प्रधानता से वातरक्त, पाण्डु, ज्वर, छर्दि, जीर्णज्वर, कामला, प्रमेह, अरुचि, श्वास, कास, हिक्का, अर्श, दाह, मूत्रकृच्छ, प्रदर आदि रोगों की उपचार में किया जाता है।
पतंजली गिलोय क्वाथ के फायदे- गिलोय के गुण :
रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए : गिलोय के एंटीऑक्सीडेंट्स इसे अद्भुत बनाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का तेजी से विकास करती है। गिलोय के गुणों के अनुसार यह शरीर से फ्री रेडिकल्स को शरीर से बाहर निकलती है। शरीर में समय के साथ बनने वाले विषाक्त प्रदार्थों को भी बाहर निकालने में गिलोय का महत्वपूर्ण योगदान होता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर हो जाने पर ही बार बार एलर्जी होना, सर्दी जुकाम का लगना, बुखार और त्वचा के संक्रमण से सबंधित रोग होते हैं। गिलोय शरीर को इन संक्रमण से लड़ने की
शक्ति देता है। सुबह खाली पेट गिलोय स्वरस इसके लिए बेहतर उपाय हो सकता है। यदि आप स्वंय इसका रस घर पर बनाना चाहते हैं तो या तो आप इसके पत्ते चिक्तिसक की सलाह के अनुसार मुँह में चबा कर खाएं या फिर आप आधे गिलास पानी में गिलोय के कुचले हुए तने और पत्तों को धीमी आंच पर उबाले। इस काढ़े तो तब तक उबलने दें जब तक की ये चाय के छोटे कप जितना ना रह जाय। इसके बाद इसे छान लें और गुनगुने काढ़े को चाय की तरह पिए, इससे सर्दी जुकाम और अन्य संक्रमण में मदद मिलेगी।
रक्त को बनाये साफ़ : गिलोय में एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी बैक्ट्रियल गुण होते हैं जो की हमारे रक्त को साफ़ करते हैं और उसे स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं।
गिलोय से मानसिक तनाव कम करें : तनाव से जीवन का हर क्षेत्र प्रभावित होता है, इसलिए स्ट्रेस से मुक्ति के लिए गिलोय लाभदायक हो सकती है। गिलोय के सेवन से आप तनाव भी कम कर सकते हैं, इसका कारण है इसमें पाए जाने वाले एडाप्टोजेनिक जो की तनाव कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर से ऐसे तत्वों को बाहर निकलता है जो की मानसिक अवसाद का कारन बनते हैं। आयुर्वेदिक टॉनिक में इसका उपयोग मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके चूर्ण को शहद में मिलाकर लेने से मस्तिष्क से सबंधित बिमारियों में सहारा मिल सकता है।
गिलोय का उपयोग त्वचा के लिए : गिलोय का उपयोग त्वचा सबंधी रोगों की रोकथाम के लिए भी किया जाता है। त्वचा के संक्रमण जनित रोगों के लिए गिलोय उपयोगी होता है। दाद खाज फोड़े फुंसी के अलावा गिलोय के सेवन से त्वचा की झुर्रियां और कालेपन के निशान दूर होते हैं, ऐसा इसमें पाए जाने वाले एंटी एजिंग प्रॉपर्टीज के कारन होता है। त्वचा पर इसके रस को लेप की तरह से लगाना भी लाभदायक होता है।
अस्थमा के लिए गिलोय : अस्थमा रोग और अन्य स्वसन सबंधी रोगों में भी गिलोय का उपयोग लाभदायक होता है। इसके रस के सेवन या फिर पत्तियों को चबाने से अस्थमा और अन्य स्वास से सबंधित विकारों में मदद मिलती है। पुरानी खांसी के उपचार के लिए गिलोय का उपयोग श्रेष्ठ माना जाता है। दो चमच गिलोय का रस रोज सुबह लेने से खांसी का उपचार होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के साथ साथ इन रोगों से मुक्ति मिलती है।
पेशाब की रुकावट के लिए गिलोय का उपयोग : यदि मूत्र से सबंधित कोई विकार है या फिर पेशाब मूत्र से सबंधित मार्ग में पथरी हो तो गिलोय इसके लिए लाभदायक होती है। इसके लिए गिलोय का स्वरस उपयोगी होता है। गिलोय रस के साथ यदि अश्वगंधा की जड़ों को भी उपयोग में लिया जाय तो इसके लाभ बढ़ जाते हैं।
गिलोय का उपयोग पाचन तंत्र के सुधार के लिए : गिलोय का स्वरस पाचन तंत्र के सुधार के लिए भी उपयोगी होता है। त्रिफला के साथ यदि गिलोय का भी प्रयोग किया जाता है पाचन तंत्र सबंधी विकारों से शीघ्र लाभ मिलता है।
हाथ पैरों में जलन के लिए : यदि आपके हाथ पैरों में जलन रहती है और वे गर्म बने रहते है तो आप गिलोय के तने और पत्तों का पेस्ट बना कर उसे हाथों और तलवों में लगाएं। इसके साथ साथ गिलोय स्वरस का भी सेवन करें जिससे आपके हाथ पैरों की जलन ठीक हो जायेगी।
कान में दर्द के लिए : कान में दर्द होने पर गिलोय का रस कान में डालने पर राहत मिलती है।
गिलोय की तासीर : गिलोय की तासीर गर्म होती है। इसका सेवन सर्दियों में करना अत्यंत ही लाभदायक होती है।
खुजली के लिए गिलोय : दाद खाज और खुजली वाले स्थान पर गिलोय को हल्दी में पीस कर लगाने से आराम मिलता है।
गठिया रोग में गिलोय का योगदान : गिलोय स्वरस का सेवन करने से गठिया के रोग में कुछ लाभ मिलता है। गिलोय में पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमेंटरी और एंटी सेप्टिक गुणों के कारण इसका उपयोग गठिया रोगों में भी लाभ पहुंचा सकता है।
गिलोय का उपयोग बुखार के लिए : वायरल बुखार के लिए गिलोय का सेवन लाभदायक होता है। चिकन गुनिया, डेंगू, वायरल बुखार के लिए गिलोय का काढ़ा लाभदायक होता है। गिलोय में पाए जाने वाले एंटी सेप्टिक गुण बुखार दूर करने में सहायता करते हैं।
मोटापा दूर करने के लिए गिलोय : मोटापा दूर करने के लिए गिलोय और त्रिफला के चूर्ण को शहद के साथ लेने से मोटापा दूर होता है।
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पतंजली गिलोय के अन्य लाभ : Other Benefits of Giloy Hindi
- मस्तिष्क से सबंधित बिमारियों और स्मरण शक्ति के विकास के लिए गिलोय लाभदायक हो सकती है।
- पेट से सबंधित बिमारियों के उपचार के लिए गिलोय सहायक हो सकती है।
- गिलोय के सेवन से गुप्त रोगों के उपचार में सहायता मिलती है, इसके लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेवें।
- रक्त से सबंधित व्याधियों के लिए गिलोय का सेवन लाभदायक हैं।
- त्रिफला के साथ गिलोय का नित्य सेवन करने से पुराना कब्ज दूर होता है।
- मूत्र सबंधी विकारों में गिलोय लाभदायक होती है।
- गिलोय के सेवन से शरीर में रक्त बढ़ता है।
- शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाता है।
- खाँसी, मलेरिया, शीत ज्वर (विषाणुक संक्रमण) में इसका उपयोग लाभदायक होता है।
- गिलोय के सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रण में रखा जा सकता है।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
- कुष्ठ रोगों में इसका सेवन लाभकारी होता है।
- गिलोय का सेवन लिवर की देखभाल के लिए लाभदायक होता है।
- गिलोय शरीर के विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में लाभदायी होता है।
- पीलिया में इसका उपयोग किया जाता है।
- गठिया और अन्य जोड़ों के दर्द में इसका सेवन लाभदायक होता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम में उपयोगी। शुगर के मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए या फिर डॉक्टर की राय लेनी चाहिए।
- राजयक्ष्मा रोग (Tuberculosis) में लाभ मिलता है।
- शरीर की इम्युनिटी को बढाती है |
- शरीर की सुजन कम करने में लाभकारी होती है
पतंजली गिलोय क्वाथ को कैसे लें : Patanjali Giloy Kwath Usages and Doses Hindi
पतंजली गिलोय क्वाथ से सबंधित सावधानियां
गिलोय का प्रयोग : गिलोय को आप ताजा रूप में इसके पत्ते खा सकते हैं। तने का सेवन कर सकते हैं। इसके पत्ते और तने का रस निकाल कर भी लिया जाता है। इसके रस से ही गिलोय स्वरस, क्वाथ और वटी बनायीं जाती है। गिलोय क्वाथ को निश्चित मात्रा से अधिक का सेवन नहीं करना चाहिए।
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