पतंजली गोधन अर्क गो मूत्र लाभ उपयोग
पतंजलि गोधन अर्क क्या है
गोमूत्र और गोमूत्र अर्क में क्या अंतर होता है
पतंजलि गोधन अर्क को लगातार कितने समय तक लेवे : सामान्य अवस्था में इसका उपयोग तीन सप्ताह से अधिक नहीं किया जाना चाहिए। इस सबंध में आप वैद्य की सलाह लेकर जटिल रोगों हेतु इसका सेवन अधिक समय तक कर सकते हैं।
- शरीर में सल्फर की कमी को दूर करके त्वचा विकारों को दूर करता है।
- घुटने, कमर दर्द आदि में भी इसका लाभ मिलता है क्योंकि ये वात को नियंत्रित करता है।
- टीबी रोग में भी गोमूत्र का लाभ प्राप्त होता है।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है जिससे सामान्य बीमारिया भी व्यकित को प्रभावित नहीं कर सकती हैं।
- त्वचा रोगों यथा खाज, खुजली और फोड़ो को दूर करता है। त्वचा के विकार यथा फोड़े फुंसी, खुजली आदि होने पर गोमूत्र में आमा हल्दी (कच्ची हल्दी ) मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है। आप चाहे तो स्नान से पहले अपने शरीर पर कुछ देर तक गोमूत्र लगायें और उसके बाद स्नान करे तो अधिक लाभ मिलता है।
- यदि मुख में कोई विकार है तो दिन में दो से तीन बार गो मूत्र से कुल्ला करने पर मुंह के कीटाणु और संक्रमण दूर होता है।
- उच्च और निम्न ब्लड प्रेशर में भी उपयोगी
- कान में दर्द होने पर एक बूंद गो मूत्र कान में डालने से लाभ मिलता है।
- पीलिया रोग में भी उत्तम।
- पेट फूलना विकार होने पर गो मूत्र में अजवाइन का चूर्ण मिला कर लेने से लाभ मिलता है।
- गोमूत्र बुद्धि को बढ़ाने वाला होता है।
- कफ्फ और पित्त में यह पूर्ण रूप से और पित्त के लिए अन्य सहायक दवाओं के माध्यम से कारगर होता है।
- सन्धिवातद्ध जोड़ों के दर्द में भी यह लाभदायी होता है, महारास्नादि क्वाथ के साथ इसे मिलाकर पीने से विशेष लाभ मिलता है, क्योंकि यह वात को भी नियंत्रित करता है।
- पायरिया रोग में भी गोमूत्र के सेवन से लाभ मिलता है। गोमूत्र से प्रतिदिन कुल्ला करने पर पायरिया रोग पूर्णतया समाप्त हो जाता है।
- गर्म तासीर होने के बावजूद भी पित्त को नियंत्रित करने का गुण इसके होता है।
- शरीर में आवश्यक घटकों को पुनः स्थापित करने में सहायक।
- वर्तमान में कैंसर से सबंधित रोग में भी इसका अनुसंधान चल रहा है जिसके परिणाम सकारात्मक आये हैं। गोमूत्र में कर्क्युमीन पाया जाता है जो कैंसर सेल्स को बनने से रोकता है। इस विषय पर एक पेटेंट अमेरिका से प्राप्त किया जा चुका है, जिसमे इसे एंटी कैंसर के गुण होने की पुष्ठी की गयी है। शोध के मुताबिक भी गौमूत्र से मुंह, फेफडों, किडनी, त्वचा, सर्विक्स और ब्रेस्ट कैंसर से बचाव में सहायता मिलती है। (अधिक जाने )
- डायबिटीज में भी गोमूत्र सेवन से लाभ मिलता है।
- गोमूत्र के सेवन से आँखों की रौशनी बढती है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के साथ ही मांसपेशियों के विकारों में भी लाभदायी होता है।
- यह हमारे शरीर से कृमी को समाप्त करता है और एक तरहा से कीटनाशंक की भांति कार्य करता है।
- शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है और अनीमिया रोग में लाभदायी होता है।
- गोमूत्र के सेवन से स्नायु तंत्र के विकार दूर होते हैं।
- गोमूत्र /गोमूत्र अर्क में एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
- गोमूत्र के सेवन से लीवर से सबंधित विकार भी दूर करने में मदद मिलती है।
- शरीर से अतिरिक्त चर्बी को दूर हटाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
- यह पाचन अग्नि को बढाता है और खराब पाचन के परिणाम स्वरुप उत्पन्न विकार यथा गैस, अपच, खट्टी डकार और कब्ज जैसे विकारों में भी लाभदायी होता है। आतों को गति प्रदान करता है।
- गोमूत्र रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- हृदय की सुजन को दूर करता है।
पतंजलि गोधन अर्क का नुक्सान / हानि : वैद्य की बतायी गयी मात्रा में गोमूत्र लेने से कोई भी दुष्परिणाम नहीं होता है। यदि आप इसे अनियंत्रित रूप से / मनमाने ढंग से /अधिक मात्रा में लेते हैं तो आपको नकसीर छूटना, फफोले होना, शरीर में गर्मी का बढना आदि विकार हो सकते हैं, इसलिए इसे वैद्य की सलाह के उपरान्त ही सेवन करे क्योंकी इसकी तासीर गर्म होती है। गर्मियों में इसकी मात्रा कुछ कम ही करने चाहिए।
पतंजलि गोधन अर्क के विषय पर पतंजली वेबसाइट से प्राप्त जानकारी :
Divya Godhan Ark is an ancient Ayurvedic medicine made by extracting the goodness from gomutra or cow urine. It has multiple benefits and cures a variety of serious ailments. It gives you relief from problems of liver and stomach. It cures eczema, controls diabetes and cancer. Divya Godhan Ark has detoxifying properties which cleanses your system of toxins accumulated from the environment or unhealthy lifestyle. Get holistic cure and experience Ayurvedic healing at its best with Divya Godhan Ark.
तस्मै तुष्टाः प्रयच्छन्ति वरानपि सुदुर्लभान्।।
- गोमूत्र उरिया होता है जो जीवाणु /कृमी रोधी होता है।
- गोमूत्र में उरिक एसिड भी पाया जाता है जो की हमारे शरीर से कैंसर सेल्स को नियंत्रित करने में भूमिका रखता है।
- स्वमाक्षर (Swama Kshar) : यह जीवाणु रोधी / विषहर और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने वाला होता है।
- विटामिन ए बी सी डी और ई (Vitamin A, B, C, D & E): गोमूत्र में ये तमाम विटामिन्स होते हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखते हैं और रोग प्रतिरोधंक क्षमता को बढाते हैं।
- कैल्सियम (Calcium) : कैल्शियम हमारे शरीर में अन्य विटामिन्स के हमारे शरीर में विलय /अव्शोष्ण के लिए आवश्यक होता है और यह हड्डियों को मजबूत बनाने के दीगर मांशपेशियों की कार्य प्रणाली को सुधारता है। यह हमें गोमूत्र से प्राप्त हो जाता है।
- गाय के मूत्र से हमें मैंगनीज (Manganese), पोटाशियम (Potassium), सोडियम (Sodium), फोस्फेट (Phosphate), लोहा (Iron), तांबा (Copper), सल्फर (Sulphur), अमोनिया (Ammonia), नाइट्रोजन (Nitrogen) आदि प्राप्त होते हैं जो शरीर के विभिन्न गतिविधियों में अहम् भूमिका रखते हैं।
- ऐसी गाय का मूत्र उत्तम माना जाता है जो रोज खेत में चरने जाती हो, एक जगहा पर बंधी हुयी गाय /शहर की गाय का मूत्र उपयोगी नहीं होता है (कम उपयोगी होता है ). इसलिए जब भी आप गोमूत्र का चयन करें तो इस बात का वेशेष ध्यान रखें।
- सात परत के सूती कपडे में छान कर लेना चाहिए।
- सुबह जब गाय पहल मूत्र त्यागती है, वह ओषधिय रूप से अत्यंत ही लाभदायी होता है। कोशिश की जानी चाहिए की आप उसी गो मूत्र का उपयोग करें।
- देसी गाय की कुवारी गाय (बाछी, केरडी, जिसको गर्भधान नहीं हुआ हो ) का मूत्र अमृत के समान माना गया है। देसी गाय की पहचान कर लें (गाय के थुआ हो, गर्मी में जिसको कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता हो -सांस नहीं हांफती हो, और जिसके गले में लटकन हो )
- गाय का मूत्र सीधे ही पात्र में एकत्रित किया जाना चाहिए। जमीन पर गिरे हुए मूत्र को कार्य में नहीं लिया जाना चाहिए।
- गाय देसी नस्ल की और स्वस्थ होनी चाहिए।
- गर्भधान के बाद की यदि कोई गाय हो तो कम से कम तीन महीने उपरान्त ही उसके मूत्र का उपयोग किया जाना चाहिए।
- गर्भवती गाय और अस्वस्थ गाय के मूत्र का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
- खाली पेट लिया जाने वाला गोमूत्र अत्यंत लाभदायी होता है।
- सर्वोत्तम यह होता है की आप रोज ताजा गोमूत्र लेवे। यदि ताजा उपलब्ध नहीं तो गोमूत्र अर्क का भी उपयोग करना चाहिए।
गोमूत्र के घड़े को आप आंच पर चढ़ाएं। जब भाप बनने लगेगी तो यह पाइप में से होकर गुजरेगी। आपने पहले से ही पाइप को ठंडा करने के लिए शीतलक (पाइप को किसी ठन्डे पानी से भरे घड़े से गुजारना ) से गुजारा होता है। परिणाम स्वरुप गोमूत्र की भाप बूंदों का आकार लेकर एक पात्र में इकठ्ठा होने लगेगी। अब तैयार अर्क को आप हवाबंद डिब्बे में स्टोर करके रख सकते हैं। अर्क बनाने के लिए आप विशेष रूप से पाइप का ध्यान रखें यदि कॉपर का पाइप नहीं मिले तो स्टील का लगाएं लेकिन प्लास्टिक /रबर का पाइप कभी भी नहीं लगाएं। समझने वाली बात यही है की आपको गर्म भाप को ठंडा करके बूंदों में परिवर्तित करना है।
