सर्दियों में हरी मेथी खाने के फायदे
सर्दियों में हरी मेथी खाने के क्या फायदे
आइये मेथी के फायदे/उपयोग जान लेते हैं -
सर्दी में वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन मेथी के एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करते हैं। इससे खांसी, जुकाम, बुखार जैसी समस्याओं से आसानी से लड़ा जा सकता है। एक अध्ययन (PubMed) बताता है कि मेथी का अर्क इम्यून सिस्टम को सक्रिय रखता है।
जोड़ों के दर्द से राहत
ठंड में जोड़ों की अकड़न और दर्द आम है। मेथी के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन घटाते हैं, जिससे बुजुर्गों को खास फायदा मिलता है। Healthline के अनुसार, इसके बीज जोड़ों की जकड़न कम करने में प्रभावी हैं। रातभर भिगोकर सुबह चबाएं या चाय बनाएं।
ब्लड शुगर कंट्रोल
मेथी के घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं। सर्दियों में भारी-मीठे भोजन बढ़ने पर डायबिटीज वाले मरीजों के लिए यह वरदान है। Diabetes Journal के रिसर्च से साबित है कि रोज 5-10 ग्राम मेथी दाने शुगर लेवल सुधारते हैं।
शरीर को अंदर से गर्माहट
मेथी की गर्म तासीर ठंड लगने, ठंडे हाथ-पैर या हड्डियों के दर्द वालों के लिए आदर्श है। यह चयापचय बढ़ाती है और ऊर्जा देती है। आयुर्वेद में इसे 'मेथिका' कहकर सर्दी-ज्वर नाशक बताया गया है।
डाइट में कैसे शामिल करें?
सब्जी: आलू-पनीर या मेथी मटर बनाएं, रोटी के साथ खाएं।
पराठा/थेपला: पत्ते बारीक काटकर आटे में गूंथें, गुड़-अदरक डालें।
परांठा: भुनी हुई मेथी पत्तियों को दही या चटनी के साथ।
सूप/चटनी: उबालकर पीसें, सर्दी में गर्मागर्म पिएं।
सलाद: कच्चे पत्ते नींबू-अदरक के साथ।
सावधानी: ज्यादा न खाएं (रोज 50-100 ग्राम), गर्भवती महिलाएं डॉक्टर से पूछें। ताजी मेथी बाजार से लें।
आयुर्वेद में मेथी के फायदे क्या हैं ?
मेथी कर्मानुसार कफनिस्सारक, ब्रोन्क्षोभक, रसायन व स्तन्यजनक है। मधुमेह में रक्तप्रसादन, कोलेस्ट्रॉल (मेदोरोग) में लेक्खन, आंतमज्जा दृढ़ीकरण हेतु भुनी चूर्ण क्षीरपाके, कब्ज-बवासीर में भक्तघृतसहित हर्बल क्वाथ, स्तन्यवृद्धि हेतु रात्रिभक्त दधिमिश्रित, केशपात निवारण हेतु निशाचर पीठन लेप।
आयुर्वेद के अनुसार मेथी के प्रमुख फायदे
- त्रिदोषहर: वातहर (न्यूराल्जिया, पक्षाघात, कब्ज), कफहर (उत्पादक कफ, श्वास-क्षय, ब्रोंकाइटिस), रक्तपित्त में वृद्धि न करे।
- दीपनी: पाचनाग्नि बढ़ाए, अरुचि (भूख न लगना), उदरशूल, अपच में लाभकारी।
- प्रमेहनाशक: मूत्ररोग, टाइप-2 मधुमेह में रक्तशर्करा नियंत्रित करे (5 ग्राम बीज/चूर्ण दिन में 1-2 बार)।
- मेदोनाशक: कोलेस्ट्रॉल घटाए, मोटापा कम करे (10 ग्राम चूर्ण गर्म पानी/छाछ के साथ)।
- स्तन्यजनक: स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध बढ़ाए (5-10 ग्राम बीज रात्रि भिगोकर दूध पकाएं)।
- केशवर्धक: बाल झड़ना रोके, विकास बढ़ाए (पीठन लेप या तेल)।
- अग्निमांद्यहर: गैस्ट्राइटिस, ब्लोटिंग, कब्ज में (1 चम्मच बीज छाछ में हींगसहित रात्रि)।
- व्रणशोधक: घाव, फोड़े, सूजन में लेपन से शोथ-वेदना कम।
- आंतदृढ़िकारक: भुने बीज दूध में पकाकर चाय—पाचन क्षमता बढ़ाए।
- अन्य: गठिया, अस्थमा, त्वचा रोग, पुरुष नपुंसकता, हार्मोन विकार में उपयोगी।
