सेहत के लिए जरुरी है पर्याप्त नींद

सेहत के लिए जरुरी है पर्याप्त नींद Deep Sleep Benefits

फिटनेस पाने के लिए डाइट कंट्रोल और व्यायाम के साथ तीसरा गोल्डन नियम है 6-8 घंटे की गहरी नींद। यह न सिर्फ शरीर के सभी तंत्रों को दुरुस्त रखती है बल्कि वजन घटाने, तनाव कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 2026 में आप भी हेल्दी स्लीपिंग के फायदों के विषय में जानिये। 
 
सेहत के लिए जरुरी है पर्याप्त नींद
 

अच्छी नींद क्यों है फिटनेस के लिए जरुरी?

नींद हमारे मस्तिष्क को तरोताजा करती है। रात में गहरी नींद के दौरान ब्रेन टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, ठीक वैसे ही जैसे किडनी खून साफ करती है। नींद पूरी न होने पर दिमाग में कचरा जमा होने लगता है, जिससे एकाग्रता में कमी आने लगती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और पूरे दिन थकान बनी रहती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से सिद्ध है कि लगातार खराब नींद अल्जाइमर, डिमेंशिया और डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है। जो लोग नियमित 7-8 घंटे गहरी नींद लेते हैं, वे शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, निर्णय लेने की क्षमता बेहतर रखते हैं और रोगों से जल्दी छुटकारा पाते हैं। 
 
भूख पर नियंत्रण

भूख पर नियंत्रण

शरीर में भूख और तृप्ति को नियंत्रित करने वाले दो मुख्य हार्मोन हैं – घ्रेलिन और लेप्टिन। नींद इनके संतुलन को बनाए रखती है। घ्रेलिन को 'भूख का हार्मोन' कहा जाता है जो पेट से निकलता है। जब हम रात में जागते हैं या नींद 5 घंटे से कम रहती है, तो घ्रेलिन का स्तर 15-20% तक बढ़ जाता है। इससे देर रात चिप्स, चॉकलेट या पिज्जा खाने की तीव्र इच्छा होती है। अध्ययनों में पाया गया कि नींद की कमी से प्रभावित लोग 300-500 अतिरिक्त कैलोरी ग्रहण कर लेते हैं, जो सीधे बेली फैट के रूप में जमा हो जाती है। अच्छी नींद घ्रेलिन को नियंत्रित रखकर अनावश्यक खाने की इच्छा कम होती है। 
 
लेप्टिन वसा कोशिकाओं से निकलने वाला हार्मोन है जो दिमाग को बताता है – 'पेट भर गया, अब बंद करो'। नींद की कमी से लेप्टिन 15-18% कम हो जाता है, जिसका मतलब दिमाग को भूख का संकेत लगातार मिलता रहता है। नतीजा? एक प्लेट खाने के बाद भी दूसरी प्लेट की चाहत होती है। शोध बताते हैं कि 4 घंटे नींद लेने वाले लोग सामान्य नींद वाले比 25% ज्यादा खाना खाते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है। 
 

मेटाबॉलिज़म पर भी होता है नींद की कमी का बुरा असर

मेटाबॉलिज़म यानी शरीर की कैलोरी जलाने की गति नींद से सीधे जुड़ी है। रोज़ 6 घंटे से कम नींद लेने पर बेसल मेटाबॉलिक रेट 5-20% धीमा हो जाता है। इसका मतलब 2000 कैलोरी बर्न करने वाले व्यक्ति के लिए 100-400 कैलोरी बर्बाद। खासकर पेट की चर्बी बढ़ने का खतरा 55% ज्यादा हो जाता है। अच्छी नींद थायरॉइड हार्मोन T3-T4 को संतुलित रखती है, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है और फैट बर्निंग को तेज़ करती है। 
 

सूर्य की रोशनी – हमारी आंतरिक घड़ी 

हमारी आँखें सूर्य की रोशनी को तुरंत पहचान लेती हैं और शरीर को दिन-रात का संकेत देती हैं। यह प्रक्रिया हमारे जीवनीय चक्र को संचालित करती है, जिसे सर्केडियन रिदम या शरीर की प्राकृतिक घड़ी कहा जाता है। सर्केडियन रिदम 24 घंटे का जैविक चक्र है जो सोने-जागने, भूख लगने और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करता है। यह हाइपोथैलेमस के सुप्राकायस्मैटिक न्यूक्लियस (SCN) से संचालित होता है। सुबह की नीली रोशनी आँखों के रेटिना में विशेष गैंग्लियन कोशिकाओं (ipRGCs) को उत्तेजित करती है। ये कोशिकाएँ मस्तिष्क को संदेश भेजती हैं – "दिन हो गया, जाग जाओ!" कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है जो सतर्कता प्रदान करता है। 
 

नींद की गुणवत्ता जांचने के आधुनिक तरीके

पॉलिसोम्नोग्राफी – स्लीप स्टडी
यह अस्पताल में रात भर की जांच है जहाँ 20+ सेंसर ब्रेन वेव्स, हार्ट रेट, सांस पैटर्न, ऑक्सीजन लेवल, खर्राटे और पैर हिलाने जैसी हर गतिविधि रिकॉर्ड करते हैं। OSA (स्लीप एप्निया) जैसी छिपी समस्याओं का पता चलता है। अब घर पर भी होम स्लीप टेस्ट उपलब्ध हैं।

स्लीप ट्रैकिंग डिवाइस – रोज़ाना मॉनिटरिंग
स्मार्ट रिंग्स (Oura Ring/Fitbit): REM, डीप और लाइट स्लीप चक्र, HRV, ब्लड ऑक्सीजन मापते हैं। सटीकता 95%। कीमत ₹2500-15000।

स्मार्ट तकिए/मैट्रेस: सांस रुकने, खर्राटे और नींद की मुद्रा सुधारते हैं। OSA में 30% राहत। कीमत ₹1500-5000।
स्मार्टवॉच: Apple Watch/ Garmin नींद स्कोर देते हैं। 
 

गहरी और स्वस्थ नींद के 10 सरल उपाय

जैसा की आपने जाना की हमारे सम्पूर्ण शरीर के लिए गहरी नींद जरुरी है, आइये कुछ ऐसे उपाय जिनसे आप गहरी नींद ले सकते हैं। 

नियमित सोने-जागने का समय निर्धारित करें

हर दिन एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं और उठें, चाहे छुट्टी हो या अवकाश। इससे शरीर की प्राकृतिक घड़ी सेट रहती है और रात में बिना प्रयास के नींद आ जाती है। सप्ताहांत में भी 1 घंटे से ज्यादा देरी न करें, क्योंकि इससे सर्केडियन रिदम बिगड़ जाता है और पूरे सप्ताह नींद प्रभावित रहती है।

सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं

रात 8 बजे के बाद मोबाइल, लैपटॉप या टीवी बंद कर दें। इनसे निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को 3 घंटे रोक लेती है। इसके बजाय कागजी किताब पढ़ें या हल्का संगीत सुनें। नींद के लिए ब्लू लाइट फिल्टर चश्मा भी उपयोगी है।

दिन में हल्का व्यायाम जरूर करें

दिन में हल्का व्यायाम जरूर करें

सुबह या दोपहर में 30-45 मिनट ब्रिस्क वॉक, योग या स्ट्रेचिंग करें। व्यायाम तनाव हार्मोन कोर्टिसोल कम करता है और शाम को गहरी नींद सुनिश्चित करता है। ले

कैफीन और उत्तेजकों से परहेज करें

दोपहर 2 बजे के बाद चाय, कॉफी, चॉकलेट या कोल्ड ड्रिंक न पिएं। कैफीन 8-10 घंटे तक असर करती रहती है। शाम को हर्बल चाय जैसे अश्वगंधा या कमोमाइल चुनें। धूम्रपान भी नींद को बाधित करता है।

हल्का रात्रि भोजन लें

सोने से 3 घंटे पहले डिनर समाप्त करें। मसालेदार, तला या भारी भोजन पाचन बिगाड़ता है। दूध में हल्दी, बादाम या केसर मिलाकर पिएं। भूख लगे तो केला या मुट्ठीभर बादाम खाएं – इसमें ट्रिप्टोफैन होता है और बेहतर नींद लाते हैं।

दिन में झपकी लें

20-30 मिनट की पावर नैप/झपकी दोपहर 2 बजे तक ठीक है, लेकिन इससे ज्यादा या देर शाम न लें। लंबी झपकी रात्रि के नींद खराब करती है। अलार्म जरूर लगाएं ताकि गहरी नींद में न जाएं।

प्राकृतिक उपचार अपनाएं

तलवों पर तिल/नारियल तेल से 5 मिनट मालिश करें। कमरे में लैवेंडर या चंदन की खुशबू फैलाएं। गुनगुने पानी में पैर 10 मिनट भिगोएं। गाय दूध में जायफल घिसकर पिएं। ये सभी आयुर्वेदिक उपाय तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं। 
 

अनिद्रा के लक्षण

  • नींद आने में ज़्यादा समय लगना यथा 30 मिनट से ज़्यादा समय तक नींद का ना आना।
  • रात में बार-बार नींद का टूट जाना।
  • सुबह बहुत जल्दी जाग जाना
  • नींद के बाद भी थकान महसूस होना
  • दिनभर नींद आना लेकिन रात में सो न पाना
  • चिड़चिड़ापन, बेचैनी या मूड का स्विंग्स होना।
अनिंद्रा/नींद न आने के कारण
नींद न आने की समस्या का कोई एक कारण नहीं होता है अपितु यह शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली संबंधी कई कारणों का परिणाम होती है। जब ये कारण लगातार बने रहते हैं तो सामान्य बेचैनी गंभीर अनिद्रा का रूप धारण कर लेती है।

मानसिक तनाव का रहना
कार्यस्थल का दबाव, पारिवारिक कलह, आर्थिक चिंताएं आदि आपको पूरी रात बेचैन रखते हैं। कोर्टिसोल तनाव हार्मोन बढ़ने से मेलाटोनिन दब जाता है। रात में बार-बार आने वाले विचारों का एक चक्र नींद को गड़बड़ा देता है । लंबे समय तक यह अवसाद में बदल सकता है।

मोबाइल, लैपटॉप, टीवी का अधिक उपयोग

मोबाइल, लैपटॉप, टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी रेटिना के विशेष कोशिकाओं को उत्तेजित कर मस्तिष्क को "दिन का समय" संकेत देती है। सोने से 2 घंटे पहले भी 30 मिनट स्क्रीन टाइम मेलाटोनिन उत्पादन को 23% तक रोक देता है। सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग नींद को बाधित करने वाला मूल कारण है।

अनियमित दिनचर्या का बुरा प्रभाव
हर दिन अलग समय सोना-उठना, रात 12 बजे के बाद भोजन, दिन में लंबी झपकी – ये सभी सर्केडियन चक्र को बिगाड़ देते हैं। शरीर भ्रमित हो जाता है कि कब जागना है, कब सोना। शिफ्ट वर्कर्स और छात्रों में यह समस्या सबसे आम है। 

कैफीन का असर
चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक में कैफीन 6-8 घंटे तक मस्तिष्क को नींद से दूर रखती है। दोपहर 3 बजे के बाद एक कप कॉफी रात 11 बजे तक नींद रोक सकती है। 

शारीरिक रोग व औषधियों का प्रभाव

पाचन संबंधी: एसिड रिफ्लक्स, कब्ज रात में बेचैनी पैदा करते हैं।
हार्मोनल: थायरॉइड, मेनोपॉज, पीसीओडी नींद चक्र बिगाड़ते हैं।
दर्द: जोड़ों का दर्द, सायटिका रात में बढ़ जाता है।
दवाएँ: ब्लड प्रेशर, एंटीडिप्रेसेंट, स्टेरॉयड के साइड इफेक्ट्स नींद भंग करते हैं।
 
आयुर्वेद में अनिद्रा का इलाज प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से वात-पित्त शांति और चित्त प्रसादन द्वारा किया जाता है। ये घरेलू योग बिना साइड इफेक्ट के 7-15 दिनों में असर दिखाते हैं। 

ब्राह्मी चूर्ण
ब्राह्मी मस्तिष्क के तनाव को कम कर एकाग्रता बढ़ाती है। चिंता, भय और अतिचिंतन से मुक्ति दिलाती है। ब्राह्मी तंत्रिका तंत्र को पोषण देकर अतिचिंतन और बेचैनी दूर करती है। यह GABA न्यूरोट्रांसमीटर बढ़ाती है जो गहरी नींद का प्राकृतिक कारण बनता है।

अश्वगंधा चूर्ण
अश्वगंधा कोर्टिसोल हार्मोन संतुलित रखती है। नर्वस सिस्टम मजबूत कर थकान दूर करती है। अनिद्रा के साथ कमजोरी भी ठीक होती है। 
 
जटामांसी
जटामांसी आयुर्वेद की वह शक्तिशाली जड़ी-बूटी है जो नींद पर गहरा प्रभाव डालती है। यह वात-पित्त दोषों को शांत कर तंत्रिका तंत्र को पोषण देती है, जिससे मस्तिष्क में GABA न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय हो जाता है और तनाव हार्मोन कोर्टिसोल नियंत्रित रहता है।  
 
यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। बिना आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के चूर्ण/योग का सेवन न करें। 
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