जोड़ों के दर्द के लिए दालचीनी हल्दी का दूध
जोड़ों के दर्द के लिए दालचीनी हल्दी का दूध
हल्दी-दालचीनी दूध बनाने की विधि | How to Make Turmeric Cinnamon Milk?
सामग्री (1 कप के लिए):- 1 कप पूर्ण वसा वाला गाय का दूध (या बादाम दूध)
- ¼ छोटा चम्मच शुद्ध दालचीनी पाउडर
- ¼ छोटा चम्मच शुद्ध हल्दी पाउडर (या ½ इंच ताजी हल्दी का रस)
- स्वादानुसार ½ छोटा चम्मच शहद या गुड़ (रात में गुड़ आयुर्वेदिक रूप से श्रेष्ठ)
- 2-3 काली मिर्च (करक्यूमिन अवशोषण )
- दूध को मध्यम आंच पर गर्म करें, लेकिन उबाल न आने दें (लगभग 2-3 मिनट)।
- आंच बंद कर हल्दी पाउडर, दालचीनी पाउडर और कुटी हुई काली मिर्च डालें।
- अच्छी तरह फेंटें ताकि कोई गांठ न रहे, फिर शहद या गुड़ मिलाकर घोल लें।
- रात को सोने से 30-45 मिनट पहले गुनगुना पी लें – यह 'सुपर गोल्डन मिल्क' तैयार!
हल्दी और दालचीनी वाले दूध के फायदे
- हल्दी का करक्यूमिन और दालचीनी का सिनामाल्डिहाइड मिलकर जोड़ों की सूजन व गठिया दर्द को 50% तक कम करते हैं, चरक संहिता के कफ-वात शामक गुणों अनुसार।
- हल्दी और दालचीनी के दूधसे शरीर को कैल्शियम, मैग्नीशियम व फॉस्फोरस मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं और साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस व हड्डी की कमजोरी से बचाव दूर होता है.
- इस दूध के सेवन से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं जिससे फ्री रेडिकल्स समाप्त होकर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती हैं और त्वचा स्वस्थ रहती है.
- इसके सेवन से ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहती है.
- दीपन-पाचन गुण होने के कारण, अपच, गैस, कब्ज और IBS जैसी पाचन समस्याओं में तत्काल राहत मिलती है.
- इस दूध में एंटी-वायरल व एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो सर्दी-जुकाम, संक्रमण व दूर कर इम्यूनिटी को बढाते हैं.
- लीवर detoxify होता है, विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं तथा फैटी लीवर की स्थिति में सुधार आता है.
- तनाव व अनिद्रा दूर करने में लाभकारी है और अच्छी नींद आती है.
- इसके सेवन से हृदय का स्वास्थ्य सुधरता है और LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है.
- अल्जाइमर आदि विकारों में भी लाभ मिलता है।
दालचीनी का परिचय
दालचीनी (सिनामोमम जेलानिकम या Cinnamomum zeylanicum), आयुर्वेद में 'त्वक्षि' या 'दारुचिन' के नाम से जानी जाती है। यह लॉरेशिया परिवार का सदाबहार वृक्ष है, जिसकी छाल को सुखाकर मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेदिक निघंटु में इसे उष्णवीर्य, दीपन (अपच नाशक), कफ-वात नाशक और रसायन गुणों वाली औषधि माना गया है। यह एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुणों से भरपूर होती है, जो पाचन से लेकर हड्डी स्वास्थ्य तक लाभ पहुंचाती है।चरक संहिता (सूत्र स्थान, अध्याय 27, विरुद्धाशन अध्याय) में त्वक्षि का वर्णन:
"त्वक्स्थिवर्णकरं त्वक्षी रूक्षं कटु तिक्तमुष्णविर्यं।
दीपनं बृंहणं ग्राहि कफवातहरं परं।।"
अर्थ: त्वक्षि त्वचा, हड्डी और वर्ण को मजबूत करने वाली, रूक्ष, कटु-तिक्त रस वाली, उष्ण वीर्य वाली, दीपन (भूख बढ़ाने वाली), बृंहण (ताकत देने वाली), ग्राही (उत्सर्जन रोकने वाली) तथा कफ-वात नाशक है।
भावप्रकाश निघंटु (हरितकी वर्ग, श्लोक १०१-१०२):
"त्वक्षी त्वक्दोषहरा रुच्या दीपनी ग्राही।
कफवातनुत् रसायनी मुखपंके व्यजायनी।।"
अर्थ: त्वक्षि त्वचा दोष नाशक, रुचिकारक, दीपन, ग्राही, कफ-वात शामक, रसायन तथा मुखपाक नाशक है।
दालचीनी के आयुर्वेदिक फायदे
पाचन शक्ति बढ़ाए: दीपन गुण से भूख लगाए, अपच-अजीर्ण और गैस दूर करे।कफ-वात नाश: जोड़ों का दर्द, गठिया और श्वसन रोगों में राहत दे।
हड्डी मजबूत: कैल्शियम-अवशोषण बढ़ाकर ऑस्टियोपोरोसिस रोके।
रक्त शर्करा नियंत्रण: इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारकर मधुमेह में सहायक।
एंटीऑक्सीडेंट: फ्री रेडिकल्स से लड़कर बुढ़ापा रोके और इम्यूनिटी बढ़ाए।
नींद व तनाव कम: मन को शांत कर स्मृति वृद्धि करे।
त्वचा-मुख स्वास्थ्य: संक्रमण, दांत दर्द और चमड़ी चमकाए।
हल्दी का परिचय
हल्दी (Curcuma longa), अदरक परिवार (Zingiberaceae) का एक बहुआयामी औषधीय पौधा है। आयुर्वेद में इसे 'हरिद्रा' नाम से जाना जाता है, जिसकी ताजी जड़ों को सुखाकर पीला चूर्ण बनाया जाता है। करक्यूमिन इसके मुख्य सक्रिय तत्व के रूप में जाना जाता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रदान करता है। यह कफ-पित्त शामक, उष्ण वीर्य, कटु-तिक्त रस वाली औषधि है, जो रसोई से लेकर चिकित्सा तक सदियों से उपयोग में है।
चरक संहिता (चिकित्सा स्थान, अध्याय 3, श्लोक 8-9):
"हरिद्रा कुष्ठघ्नी कण्ठ्या कृमिघ्नी प्राजने विनुत्।
लेखनीयं कुष्ठं कण्डू कृमिघ्नं च तथा।।"
अर्थ: हरिद्रा कुष्ठ (त्वचा रोग), कण्ठ रोग, कृमि (कीड़े), प्राज्ञे (स्मृति हानि) में विनुत (उत्तम) है। यह लेखनीय (मेद-कफ नाशक), कुष्ठघ्न, कंडूघ्न (खुजली नाशक) और कृमिघ्न (कीटाणुनाशक) है।
भावप्रकाश निघंटु (हरिद्रा वर्ग, श्लोक 1-2):
"हरिद्रा तिक्तकटु रूक्षा उष्णा कफपित्तनुत्।
विस्राविणी रक्तप्रसादिनी लेप्रा मुखपंगा।।"
अर्थ: हरिद्रा तिक्त-कटु रस वाली, रूक्ष, उष्ण, कफ-पित्त शामक, विस्राविणी (स्राव उत्पन्न करने वाली), रक्त प्रसादक, लेप उपयोगी तथा मुखपाक नाशक है।
हल्दी के फायदे
- हल्दी के करक्यूमिन तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से जोड़ों के दर्द और गठिया-आर्थराइटिस की सूजन को प्रभावी रूप से कम करते हैं, जैसा चरक संहिता में कुष्ठघ्न के रूप में वर्णित है।
- हल्दी एंटीऑक्सीडेंट गुणों से सफेद रक्त कोशिकाओं को मजबूत बनाकर इम्यूनिटी बढ़ाती है और सर्दी-जुकाम तथा अन्य संक्रमणों से शरीर की रक्षा करती है।
- हल्दी दीपन-पाचन गुणों से अपच, गैस और IBS जैसी पाचन समस्याओं में तत्काल राहत प्रदान करती है, जैसा भावप्रकाश निघंटु में विस्राविणी के रूप में कहा गया है।
- हल्दी एंटी-बैक्टीरियल प्रभाव से मुंहासे, घावों को जल्दी भरती है और कंडूघ्न गुणों से त्वचा की खुजली व चमक को बढ़ाती है।
- हल्दी इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखती है
- हल्दी LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करके धमनियों को साफ रखती है और रक्त संचार सुधारकर हृदय स्वास्थ्य को मजबूत बनाती है।
- हल्दी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर लीवर को detoxify करती है तथा फैटी लीवर की स्थिति में Hepatology जर्नल के अनुसार 35% सुधार लाती है।
- हल्दी मेलाटोनिन उत्पादन बढ़ाकर गहरी नींद प्रदान करती है और रात के हल्दी दूध से तनाव व अनिद्रा को दूर रखती है।
- हल्दी कोशिका क्षति को रोककर कोलन कैंसर जैसे जोखिमों को घटाती है, जैसा Harvard के रिसर्च अध्ययनों में प्रमाणित है।
- हल्दी अल्जाइमर प्लाक को कम करके मस्तिष्क स्वास्थ्य की रक्षा करती है तथा Neurology अध्ययनों के अनुसार स्मृति व बुद्धि को बढ़ाती है।
यह लेख भी पढ़िए....
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य आयुर्वेदिक ज्ञान और लोकप्रिय स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। यह चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी नई स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था, दवा सेवन या पुरानी बीमारी के मामले में वैद्य या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। अधिक मात्रा में सेवन से परहेज करें और व्यक्तिगत असर भिन्न हो सकता है।


