विल्वादि गुलिका उपयोग फायदे घटक

विल्वादि गुलिका उपयोग फायदे घटक

 
Vilwadi Gulika Benefits

आयुर्वेद में कई उपयोगी ओषधियाँ हैं जिनका उपयोग आरोग्य के लिए होता है उन्ही में से एक है विल्वादि गुलिका। इस लेख में आप विल्वादि गुलिका के घटक, उपयोग, सेवन विधि आदि के विषय पर विस्तार से जानेंगे।  
 

विल्वादि गुलिका परिचय 

विल्वादि गुलिका एक आयुर्वेदिक ओषधि है जो की वटी/Vati रूप में है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता आदि आयुर्वेदिक ग्रंथों में इस वटी का वर्णन प्राप्त होता है। पारम्परिक रूप से इस ओषधि का उपयोग विषहर, यथा जहरीले कीड़े काटने, सांप, बिच्छू, विषैली मकड़ी आदि कीट के काटने पर किया जाता है। शारङ्गधरसंहिता में इसका उल्लेख प्राप्त होता है। गैस्ट्रोएंटेराइटिस, अपच और बुखार आदि विकारों में भी इस ओषधि का उपयोग होता है। कफ और वात विकार की रोकथाम के लिए भी पारम्परिक रूप से इसका उपयोग होता है। 

“विल्वैः सुरसया तुल्या हिङ्गुत्रिकटुकैः सह।
पीडितेऽनिलकृच्छ्रे च विशेषेण प्रयोजयेत्॥” 

विल्वादि गुलिका के औषधीय गुण

  • विषनाशक
  • अतिविष
  • सांप के जहर का रोधी
  • सूजनरोधी
  • अमापाचक – विषहरण
  • एंटी-हैजा
  • ज्वरनाशक
  • पाचन उत्तेजक
  • कब्ज रोधी

पारंपरिक रूप से विल्वादि गुलिका का उपयोग

पारम्परिक रूप से विल्वादि गुलिका को सर्दी, खांसी, बंद नाक, साइनस विकार को दूर करने के लिए, अपच, गैस, जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए, सूजन और सूजन जनित दर्द आदि विकारों को दूर करने के होता है। त्रिदोष, वात, पित्त और कफ को संतुलित करने के लिए भी यह ओषधि उपयोगी है। 
 
विल्वादि गुलिका का उपयोग दक्षिण भारत में अधिकता से पाचन की दुर्बलता को दूर करने के लिए किया जाता है चूँकि इसका मूल घटक बील, बिल्व होता है। इसका उपयोग पंचकर्म के दौरान भी किया जाता है। आँतों की सफाई के लिए त्रिफला क्वाथ के साथ इसका उपयोग होता है।  

विल्वादि गुलिका के फायदे

विषहरण/विषहर, विष के प्रभाव को दूर करने में सहायक 
सांप, बिच्छू, उंडूल, कीट, मकड़ी, ततैया आदि विषयुक्त कीट के काटने पर विष दूर करने के लिए विल्वादि गुलिका उपयोगी है।
 
पाचन विकारों को दूर करने के लिए
अपच, अजीर्ण, अतिसार विकारों को दूर करने के लिए विल्वादि गुलिका का उपयोग गुणकारी है। आँतों की सफाई के लिए इसका उपयोग त्रिफला क्वाथ के साथ उपयोगी होता है। शरीर को डिटॉक्स करने और रेचक गुणों के लिए भी उपयोगी है।  
 
जोड़ों के दर्द में लाभ 
इस ओषधि में वात को नियंत्रित करने के गुण होते हैं जिसके कारण से गठिया, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए भी यह ओषधि उपयोगी है।  
 
अवसाद और अनिंद्रा विकार के लिए 
इस ओषधि का उपयोग अवसाद और अनिंद्रा विकार दूर करने के लिए भी श्रेष्ठ है।  
 
संदर्भ: अष्टांग हृदय, उत्तर स्थान, अध्याय 36, सर्प विष प्रतिषेध अध्याय, श्लोक: 84 - 85
 
बिल्वस्य मूलं सुरसस्य पुष्पं फलं करञ्जस्य नतं सुराह्वम्।
फलत्रिकं व्योषनिशाद्वयं च बस्तस्य मूत्रेण सुसूक्ष्मपिष्टम् ॥ ८४ ॥
भुजङ्गलूतोन्दुरवृश्चिकाद्यैर्विषूचिकाजीर्णगरज्वरैश्च।
आर्तान्नरान् भूतविधर्षितांश्च स्वस्थीकरोत्यञ्जनपाननस्यैः ॥ ८५ ॥
 
श्वसन विकारों के उपचार हेतु
विल्वादि गुलिका का उपयोग श्वसन विकारों में भी गुणकारी है। गले के कफ, छाती और नाक की जकड़न, बलगम को ढीला करने, एलर्जी आदि विकारों में इस ओषधि का उपयोग लाभकारी है।  

विल्वादि गुलिका के लाभ समग्र रूप में

  • हैजा, अपच, कीड़े का काटना और विषाक्तता प्रभावों को दूर करने में श्रेष्ठ 
  • पारंपरिक रूप से पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और त्वचा की समस्याओं को ठीक करने के लिए उपयोगी। 
  • विषैले कीड़े के काटने और फूड पॉइज़निंग के प्रभावों को दूर करने में उपयोगी। 
  • बुखार, सांस की बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए भी एक प्रभावी
  • सुजन को दूर करने के लिए। 
  • जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए। 
  • श्वसन विकारों में उपयोगी। 
  • पुरानी खांसी और ब्रोंकाइटिस में उपयोगी।

विल्वादि गुलिका घटक

  • बिल्वा (Bilva) – बेल की जड़ Bilva – Bael (root) – Aegle marmelos
  • सुरसा (Surasa) – तुलसीSurasa – Holy Basil – Ocimum sanctum
  • करंजा (Karanja) – भारतीय बीच की छाल या बीज Karanja – Indian Beech (bark / seed) – Pongamia pinnata
  • नता (Nata) – भारतीय वैलेरियन की जड़ Nata – Indian valerian (root) – Valeriana wallichi
  • सुरह्वा (Surahva) – हिमालयन सीडर की छाल Surahva – Himalayan cedar (bark) – Cedrus deodara
  • Triphala
  • त्रिफला (Triphala) – हरीतकी, विभीतकी, और आमलकी Haritaki – Chebulic Myrobalan fruit rind – Terminalia chebula Vibhitaki – Belliric Myrobalan fruit rind – Terminalia bellirica, Amalaki – Indian gooseberry fruit – Emblica officinalis Gaertn.
  • त्रिकटु (Trikatu) – शुंठी, मरिच, और पिप्पली Trikatu –Shunti – Ginger Rhizome – Zingiber officinalis Maricha – Black pepper – Piper nigrum, Pippali – Long pepper fruit – Piper longum
  • निशा (Nisha) – हल्दी की जड़Nisha – Turmeric (Rhizome) – Curcuma longa
  • दारु हरिद्रा (Daru Haridra) – वृक्ष हल्दी का तना Daru Haridra – Tree Turmeric (stem) – Berberis aristata
  • बस्ता मूत्र (Basta Mutra) – बकरी का मूत्र Basta Mutra – goat urine – Quantity Sufficient.
 
विल्वादी गुटिका एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है जो अष्टांग हृदय के आधार पर सर्पविष, विषूचिका आदि में लाभकारी है। इसकी निर्माण विधि सरल और शास्त्रोक्त है, जिसमें सभी सामग्री को शुद्ध रूप से ग्रहण कर बकरी मूत्र में पीसकर गोलियां बनाई जाती हैं।

सामग्री (प्रति 10 ग्राम)
  • बिल्व मूल (Aegle marmelos root) – बेल की जड़।
  • सुरसा पुष्प (Ocimum sanctum flowers) – तुलसी के फूल।
  • करंज फल (Pongamia pinnata fruit) – करंज के फल।
  • नत (Valeriana wallichii root) – नत की जड़।
  • सुराह्व (Cedrus deodara bark) – देवदार की छाल।
  • त्रिफला फल (हरितकी, विभीतकी, आमला)।
  • त्रिकटु (शुंठी, मरिच, पिप्पली)।
  • निशा द्वय (हरिद्रा rhizome, दारुहरिद्रा stem) – हल्दी और दारुहरिद्रा।
  • बस्ता मूत्र (Goat urine) – पर्याप्त मात्रा।

विल्वादि गुलिका बनाने की विधि

सभी सामग्री को अलग-अलग शुद्ध और सुशुष्क कर लें। इन्हें सुसूक्ष्म चूर्ण बनाएं। चूर्ण को बकरी मूत्र में अच्छी तरह पीसकर गाढ़ा लेप तैयार करें। लेप से छोटी गोलियां गढ़ें और छायामय स्थान में पूर्णतः सुखा लें। सूखने पर एयरटाइट डिब्बे में रखें।

उपयोग सावधानियां
गोलियां बनाने से पूर्व चिकित्सक परामर्श लें। बकरी मूत्र शुद्ध ताजा हो। निर्माण स्वच्छ वातावरण में करें ताकि औषधि की शक्ति बनी रहे।
 
प्रमुख निर्माता
  • Kottakkal Arya Vaidya Sala
  • AVP Ayurveda / AVN Arogya
  • Vaidyaratnam Oushadhasala
  • Sitaram Ayurveda 
  • Nagarjuna Ayurveda
  • Pankajakasthuri
  • Arya Vaidya Pharma
  • Sree Dhathri 
  • वैद्यरत्नम आयुर्वेद  विल्वादि गुलिका 
आयुर्वेदिक औषधियों जैसे विल्वादी गुटिका खरीदते समय ब्रांड की गुणवत्ता GMP (Good Manufacturing Practices), AYUSH लाइसेंस और ISO प्रमाणन जांचें। ये प्रमाण पत्र शुद्धता, शक्ति और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
 

विल्वादि गुलिका के दुष्प्रभाव

विल्वादि गुलिका सामान्यतः सुरक्षित है, परंतु पित्त प्रकृति वालों या पित्त दोष बढ़ने पर अधिक सेवन से दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सही उपयोग से ये समस्या नहीं होती।
संभावित दुष्प्रभाव

  • पेट में जलन या गर्मी का अनुभव।
  • अम्लपित्त (एसिड रिफ्लक्स) 
  • पाचन में असहजता। 
 

विल्वादि गुलिका अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या विल्वादि गुलिका खाली पेट ले सकते हैं?
नहीं, भोजन के बाद ही लें। गर्म तासीर के कारण पेट में जलन हो सकती है। घी या गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।

विल्वादि गुलिका का असर कब दिखता है?
व्यक्ति अनुसार अलग-अलग। पाचन समस्या में 2-3 दिन या एक सप्ताह लग सकता है। नियमित सेवन जरूरी।

क्या विल्वादि गुलिका वजन कम करने में मदद?
पाचन सुधारकर अप्रत्यक्ष लाभ देती है। लेकिन डाइट और व्यायाम के बिना वजन नहीं घटेगा। यह एक पूरक औषधि है।

क्या विल्वादि गुलिका गर्भावस्था में सुरक्षित?
उष्ण गुण के कारण नहीं। डॉक्टर की सलाह बिना न लें, विशेष रूप से तैयार करवाएं।

विल्वादि गुलिका को कहां से खरीदें?
GMP, AYUSH मार्क वाले ब्रांड चुनें जैसे कोट्टक्कल, AVN। विश्वसनीय स्टोर या 1mg से लें। क्रय करने से पूर्व बैच नंबर जांचें। 
 
विल्वादी गुलिका क्या है?
विल्वादी गुलिका एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक दवा है। यह सर्पदंश, कीटकाट, विषूचिका, अपच और भूतबाधा जैसी समस्याओं में उपयोगी है।

विल्वादी गुलिका में कौन-कौन सी सामग्री हैं?
मुख्य घटक हैं - बिल्व मूल, सुरसा पुष्प, करंज फल, नत जड़, सुराह्व छाल, त्रिफला, त्रिकटु, हरिद्रा, दारुहरिद्रा। बकरी मूत्र से पीसकर गोली बनाई जाती है।

विल्वादी गुलिका के क्या कोई दुष्प्रभाव हैं?
सामान्यतः सुरक्षित, परंतु कुछ को गर्म तासीर से पेट में जलन या एलर्जी हो सकती है। अधिक मात्रा से हानि संभव।

क्या विल्वादी गुलिका बच्चों को दे सकते हैं?
नहीं, बच्चों के लिए डॉक्टर की सलाह अनिवार्य। मात्रा कम रखें।

क्या इसका उपयोग अन्य दवाओं के साथ कर सकते हैं?
डॉक्टर से पूछें। अन्य औषधियों से संभावित प्रतिक्रिया हो सकती है। हमेशा परामर्श लें। 
 
Source/Reference/सन्दर्भ 
  • योग रत्न समुच्चय
  • भैषज्य रत्नावली
  • चरक संहिता 
नोट: यह केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है, आपके आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। हमेशा, हमेशा किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करें, इससे पहले कि आप अपनी दिनचर्या में कोई नया हर्बल उपाय जोड़ें। 
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