ताम्र भस्म के नुकसान क्या हैं जानिये
ताम्र भस्म के नुकसान: कब और क्यों हो सकता है खतरा, जानें सावधानियां
ताम्र भस्म क्या है और क्यों इस्तेमाल होती है?
तांबे को कई बार शोधन (शुद्ध करना), मारण और भस्मीकरण की प्रक्रिया से गुजारकर ताम्र भस्म बनाई जाती है। इसमें बार-बार कैल्सीनेशन (भट्टी में जलाना) होता है, जिससे तांबा सूक्ष्म कणों में बदल जाता है और शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है। आयुर्वेद में इसे उष्ण, तीक्ष्ण, भेदी और विरेचक गुण वाला माना जाता है। यह पित्त बढ़ा सकती है, कफ सुखाती है और शरीर के गंभीर रोगों में काम आती है। लेकिन यही गुण ज्यादा होने पर समस्या पैदा करते हैं।ताम्र भस्म के प्रमुख नुकसान और दुष्प्रभाव
अगर शुद्ध ताम्र भस्म (शोधित) कम मात्रा में डॉक्टर की सलाह से ली जाए, तो ज्यादातर मामलों में सुरक्षित रहती है। लेकिन गलत भस्म, ज्यादा डोज या लंबे समय तक इस्तेमाल से ये समस्याएं हो सकती हैं:पेशाब में जलन और मूत्र संबंधी परेशानी
ताम्र भस्म बहुत उष्ण होती है। लगातार या ज्यादा लेने से मूत्र मार्ग में जलन, दर्द या बार-बार पेशाब आने की शिकायत हो सकती है। कई लोगों को पेशाब में तेज जलन महसूस होती है।उल्टी और मतली
आयुर्वेद में ताम्र भस्म को जहर के मामले में उल्टी कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादा मात्रा में लेने से खुद उल्टी, मतली, पेट में मरोड़ या घबराहट हो सकती है।पेट में जलन, एसिडिटी और पाचन की दिक्कत
यह पित्त बढ़ाती है। पित्त प्रकृति वाले लोगों में अम्लपित्त, एसिड रिफ्लक्स, पेट में जलन या अल्सर जैसी समस्या हो सकती है। कब्ज, दस्त या पेट फूलना भी आम है।रक्तस्राव संबंधी समस्या (ब्लीडिंग डिसऑर्डर)
नाक से खून आना, पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग, या अन्य जगहों से रक्तस्राव हो सकता है। गर्भावस्था में यह गर्भाशय से असामान्य ब्लीडिंग का कारण बन सकती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए।गुदा में एनल फिशर
ज्यादा उष्णता से गुदा में सूखापन और दरार पड़ सकती है, जिससे दर्द और ब्लीडिंग होती है।जिंक और अन्य खनिजों की कमी
ज्यादा तांबा जिंक के अवशोषण में रुकावट डालता है। इससे जिंक की कमी हो सकती है, जिसके लक्षण हैं:- थकान और कमजोरी
- अनिद्रा, चिंता, डिप्रेशन
- मूड स्विंग्स, क्रैम्प्स
- बाल झड़ना, त्वचा की समस्या
- खमीर संक्रमण (कैंडिडा)
- हाइपोथायरॉइड जैसे लक्षण (ठंड लगना, मस्तिष्क)
अन्य सामान्य दुष्प्रभाव
- चक्कर आना, सिरदर्द
- निम्न रक्तचाप
- मुंह में छाले
- लीवर या किडनी पर असर (रिसर्च में ज्यादा डोज पर देखा गया)
- विल्सन डिजीज वाले लोगों में बहुत खतरनाक, क्योंकि शरीर तांबा बाहर नहीं निकाल पाता।
रिसर्च से पता चलता है कि असुद्धित (बिना शुद्ध की गई) ताम्र भस्म थेराप्यूटिक डोज में भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि शुद्ध वाली 5 गुना तक सुरक्षित रहती है। लेकिन 10 गुना डोज पर लीवर, किडनी और दिल पर असर पड़ सकता है।
ताम्र भस्म की गुणवत्ता कैसे जांचें?
रंग: काला, मुलायम और चिकना पाउडर।स्वाद: स्वादहीन।
उंगली पर मलने पर बहुत बारीक लगे।
पानी पर तैरना चाहिए।
खट्टी दही में डालें – अगर दही नीला हो जाए तो जहरीली है, इस्तेमाल न करें।
हमेशा विश्वसनीय कंपनी की लें, जैसे बैद्यनाथ या पतंजलि, लेकिन लेबल चेक करें।
सावधानियां और जरूरी बातें
- कभी खुद से न लें। आयुर्वेदिक डॉक्टर या वैद्य से सलाह लें।
- सामान्य डोज: 30-125 mg दिन में 1-2 बार, शहद अनुपान के साथ।
- ज्यादा दिन तक लगातार न लें।
- पित्त प्रकृति, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली, बच्चे, विल्सन डिजीज या लीवर/किडनी समस्या वाले बिल्कुल न लें।
- अगर कोई दुष्प्रभाव दिखे तो तुरंत बंद करें और डॉक्टर से मिलें।
ताम्र भस्म जैसी शक्तिशाली औषधि फायदेमंद भी है और खतरनाक भी। सही हाथों में रामबाण, गलत इस्तेमाल में जहर। इसलिए हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में ही इस्तेमाल करें।
(यह जानकारी सामान्य आयुर्वेदिक ज्ञान और उपलब्ध अध्ययनों पर आधारित है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकती। कोई भी भस्म या दवा शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।)

