चन्दनासव के फायदे नुकसान उपयोग विधि

चन्दनासव के फायदे नुकसान उपयोग विधि

चन्दनासव के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और कीमत: पेशाब की जलन और शुक्रमेह का प्राकृतिक उपाय आयुर्वेद में आसव बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि ये जड़ी-बूटियों को गुड़ और चीनी के साथ किण्वित करके बनाए जाते हैं, जिससे उनकी शक्ति बढ़ जाती है। चन्दनासव (Chandanasava) भी ऐसा ही एक शक्तिशाली आसव है, जिसमें मुख्य घटक सफेद और लाल चंदन होता है। यह ठंडी तासीर का है, पित्त को शांत करता है और शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है। खासकर पेशाब से जुड़ी समस्याओं, शुक्रमेह और पुरुषों की कमजोरी में सदियों से इस्तेमाल होता आ रहा है।

चन्दनासव के फायदे नुकसान उपयोग विधि

यह दवा 26 से ज्यादा जड़ी-बूटियों से बनती है, जैसे चंदन, सुगंधबाला, नीलकमल, मुनक्का, मुलेठी आदि। ये सब गुड़ के घोल में किण्वित होकर तैयार होती हैं। आजकल यूरिन इन्फेक्शन, किडनी स्टोन और गर्मी से होने वाली परेशानियां बढ़ रही हैं, ऐसे में चन्दनासव एक अच्छा घरेलू-आयुर्वेदिक विकल्प साबित होता है। लेकिन इसे हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें। चलिए विस्तार से जानते हैं इसके फायदे, नुकसान, इस्तेमाल का तरीका और बाजार में कीमत।

चन्दनासव के मुख्य फायदे

चन्दनासव को मुख्य रूप से मूत्र रोगों (यूरिनरी डिसऑर्डर) के लिए जाना जाता है। इसमें एंटीसेप्टिक, मूत्रवर्धक और शीतल गुण होते हैं। यहां कुछ प्रमुख फायदे हैं:
पेशाब में जलन और संक्रमण से राहत

पेशाब में जलन और संक्रमण से राहत

पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना या यूरिन इन्फेक्शन (UTI) में यह बहुत असरदार है। चंदन और अन्य ठंडी जड़ी-बूटियां सूजन कम करती हैं और बैक्टीरिया से लड़ती हैं। किडनी स्टोन (खासकर यूरिक एसिड वाली) में भी फायदा पहुंचाती है।

शुक्रमेह (स्पर्मेटोरिया) में रामबाण

पुरुषों में वीर्य का अपने आप निकल जाना, स्वप्नदोष या पेशाब के साथ वीर्य आना जैसी समस्या में यह पारंपरिक इलाज है। यह पुरुष प्रजनन तंत्र को मजबूत बनाता है और कमजोरी दूर करता है। शरीर की अतिरिक्त गर्मी और पित्त दोष कम करता है गर्मी से होने वाली जलन, रक्त पित्त, श्वेत प्रदर या रक्त प्रदर में राहत देता है। यह शरीर को ठंडक देता है और पित्त को संतुलित रखता है।

पाचन शक्ति

पाचन शक्ति बढ़ाता है और ताकत देता है

इसमें दीपक (भूख बढ़ाने वाला) और पाचक गुण हैं। अपच, पेट फूलना, कब्ज या मतली में सुधार लाता है। साथ ही हृदय को ताकत देता है और इम्यूनिटी मजबूत करता है।

अन्य फायदे

गोनोरिया या शुरुआती सिफलिस जैसे संक्रमण में सहायक।
हेमेटुरिया (मूत्र में खून) में उपयोगी।
वजन घटना या कमजोरी दूर करने में मदद।

चन्दनासव के घटक (मुख्य सामग्री)

चन्दनासव औषधि के घटक द्रव्य (Contents of Chandansava)
  • चन्दन
  • उशीर
  • मुस्ता
  • गंभारी मूल
  • कमल
  • पद्य काष्ठ
  • लोद्र
  • कचनार की छाल
  • रक्त चन्दन
  • पाठा
  • किरातातिक्त
  • द्राक्षा
  • पीपली
  • कर्चुर
  • पर्पट
  • यष्टिमधु
  • रास्ना
  • पटोल
  • मंजिष्ठा
  • आम्र त्वक
  • मोचरस
  • प्रियंगु
  • वत की छाल
  • गुड
  • शर्करा
  • धातकी के फूल

सफेद चंदन और रक्त चंदन (मुख्य) सुगंधबाला, गंभारी, नागरमोथा, रास्ना, मुलेठी, पटोलपत्र, कांचनार, मोचरस, आम्रत्वक, पद्मकाष्ठ, मंजिष्ठा, पिप्पली, नीलकमल, द्राक्षा, धातकी पुष्प गुड़ और शक्कर (किण्वन के लिए) ये सब मिलकर इसे एक संपूर्ण टॉनिक बनाते हैं।

उपयोग विधि और खुराक

वयस्कों के लिए: 12-24 मिली (लगभग 2-4 चम्मच) दिन में 2 बार, भोजन के बाद।
कैसे लें: बराबर मात्रा में गुनगुने पानी मिलाकर।
बच्चों के लिए (7 साल से ऊपर): कम खुराक में, डॉक्टर की सलाह से।
अवधि: 1-3 महीने तक सुरक्षित, लेकिन डॉक्टर के अनुसार।
सर्वोत्तम समय: खाने के बाद, ताकि पाचन पर अच्छा असर हो।

हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर से खुराक तय करवाएं, क्योंकि यह व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) पर निर्भर करता है।

चन्दनासव के नुकसान और सावधानियां

यह दवा ज्यादातर सुरक्षित है, लेकिन कुछ मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए:

डायबिटीज वाले लोग: इसमें गुड़ और चीनी होती है, जो ब्लड शुगर बढ़ा सकती है। शुगर-फ्री वैरिएंट या डॉक्टर से पूछकर लें।
गर्भावस्था और स्तनपान: स्वंय से यह ओषधि नहीं लेनी चाहिए।
अन्य साइड इफेक्ट्स: बहुत कम, लेकिन ज्यादा लेने से पेट में हल्की गड़बड़ी हो सकती है।
अगर कोई एलर्जी या पुरानी बीमारी हो, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।

चन्दनासव की कीमत और उपलब्ध ब्रांड

भारत में यह आसानी से मिल जाता है। 2025-2026 के आसपास कीमतें कुछ इस तरह हैं (ऑनलाइन/ऑफलाइन स्टोर के अनुसार, थोड़ा बदलाव हो सकता है):
बैद्यनाथ चन्दनासव
450 ml: ₹190-₹220 (PharmEasy, Baidyanath साइट पर ₹199 के आसपास)
225 ml: ₹100-₹150
डाबर चन्दनासव
450 ml: ₹180-₹250
एवीपी (AVP) या कोट्टक्कल (Kottakkal)
450 ml: ₹200-₹300 (केरल ब्रांड होने से थोड़ा महंगा)
अन्य ब्रांड: प्लैनेट आयुर्वेदा, बेसिक आयुर्वेदा आदि में भी उपलब्ध।
ऑनलाइन Amazon, 1mg, PharmEasy या Flipkart पर चेक करें, अक्सर डिस्काउंट मिलता है। हमेशा शुद्ध और अच्छी कंपनी की ही लें।

चन्दनासव औषधि की उपलब्धता (Availability of Chandansava)

  • बैधनाथ चन्दनासव (Baidyanath chandanasav)
  • डाबर चन्दनासव (Dabur chandanasav)
  • मुल्तानी चन्दनासव (Multani chandanasav)
  • सांडू चन्दनासव (Sandu chandanasav)
  • बेसिक आयुर्वेदा चन्दनासव (Basic ayurveda chandanasav)
  • दिव्य चन्दनासव (divya pharmacy chandanasav)
  • धूतपापेशवर चन्दनासव (dhootpapeshwar chandanasav)
  • कपिवा चन्दनासव (Kapiva chandanasav)
  • झंडू चन्दनासव (zandu chandanasav)
  • कोट्टकल चन्दनासव (kottakkal chandanasav)
  • स्वदेशी चन्दनासव (swadeshi chandanasav)
  • अग्निवेश चन्दनासव (Agnivesh chandanasav)
  • केरला आयुर्वेदा चन्दनासव (kerala ayurveda chandanasav)
चंदनासव आयुर्वेद की एक प्राचीन और शक्तिशाली औषधि है, जो चंदन की ठंडक और अन्य जड़ी-बूटियों के संयोजन से तैयार की जाती है। यह पित्त दोष को संतुलित कर मूत्र विकारों, त्वचा समस्याओं और शरीर की आंतरिक गर्मी को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है।

चंदनासव के लाभों पर विस्तृत FAQ

चंदनासव का उपयोग किसलिए किया जाता है?


चंदनासव मुख्यतः मूत्र मार्ग के संक्रमण, पेशाब में जलन, किडनी पथरी, शरीर की तीव्र गर्मी तथा पित्त प्रधान रोगों के उपचार में प्रयुक्त होता है। इसके एंटीबैक्टीरियल, मूत्रवर्धक और शीतल गुण मूत्रकृच्छ्र, गोनोरिया तथा मधुमेह संबंधी जटिलताओं को नियंत्रित करने में प्रभावी हैं। यह शरीर को शुद्ध कर समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

क्या चंदनासव लीवर के स्वास्थ्य में मदद कर सकता है?


हाँ, चंदनासव लीवर को हानिकारक विषाक्त पदार्थों से मुक्त करता है, सूजन को कम करता है तथा पित्त के स्राव को सामान्य बनाए रखता है। यह एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में लीवर की कार्यक्षमता को मजबूत बनाता है और पीलिया जैसी स्थितियों में राहत प्रदान करता है। नियमित सेवन से लीवर की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

क्या चंदनासव मूत्र संक्रमण के लिए कारगर है?


चंदनासव मूत्र संक्रमण (यूटीआई), पेशाब में जलन और मूत्राशय की सूजन में अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि इसमें शक्तिशाली जीवाणुनाशक और मूत्रप्रवर्तक गुण विद्यमान हैं। यह संक्रमण के मूल कारण को नष्ट करता है तथा मूत्र प्रवाह को सुगम बनाता है। इससे बार-बार होने वाली समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

चंदनासव से त्वचा को क्या लाभ होते हैं?


चंदनासव त्वचा को आंतरिक ठंडक प्रदान कर मुहांसे, चकत्ते, एक्जिमा तथा गर्मीजन्य विकारों को शांत करता है। इसके विरोधी-भूषण और कीटाणुनाशक गुण त्वचा को स्वच्छ, कोमल और चमकदार बनाते हैं। यह बाहरी लेपन के साथ आंतरिक सेवन से दोहरा लाभ देता है।

क्या चंदनासव से शरीर की गर्मी कम होती है?


हाँ, चंदनासव शरीर की अतिरिक्त गर्मी, जलन और पसीने की अधिकता को प्रभावी ढंग से कम करता है, क्योंकि यह मूलतः पित्त शामक और शीतल गुणों से परिपूर्ण है। यह गर्मी से उत्पन्न सूजन, सिरदर्द और बेचैनी को दूर कर शारीरिक संतुलन बहाल करता है। ग्रीष्म ऋतु में यह विशेष रूप से उपयोगी है।

चंदनासव पित्त दोष में कैसे मदद करता है?


चंदनासव पित्त दोष को तत्काल शांत करता है तथा जलन, अम्लपित्त, सूजन जैसी पित्तजन्य व्याधियों से मुक्ति दिलाता है। यह पित्त की तीक्ष्णता को अवशोषित कर शरीर के तीनों दोषों में समन्वय स्थापित करता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से यह पित्त संतुलन का सर्वोत्तम स्रोत है।

चंदनासव की खुराक और सावधानियां क्या हैं?


चंदनासव की सामान्य खुराक 12-24 मिलीलीटर दिन में दो बार भोजनोत्तर समान जल के साथ ग्रहण करें। मधुमेह पीड़ित, गर्भवती महिलाएं, शिशु तथा कमजोर पाचन वाले व्यक्ति चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अधिक मात्रा से अपच हो सकता है, अतः अनुशंसित सीमा का पालन करें।

क्या चंदनासव हृदय और पाचन के लिए लाभदायक है?


चंदनासव हृदय की मांसपेशियों को पोषण प्रदान कर रक्त संचार को बेहतर बनाता है तथा अपच, भूख न लगना और गैस जैसी पाचन समस्याओं का समाधान करता है। यह एक प्राकृतिक टॉनिक के रूप में शारीरिक कमजोरी दूर कर ऊर्जा स्तर को बढ़ाता है। दीर्घकालिक सेवन से समग्र कल्याण प्राप्त होता है। 
 
चंदनासव एक प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है, लेकिन इसके सेवन में विशेष सावधानियां बरतना आवश्यक है ताकि कोई दुष्प्रभाव न हो। यह शीतल प्रकृति की होने से कुछ व्यक्तियों के लिए अनुपयुक्त हो सकती है।

चंदनासव सेवन की प्रमुख सावधानियां

मधुमेह रोगियों के लिए

मधु मेह (मधुमेह) से ग्रस्त व्यक्ति चंदनासव का सेवन न करें, क्योंकि इसमें गुड़ या प्राकृतिक शर्करा की पर्याप्त मात्रा होती है जो रक्त शर्करा के स्तर को असंतुलित कर सकती है। डायबिटीज नियंत्रण वाले मरीज भी चिकित्सक परामर्श के बिना इसका उपयोग टालें।​​

गर्भावस्था और स्तनपान में

गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं को चंदनासव से पूर्णतः परहेज करना चाहिए। इसके अनुलोमक गुण गर्भाशय पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे गर्भपात या अन्य जटिलताओं का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

सेवन विधि और मात्रा संबंधी

चंदनासव को सदैव बराबर या उससे अधिक मात्रा में पानी मिलाकर ही ग्रहण करें, अन्यथा यह पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। सामान्य खुराक 12-24 मिली दिन में दो बार भोजन के बाद हो, लेकिन अधिक मात्रा से अपच या दस्त हो सकता है।​

शीत प्रकृति और कफ दोष वाले

शीतल प्रकृति, ठंडी तासीर या कफ प्रधान व्यक्तियों को चंदनासव से बचना चाहिए, विशेषकर सर्दियों या जुकाम की स्थिति में। इससे सर्दी-खांसी या श्वसन समस्याएं बढ़ सकती हैं।

अन्य सावधानियां

  • बच्चों को बिना वैद्यकीय सलाह के न दें।
  • कमजोर पाचन या आम बढ़ने पर दीपन द्रव्यों के साथ ही लें। 

चन्दनासव जैसे आसव प्रकृति के उपहार हैं – ठंडक देते हैं, संक्रमण दूर करते हैं और शरीर को मजबूत बनाते हैं। अगर पेशाब की जलन, धात गिरना या गर्मी की शिकायत है, तो इसे आजमाकर देखें, लेकिन डॉक्टर की देखरेख में। स्वस्थ रहिए!
 
 (यह जानकारी सामान्य आयुर्वेदिक ज्ञान, ग्रंथों और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकती। कोई भी आसव या दवा शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।)
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