खांसी से तुरंत राहत दिलाने वाले 5 घरेलू उपाय

दादी-नानी के नुस्खे: खांसी से तुरंत राहत दिलाने वाले 5 घरेलू उपाय, आज भी हैं सबसे असरदार


सर्दियों का मौसम आते ही या मौसम बदलते ही खांसी की शिकायत घर-घर में होने लगती है। खासकर रात में खांसी आने पर नींद उड़ जाती है, गला खराब हो जाता है और कभी-कभी कफ भी फंस जाता है। दवा लेने से पहले या दवा न होने पर घर में मौजूद चीजों से ही राहत मिल सकती है। दादी-नानी के जमाने से चले आ रहे ये नुस्खे आज भी लाखों लोगों के काम आते हैं। ये प्राकृतिक हैं, सस्ते हैं और ज्यादातर मामलों में बिना साइड इफेक्ट के आराम देते हैं। आयुर्वेद में भी इनका जिक्र मिलता है – जैसे अदरक गर्म तासीर की है, शहद गले को आराम देता है, हल्दी सूजन कम करती है और लौंग संक्रमण से लड़ती है। 

खांसी से तुरंत राहत दिलाने वाले 5 घरेलू उपाय

चलिए, इन 5 सबसे कारगर नुस्खों पर विस्तार से बात करते हैं। ये सूखी खांसी, बलगम वाली खांसी और गले की खराश – दोनों में फायदेमंद साबित होते हैं।

शहद और अदरक – गले की खराश का सबसे पुराना इलाज

अगर खांसी तेज हो रही है और गला खराब लग रहा है, तो शहद और अदरक का मिश्रण सबसे पहले आजमाएं। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन कम करते हैं, जबकि शहद गले को कोटिंग देकर खराश शांत करता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि शहद खांसी को दबाने में कई दवाओं से बेहतर काम करता है, खासकर बच्चों में (1 साल से ऊपर)। 


कैसे इस्तेमाल करें?  

1 चम्मच शहद में आधा चम्मच ताजा अदरक का रस मिलाएं।
धीरे-धीरे चाटें या गुनगुने पानी में मिलाकर पीएं।
दिन में 2-3 बार लें, खासकर रात को सोने से पहले।
अगर अदरक का रस निकालना मुश्किल लगे, तो अदरक की चाय बनाकर उसमें शहद डालकर पीएं। ये नुस्खा सूखी खांसी में खासतौर पर फायदेमंद है और जल्दी राहत देता है।

लौंग – किचन में छिपा रामबाण

घर में लौंग हमेशा रखी रहती है। ये सिर्फ मसाले के लिए नहीं, बल्कि खांसी के लिए भी बहुत उपयोगी है। लौंग गर्म तासीर की है, गले को गर्माहट देती है और बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करती है। आयुर्वेद में इसे गले के संक्रमण और खांसी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कैसे इस्तेमाल करें? एक लौंग को दांतों के बीच रखकर धीरे-धीरे चूसें (चबाएं नहीं)।
इसका रस गले में पहुंचेगा और खांसी शांत हो जाएगी।
दिन में 3-4 बार करें।
अगर ज्यादा खांसी हो, तो 2-3 लौंग को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और गुनगुना पीएं। ये नुस्खा रात की खांसी में बहुत असरदार है।

हल्दी वाला दूध – इम्यूनिटी बढ़ाने वाला गोल्डन मिल्क

हल्दी वाला दूध – इम्यूनिटी बढ़ाने वाला गोल्डन मिल्क

हल्दी वाला दूध (हल्दी दूध) सदियों से सर्दी-खांसी का इलाज माना जाता है। हल्दी में कर्क्यूमिन नाम का तत्व होता है जो सूजन कम करता है, बैक्टीरिया से लड़ता है और इम्यूनिटी मजबूत बनाता है। काली मिर्च डालने से कर्क्यूमिन का असर कई गुना बढ़ जाता है। 


कैसे इस्तेमाल करें? 

एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर, एक चुटकी काली मिर्च और थोड़ा गुड़ या शहद मिलाएं।
सोने से आधा घंटा पहले पी लें।
रोज रात को 7-10 दिन तक लें। ये खांसी के साथ छाती की जकड़न और थकान भी दूर करता है। बच्चों को भी (डॉक्टर से पूछकर) दिया जा सकता है। 

तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा – बलगम निकालने का देसी तरीका

तुलसी को आयुर्वेद में "ओषधि" कहा जाता है क्योंकि ये संक्रमण से लड़ती है और श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है। काली मिर्च बलगम को पतला करती है और कफ वाली खांसी में बहुत फायदा देती है। 

कैसे इस्तेमाल करें? 

8-10 तुलसी की पत्तियां, 4-5 काली मिर्च, थोड़ा अदरक और पानी में उबालें।
पानी आधा रह जाए तो छान लें, शहद मिलाकर गुनगुना पीएं।
दिन में 2 बार लें। ये नुस्खा जुकाम, खांसी और बुखार में भी राहत देता है। 


भाप लेना और नमक पानी से गरारे – तुरंत आराम के लिए

ये दो तरीके बहुत सरल हैं लेकिन कमाल के हैं। भाप से नाक-गला खुलता है और गरारे से गले की जलन कम होती है।

गर्म पानी में 2-3 बूंद नीलगिरी तेल या थोड़ा विक्स डालकर भाप लें (5-10 मिनट)।
गुनगुने पानी में नमक और चुटकी हल्दी डालकर गरारे करें।
दिन में 3-4 बार। ये खासतौर पर कफ वाली खांसी में फायदेमंद है।
सावधानियां और जरूरी बातें ये नुस्खे सामान्य खांसी में अच्छा काम करते हैं, लेकिन अगर खांसी 1-2 हफ्ते से ज्यादा रहे, खून आए, सांस फूल रही हो या बुखार हो तो डॉक्टर से जरूर मिलें।


1 साल से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।
अगर कोई एलर्जी या दवा चल रही हो तो पहले डॉक्टर से पूछ लें।
ज्यादा मात्रा में कुछ भी न लें, संतुलन रखें।

दादी-नानी के ये नुस्खे प्रकृति के उपहार हैं – आसान, सुरक्षित और असरदार। इन्हें अपनाकर सर्दी-खांसी से जल्दी छुटकारा पाएं और परिवार को स्वस्थ रखें। स्वस्थ रहिए, खुश रहिए! 

(यह जानकारी सामान्य है और आयुर्वेदिक/घरेलू ज्ञान पर आधारित है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकती। कोई भी नया उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)

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