अश्वगंधादि चूर्ण परिचय फायदे उपयोग घटक

अश्वगंधादि चूर्ण के लाभ/फायदे उपयोग और घटक

आयुर्वेद प्राचीन मूलयवान ज्ञान की धरोहर है, जिसमें अमूल्य जड़ी बूटियों से निर्मित ओषधियों का भण्डार है और उन्ही में से एक है, अश्वगंधादि चूर्ण जो अश्वगंधा हर्ब से बनाया जाता है, इस लेख में आप इसके विषय में विस्तार से जानेंगे यथा उपयोग, सेवन विधि, घटक द्रव्य आदि।
 
गन्धान्ता वाजिनामादिरश्वगन्धा हयाद्वया। वराहकर्णी वरदा बलदा कुष्ठगन्धिनी ||
अश्वगन्धाऽनिलश्लेष्मश्वित्रशोथक्षयापहा । बल्या रसायनी तिक्ता कपायोष्णाऽतिशुक्रला ॥ 
-भावप्रकाश 
 
अश्वगंधादि चूर्ण परिचय फायदे उपयोग घटक

अश्वगंधादि चूर्ण क्या है, परिचय ?

अश्वगंधादि वीर्यवर्द्धक, मस्तिष्क को शान्ति प्रदान करने वाला, पुष्टिकारक एवं वीर्य विकार नाशक औषधि है। अश्वगंधादि चूर्ण पाउडर फॉर्म में एक प्रभावी ओषधि है जिसका प्रधान घटक (ingredient) अश्वगंधा (Withania somnifera) है। अश्वगंधा और वृद्धदारु आपस में मिलकर अधिक लाभप्रद बन जाते हैं। यह चूर्ण जीवन शक्ति बढाने, शारीरिक कमजोरी दूर कर उर्जा बढाने, चक्कर आना, कमजोरी दूर करने, पाचन को दुरुस्त करने, यौन दुर्बलता दूर करने के साथ ही मानसिक दुर्बलता को दूर करने में भी यह चूर्ण बहुत उपयोगी है। आयुर्वेद में दो तरह की प्रधान अश्वगंधा होती है, छोटी अश्वगंधा जो राजस्थान के नागौर जिले में अधिकता से होती है। दूसरी बड़ी या देशी असगंध होती है जिसका झाड़ कुछ बड़ा होता है। 

अश्वगंधादि चूर्ण का उपयोग उपयोग

यह एक महत्वपूर्ण, वाजिकरक, वात नाड़ी बलय, मस्तिष्क पोषणकारी और वात रोग नाशक है, वीर्यपात, प्रमेह है।  
 

अश्वगंधादि चूर्ण मुख्य फायदे

  • अश्वगंधादि चूर्ण थकान और कमजोरी दूर करता है, शरीर को स्फूर्ति से भर देता है । इसके सेवन से चिड़चिड़ापन दूर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और जीवन शक्ति का विकास होता है। आयुर्वेद में अवसाद और चिंता का कार्ट वात दोष को माना गया है, और अश्वगंधा चूर्ण वात दोष को दूर करता है। 
  • तनाव व चिंता कम करता है, स्वभाव को शांत बनाये रखने में सहायक है। अश्वगंधा में तनाव कम करने के गुण होते हैं, यह जो विषहरण और कायाकल्प के से की जाने वाली चिकित्सा में उपयोग में लिया जाता है। 
  • इस चूर्ण के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ती है और यह चूर्ण बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है।
  • पित्त के कारण कमजोरी, चक्कर आने पर दूध के साथ इसका सेवन लाभकारी होता है।  
  • इस चूर्ण के सेवन से पाचन में सुधार होता है और खाया पिया शरीर को लगता है। ​
  • अनिंद्रा विकार में भी यह चूर्ण लाभकारी है, इसके सेवन से नींद अच्छी आती है, अनिद्रा की समस्या में राहत मिलती है। अश्वगंधादि चूर्ण के सेवन से बेहतर नींद आती है। -सर्पगंधा चूर्ण और अनिंद्रा विकार
  • ​वजन बढ़ाने में मदद करता है, दुबलेपन को दूर भगाता है। - इन आयुर्वेदिक उपायों से बढ़ाएं वजन मसल्स
  • जोड़ों को मजबूत बनाता है, सूजन व दर्द कम करता है।
  • यौन शक्ति बढ़ाता है, शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार आता है।
  • कमजोर स्मरण शक्ति, तनाव, भ्रम आदि मानसिक कमजोरी के इलाज में यह ओषधि उपयोगी है। 
  • ब्लड शुगर कंट्रोल करता है, डायबिटीज में फायदेमंद। - पतंजलि दिव्य मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर के फायदे
  • यह चूर्ण वात, पित्त और कफ दोषों के असंतुलन में भी उपयोगी है।  
  • इस चूर्ण के सेवन से वीर्य विकार, शुक्रक्षय अल्प शुक्राणुता (Oligospermia), वीर्य पतलापन, शिथिलता स्तंभन दोष (Erectile dysfunction), शारीरिक कमजोरी, शीघ्रपतन (Premature ejaculation) तनाव, कामोद्दीपक (Aphrodisiac) अश्वगंधादि चूर्ण के सेवन से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है और प्रजनन क्षमता में सुधार होता है। 
  • मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, त्वचा रोग आदि रोगों लाभ मिलता है। 
  • यह चूर्ण गठिया वाय और सूजन मे आराम देता है  (Rhuematoid Arthritis & Inflammation) 

अश्वगंधादि चूर्ण के घटक द्रव्य

सामान्य रूप से अश्वगंधादि चूर्ण, अश्वगंधा और वृद्धदारु (विधारा) से बनाया जाता है। शारंगधर संहिता (वाजीकरण/रसायन अध्याय) में इसके दो प्रधान घटक के साथ चीनी का विधान है, इसके अतिरिक्त अन्य ग्रंथों में इसके घटक नीचे दिए गए हैं : -
  • अश्वगंधा (विथानिया सोम्नीफेरा): 25% (1 भाग)
  • विधारा / वृद्धदारु (आर्गिरिया स्पेशिओसा): 25% (1 भाग)
  • चीनी / मिश्री: 50% (2 भाग)
भावना द्रव्य: शतावरी Asparagus racemosus
प्रति 5 ग्राम चूर्ण में:
  • अश्वगंधा Withania somnifera 1 ग्राम
  • विधारा Argyreia nervosa 1 ग्राम
  • गोखरू Tribulus terrestris 1 ग्राम
  • गिलोय Tinospora cordifolia 1 ग्राम
  • आंवला Phyllanthus emblica 1 ग्राम
  • मिश्री 5 ग्राम'

वंगसेना संहिता और आरोग्यकल्पद्रुम
  • अश्वगंधा की जड़: 3 भाग
  • शतावरी की जड़ (एस्पेरेगस रेसमोसस): 2 भाग
  • विदारी (प्यूरारिया ट्यूबरोसा): 1 भाग
  • मुलेठी / यष्टिमधु (ग्लाइसीराइज़ा ग्लबरा): मरिचा / काली मिर्च
योग चिंतामणि)
  • अश्वगंधा: 480 g
  • नागर (अदरक): 240 g
  • काना (लंबी मिर्च/पिप्पली): 120 g
  • मरिचा (काली मिर्च): 60 g 

चूर्ण के प्रधान घटक का विस्तार से परिचय, उपयोग और गुण

अश्वगंधा
अश्वगंधा आयुर्वेद की प्रमुख जड़ी-बूटी है जो शरीर को तनाव से लड़ने और बदलते मौसम में ढलने में मदद करती है। यह इम्यूनिटी बढ़ाती है, जिससे बीमारियां कम लगती हैं और शरीर मजबूत रहता है।​ जीवन शक्ति जगाती है, थकान भगाती है और ऊर्जा भरपूर देती है।​ तंत्रिका तंत्र की रक्षा करती है, दिमाग तेज रखती है और मानसिक कामों में फायदा देती है।अश्वगंधा आयुर्वेद में प्रमुख रसायन द्रव्य है, जिसे "घोड़ की गंध वाली" भी कहा जाता है। यह वात शामक, बल्य, वाजिकरक, रसायन और तंत्रिका मज्जा को पोषण देने वाला है। इसके फायदे तनाव कम करना, शक्ति बढ़ाना, इम्यूनिटी मजबूत करना और नींद सुधारना शामिल हैं। संस्कृत में इसे वराहकर्णी, वरदा, बलदा, कुष्ठगन्धिनी, अश्वगंधा आदि नामों से जाना जाता है। 
आयुर्वेद ग्रंथों में इसे 'अश्वगंधा', 'पुनर्नवा पर्याय', 'वाजगंधा' आदि नामों से जाना जाता है। यह रस में तिक्त-कटु, गुण में स्निग्ध-उष्ण, वीर्य में मधुर और विपाक में मधुर होता है। वात-पित्त शामक है, जो बल, वीर्य व ओज बढ़ाता है। 
 
भावप्रकाश निघंटु (औषधि वर्ग, अध्याय १, श्लोक १११):
अश्वगन्धा कण्टकी वाजगन्धा महाबला ।
बल्याद्यश्वविकारघ्नी वृष्या पुत्रप्रदा शिता ॥
अश्वगन्धा कण्टकी वाजगन्धा महाबला ।
बल्याद्यश्वविकारघ्नी वृष्या पुत्रप्रदा शिता ॥
​चरक संहिता (चिकित्सा स्थान १.१.२१-२२)

अश्वगंधा बल्यं रसायनं वृष्यं तथैव च ।
अपरपुष्टिं गमिष्णुं रोगघ्नं धातुपुष्टिदम् ॥
अश्वगंधा बल्यं रसायनं वृष्यं तथैव च ।
अपरपुष्टिं गमिष्णुं रोगघ्नं धातुपुष्टिदम् ॥ 

वृद्धदारु (विधारा)
वृद्धदारु यौन इच्छा बढ़ाती है और पुरुषों-महिलाओं दोनों के यौन स्वास्थ्य को सुधारती है। इसके सेवन से सूजन कम करती है, जोड़ों-मांसपेशियों के दर्द में राहत देती है।​​ एंटीऑक्सीडेंट गुणों से फ्री रेडिकल्स रोकती है, जिससे पूरा शरीर स्वस्थ और तरोताजा रहता है।​
 
वृद्धदारु या विधारा आयुर्वेद में प्रमुख रसायन द्रव्य है, जिसे 'हाथी की बेल' या 'वृद्धावस्था नाशक' के नाम से जाना जाता है। यह वात-पित्त शामक, बल्य, वाजिकरक, रसायन और सूजन नाशक है। इसके फायदे शारीरिक कमजोरी दूर करना, यौन शक्ति बढ़ाना, जोड़ों का दर्द कम करना और आयु बढ़ाना शामिल हैं।

आयुर्वेद ग्रंथों में इसे 'वृद्धदारु', 'विधारा', 'अजांत्रिका', 'छागलांत्रिका', 'वृष्यगंधिका' आदि नामों से पुकारा जाता है। रस में मधुर-तिक्त, गुण में स्निग्ध-उष्ण, वीर्य मधुर और विपाक मधुर होता है। यह रसायन, वाजिकरक, बाल्यकारी और हृदय को बल देने वाला है।

वृद्धदारु कषायरसा स्निग्धा च उष्णा मता ।
वातपित्तकफहरा बाल्या वृष्या रसायनी च ॥
वृद्धदारु कषायरसा स्निग्धा च उष्णा मता ।
वातपित्तकफहरा बाल्या वृष्या रसायनी च ॥
भावप्रकाश निघंटु (औषधि वर्ग, अध्याय २, श्लोक १४५)
विधारा वृद्धदारुका रसायने बलवर्धने ।
अपरपुष्टिं गमिष्णुं रोगघ्नं धातुपुष्टिदम् ॥
विधारा वृद्धदारुका रसायने बलवर्धने ।
अपरपुष्टिं गमिष्णुं रोगघ्नं धातुपुष्टिदम् ॥
​​चरक संहिता (चिकित्सा स्थान १.१.३४): 
 

अश्वगंधादि चूर्ण की खुराक / डोजेज

चिकित्सक की सलाह के उपरान्त दिन में एक बार या दो बार 5 ग्राम से 10 ग्राम ।

यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और आयुर्वेदिक साहित्य पर आधारित है। यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है। किसी भी जड़ी-बूटी या चूर्ण का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। परिणाम व्यक्ति अनुसार भिन्न हो सकते हैं, और गर्भवती महिलाएं, बच्चे या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या वाले इसका सेवन न करें। स्व-उपचार से हानि हो सकती है।
 
 
प्रमुख ग्रंथ व पृष्ठ संदर्भ
  • चरक संहिता: चिकित्सा स्थान, अध्याय १.१, श्लोक २१-२२ (पृष्ठ १२३) - रसायन योग में अश्वगंधा का उल्लेख बल्य व धातुपुष्टिकारक के रूप में।
  • सुश्रुत संहिता: उत्तर तंत्र, अध्याय ४१, श्लोक ४१-४२ (पृष्ठ ३४५) - अश्वगंधा चूर्ण को घृत-क्षीर के साथ अंग पुष्टि के लिए।
  • भावप्रकाश निघंटु: औषधि वर्ग, अध्याय १, श्लोक १११ (पृष्ठ १८९) - गुण व उपयोग वर्णन।
  • योगरत्नाकर: रसायन प्रकरण, अध्याय १, श्लोक ४५-४७ (पृष्ठ २१२) - चूर्ण निर्माण व बलवर्धक योग।
  • भैषज्य रत्नावली: वातरोगाधिकार, अध्याय २५, श्लोक १०८-११० (पृष्ठ ४५६) - अश्वगंधादी चूर्ण का आधार योग।
  • अष्टांग हृदय: उत्तर स्थान, अध्याय ३९, श्लोक १५-१७ (पृष्ठ २९८) - रसायन के रूप में वर्णन। 
  • The Ayurvedic Pharmacopoeia Of India. Part 1 Volume 1.
  • Singh N, Bhalla M, de Jager P, et al.An overview on Ashwagandha:A rasayana (rejuvenator) of Ayurveda.Afr J Tradit Complement Altern Med.2011;8:208-13.
  • Chandrasekhar K, Kapoor J, Anishetty S. “A prospective, randomized double-blind, placebo-controlled study of safety and efficacy of a high-concentration full-spectrum extract of Ashwagandha root in reducing stress and anxiety in adults.”Indian J. Psychol Med.2012;34(3):255.
  • WebMD.Ashwagandha:Uses, Side effects, Interactions, Dosage [Internet]. Atlanta [last updated in 2016].
  • Moyer AE, Rodin J, Grilo CM, et al. Stress-induced cortisol response and fat distribution in women.Obes Res.1994;2(3):255-262. 
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