कचनार के फायदे उपयोग और सेवन विधि

कचनार के फायदे उपयोग और सेवन विधि थायरॉइड, कैंसर में भी है लाभकारी

आज के लेख में हम कचनार के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे, यथा कचनार क्या है, आयुर्वेद में इसके क्या लाभ हैं और इसके क्या उपयोग बताये गए हैं। हमें प्रकृति ने हमें जड़ी बूटियों, और गुणकारी ओषधि के कई ऐसे खजाने दिए हैं जो बीमारियों को जड़ से मिटाने का काम करते हैं। कचनार इन्हीं में से एक ऐसा पौधा है जो सालों से आयुर्वेद के अनुभवी वैद्य आजमाते आए हैं। गांठों को दूर करने से लेकर थायरॉइड तक, कचनार उपयोगी है। आयुर्वेद के पुराने ग्रंथों में कचनार को परम औषधि बताया गया है। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भवप्रकाश निघंटु और अष्टांग हृदय जैसे प्रमुख स्रोतों में इसका जिक्र मिलता है। इन ग्रंथों ने इसे गांठ नाशक और दोष शामक बनाया।
 
 
कचनार के फायदे उपयोग और सेवन विधि

कचनार का परिचय

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में कचनार को चमत्कारी औषधि माना गया है, जो रोगों को दूर करता है । चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इसके गुणों का विस्तार से वर्णन प्राप्त होता है। इसके संस्कृत में नाम रक्तकंचन, गंदरी, युगपत्रक हैं। चरक संहिता के चिकित्सास्थान में वामनोपग गण में शामिल, विषाक्त पदार्थ निकालने वाला। कसैला रस, कफ-पित्त शामक। सुश्रुत संहिता में गुल्मचिकित्सा अध्याय में गांठ-गुल्म नाशक बताया। कचनार के फायदे और परिचय नीचे विस्तार से बताये गए हैं.
 

आयुर्वेद में कचनार के लाभ

आयुर्वेद कचनार को शीतल और सारक मानता है। कसैला रस वाला ये ग्राही गुण लिए कफ, पित्त, व्रण, कृमि, कण्ठमाला, कुष्ठ, वात, गुदाभ्रंश और रक्तपित्त जैसी परेशानियां दूर करता है। इसके फूल भी शीतल, कसैले, रूखे, ग्राही, मधुर और हलके होते हैं, जो पित्त, क्षय, प्रदर, खांसी व रक्त रोगों को दूर करते हैं। सफेद कचनार ग्राही, कसैला, मधुर, रुचिकारक व रूक्ष गुणों से श्वास, खांसी, पित्त, रक्तविकार, क्षत और प्रदर को नष्ट करता है, बाकी गुण लाल वाले जैसे ही रहते हैं।  

भावप्रकाश निघंटु में कचनारत्वक वर्णन -
 
"कचनारत्वक् रसी कषाया तिक्ता कफपित्तहरी। 
गुल्मग्रन्थिगदनाशी विस्रावजननाश्रिता।" 

अर्थात् कसैला-तिक्त रस, गांठ-ग्रंथि नष्ट करे, विष उत्सर्जन करने वाला है।
 
राजनीघंटु में -
 
"कांचनारः कनकद्वीपौ कनकस्रोतस्सुदुर्लभः। 
गुल्मरोगहरः शीघ्रः कफपित्तप्रशमनः।"

यानी गुल्मरोग हरता, कफ-पित्त शांत करे। अष्टांग हृदय में गंडमाला नाशक। इन ग्रंथों से सिद्ध है थायरॉइड, गांठ, सूजन में रामबाण बताया गया है। 

थायरॉइड और डायबिटीज रोगों में कचनार के फायदे


थायरॉइड और डायबिटीज जैसे विकारों में कचनार लाभकारी है। गांठें चाहे गले में हों, गर्भाशय में फाइब्रॉइड बनेंअपच से लेकर एंटी-कैंसर गुण तक, भारतीय पहाड़ों में उगने वाला कचनार सदियों से उपयोग में लिया जा रहा है। आयुर्वेदाचार्य के मुताबिक कचनार की छाल का काढ़ा गांठों पर सबसे तेज असर दिखाता है। उबालकर पिएं या गुग्गुल संग लें, फर्क साफ नजर आता है। घर पर गुग्गुल बनाना आसान—शुद्ध गुग्गुल घी में गलाएं, कचनार छाल-पत्ती का रस मिलाकर पकाएं, छोटी गोलियां तैयार। सुबह-शाम दो गोली काढ़े संग खाएं। पाचन दुरुस्त रहेगा, डायबिटीज कंट्रोल में आएगी।
 

सिर दर्द में लाल कचनार के फायदे

सिर दर्द विकार में लाल कचनार सबसे आसान घरेलू उपाय है। इसकी छाल को अच्छे से पीसकर माथे पर लेप लगाएं, कुछ ही देर में दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है। आयुर्वेद में इसे शीतल गुणों वाला बताया गया है, जो सिर की नसों को शिथिल करता है। रोज की भागदौड़ में सिर भारी लगे तो ये प्रकृति का सरल नुस्खा तुरंत राहत पहुंचाता है। 
 

दांत दर्द में लाल कचनार के फायदे

दांतों में दर्द रातों की नींद उड़ा दे तो लाल कचनार सबसे आसान घरेलू इलाज है। इसकी सूखी टहनियों को आग में जला लें, राख तैयार हो जाए। इसी राख से रोज सुबह-शाम दांतों का मंजन करें, दर्द धीरे-धीरे कम होता चला जाएगा। आयुर्वेद में इसे कसैले गुणों वाला माना गया है जो मसूड़ों को मजबूत बनाता है। नियमित मंजन से मसूड़ों से खून बहना भी बंद हो जाता है।  
 
 
​कचनार के प्रमुख औषधीय गुण
  • कचनार शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में लाभ होता है।
  • थायरॉइड के हाइपर या हाइपो में हार्मोन बैलेंस करता है और ग्रंथि को सामान्य करने में सहायक है।
  • शरीर में गांठों या गुल्म को पिघलाने में सबसे बड़ा काम करता है।
  • पाचन तंत्र सुधारता है, एसिडिटी दूर भगाता है और भूख बढ़ाता है।
  • पसीने की अधिकता या कमी दोनों को संतुलित रखता है।
  • इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है और सूजन को शांत करता है।
  • खून साफ करता है, फोड़े-फुंसी और त्वचा रोगों में राहत देता है।
  • अल्सर और पेचिश जैसी पेट की समस्याओं को ठीक करता है।
  • लीवर को मजबूत रखता है और विषाक्त प्रभाव हटाता है।
  • ग्राही गुण से दस्त और रक्तस्राव रोकता है।
  • कफ-पित्त शामक गुणों से त्रिदोष संतुलित करता है।
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण सूजन को दूर कर सूजन जनित दर्द को दूर करता है।
  • इसके एंटी-माइक्रोबियल गुण से संक्रमण मिटाता है।

कचनार के वृक्ष के बारे में अधिक जानिये

कचनार एक साधारण सा पेड़ है जो पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है जिसका वैज्ञानिक नाम बौहिनिया वैरिएगाटा है। आयुर्वेद में इसके कई ओषधिय गुणों के बारे में बताया गया है। कचनार आयुर्वेद का अनमोल रत्न है, जो गांठों को पिघलाने से लेकर थायरॉइड को संतुलित करने तक हर काम आता है। छाल का काढ़ा पीने से शरीर की गांठें धीरे-धीरे घुलने लगती हैं, पत्तियों का चूर्ण शहद के साथ लें तो हार्मोन बैलेंस हो जाते हैं। 
 
कचनार को अलग-अलग भाषाओं में कई नामों से जाना जाता है। संस्कृत में इसे कांचन, रक्तपुष्प, कान्तार, कनकप्रभ, कचनार, कोविदार जैसे नाम मिलते हैं। हिंदी में सादे कचनार कहते हैं। बंगाली में सफेद कांचन, मराठी में कांचन वृक्ष या कोरल, गुजराती में चम्पाकासी, चम्पो, काचनार। फारसी में भी कचनार ही बुलाते हैं। लैटिन नाम बौहिनिया टेंकाटोसा या बौहिनिया रेसमोसा है। आइये इसके बारे में कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं -
  • कचनार का वृक्ष ऊंचाई 15-20 फीट तक होता है, शाखाएं नाजुक और झुकी हुई रहती हैं।
  • इसकी छाल 1 इंच मोटी, खुरदुरी, भूरी या सफेद रंग की होती है।
  • पत्ते हरे, चौड़े, दो भागों में बंटे हुए जैसे गाय का खुर, 10-15 सेमी आकार के।
  • पत्ते पौष में झड़ते हैं, फाल्गुन से ज्येष्ठ तक नए आते हैं।
  • कलियां लंबी हरी, फूल 2 इंच बड़े, सफेद, गुलाबी, पीले या लाल रंग के, हल्की सुगंध वाली।
  • फलियां पकी हुई बालिश्त लंबी, कड़वी स्वाद वाली आती हैं।
  • भूरा गोंद लगता है जो पानी में फूल जाता है।
  • फूल फरवरी-अप्रैल में गुच्छों में खिलते हैं।

कचनार के समस्त लाभ/फायदे आयुर्वेद मतानुसार


कचनार आयुर्वेद का बहुमुखी जड़ी-बूटी है। इसके हर हिस्से से कई रोग दूर होते हैं। नीचे सभी नुस्झे सरल पूर्ण वाक्यों में दिए हैं।
  • आंतों के कीड़ों को पीले कचनार की छाल का काढ़ा पिलाने से पूरी तरह मारा जाता है और पेट साफ हो जाता है।
  • अव दस्त रोकने के लिए सूखी कचनार की फलियों का चूर्ण फंकी देने से तुरंत लाभ मिलता है।
  • जिगर की सूजन उतारने हेतु कचनार की जड़ की छाल का क्वाथ पिलाने से लीवर को नई ताकत मिलती है।
  • हाजमे की कमजोरी दूर करने के लिए लाल कचनार की जड़ का क्वाथ पिलाने से पाचन शक्ति मजबूत हो जाती है।
  • खूनी बवासीर मिटाने हेतु कचनार की कलियों का चूर्ण मिश्री-मक्खन संग चटाने से गजब राहत मिलती है।
  • गंडमाला ठीक करने और खून साफ करने के लिए कचनार की छाल या फूलों का ठंडा क्वाथ शहद संग पिलाएं।
  • कुष्ठ रोग के उपचार में कचनार की छाल के क्वाथ में बावची तेल मिलाकर पिलाने से त्वचा को सुकून मिलता है।
  • मुंह के छालों से निजात पाने को कचनार की अंतर्चाल उबालकर कुल्ला करें, सूतिकाओं को भी फायदा होता है।
  • आंतों के कीड़े मिटाने हेतु पीले कचनार की छाल का क्वाथ पिलाने से परेशानी जड़ से खत्म हो जाती है।
  • सांप-बिच्छू के जहर में कचनार के फल मूत्रल व बीज पौष्टिक-कामोद्दीपक गुण दिखाते हैं।
  • सीप-विच्छू विष में कचनार के सभी हिस्से उपयोगी साबित होते हैं राहत तुरंत दिलाते हैं।
  • शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए कचनार की छाल शोधक, पौष्टिक व संकोचक गुणों से विशेष लाभ पहुंचाती है।
  • कंठमाला ठीक करने हेतु चावल पानी-सोंठ संग कचनार की छाल लेने से गले की गांठें पिघल जाती हैं।
  • विद्रधि रोग में कचनार की ताजी छाल का रस पिलाने से फोड़े जल्दी पक जाते हैं।
  • रक्तातिसार रोकने को कचनार वनस्पति खूनी दस्त में विशेष असर दिखाती है।
  • आंतों के अंदरूनी कीड़ों को कचनार नष्ट करती है और कुष्ठ में भी फायदेमंद साबित होती है।
  • दक्षिणी चिकित्सक रक्तातिसार में कचनार की छोटी सूखी कलियां व कोमल फूल सुझाते हैं।
  • यकृत प्रदाह पर कचनार की जड़ के छिलकों का काढ़ा पिलाने से रामबाण लाभ मिलता है।
  • घाव व अबुध भरने हेतु कचनार की छाल कूटकर लेप लगाने से जल्दी सुधार होता है।
  • दांत दर्द मिटाने को कचनार की लकड़ी के कोयले से दन्तमंजन करने पर मसूड़े मजबूत हो जाते हैं।
  • गैस व पेट फूलना दूर करने हेतु अजवायन संग कचनार की छाल का काढ़ा लेने से तुरंत राहत मिलती है।
  • खांसी-दमा में शहद के साथ कचनार की छाल का काढ़ा पीने से सांस लेना आसान हो जाता है।
  • पायरिया व मसूड़े सूजन दूर करने को उबले कचनार छाल के पानी से कुल्ला करें दांत स्थिर हो जाते हैं।
  • जीभ व त्वचा सुन्नता मिटाने हेतु कचनार की छाल का चूर्ण खाने से ग्रंथियां ठीक हो जाती हैं।
  • कब्ज भागाने के लिए कचनार के फूलों का शरबत या गुलकंद रात को लेने से मल त्याग आसान होता है।
  • पेट कैंसर नियंत्रित करने हेतु कचनार की छाल का काढ़ा पीने से गांठें घुलने लगती हैं।
  • पेशाब में खून रोकने को कचनार के फूलों का काढ़ा सुबह-शाम लें रक्तस्राव बंद हो जाता है।
  • बवासीर में छाछ संग कचनार का चूर्ण लेने से खूनी बवासीर में जबरदस्त लाभ मिलता है।
  • रक्तपित्त शांत करने हेतु शहद संग कचनार के फूल चूर्ण चटाने या साग खाने से विकार दूर होता है।
  • बच्चों के कुबड़ापन दूर करने को कचनार का फूल बिछाकर सुलाएं या गुग्गुल संग सेवन करें।
यह लेख भी पढ़िए....
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। कचनार या किसी भी आयुर्वेदिक औषधि के उपयोग से पहले कृपया अपने वैद्य या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। यह कोई चिकित्सकीय सलाह नहीं है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका सेवन न करें। किसी भी प्रकार के नुकसान या परिणाम के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।
Next Post Previous Post
No Comment
Add Comment
comment url