बाबा रामदेव के अनुसार किडनी को स्वस्थ रखें ये 5 आसान आयुर्वेदिक उपाय
किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण फिल्टर है। यह खून से टॉक्सिन साफ करती है। अगर किडनी कमजोर हो जाए, तो सूजन, थकान, उल्टी, सांस फूलना और पेशाब में बदलाव जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। लंबे समय तक अनदेखा करने पर हाई बीपी, दिल की बीमारी या किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। योग गुरु बाबा रामदेव कहते हैं कि रोजाना कुछ सरल आयुर्वेदिक चीजें अपनाकर किडनी को मजबूत रखा जा सकता है। आइए जान लेते हैं की किन घरेलु उपायों से हम किडनी को स्वस्थ रख सकते हैं.
हरे धनिए की चटनी: किडनी का नैचुरल क्लेंजर
आयुर्वेद में हरे धनिये के कई फायदे वर्णित हैं। बाबा रामदेव भी रोज हरी धनिए की चटनी खाने की सलाह देते हैं। यह टॉक्सिन बाहर निकालती है और किडनी को साफ रखती है। अस्तव्यस्त आहार विहार वर्तमान जीवन की मज़बूरी है जिसके कारण शरीर पर विपरीत प्रभाव होता है, विशेष रूप से विषाक्त भोजन से किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण और भोजन की अशुद्धता के कारण यूरिक एसिड, किडनी स्टोन आदि विकारों की संभावना बनी रहती है। ऐसे में किडनी को स्वस्थ रखने का पहला उपाय हरा धनिया है।
बनाने की विधि
हरे धनिये की चटनी बनाने के लिए आप धनिये के ताजे पत्ते लें कर उपलब्धता के आधार पर पोदीना के पत्ते, अदरक, लहसुन जीरा पाऊडर, काला नमक, हरी मिर्च, टमाटर ले कर इसे पीस कर चटनी बना लें। आप अपने स्वाद अनुसार हरी मिर्च को इसमें मिलाएं। चटनी को आप कच्चा भोजन के साथ उपयोग में ले सकते हैं. इसे फ्राई करने से इसके गुण नष्ट हो जाते हैं.
हरे धनिये की चटनी से यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकलता है साथ ही यह पाचन को दुरुस्त कर कब्ज, एसिडिटी, आफरा आदि विकारों को भी दूर करने में प्रभाव है। इसके साथ ही लहसुन और अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण सूजन और दर्द में भी राहत मिलती है। समग्र रूप में यह शरीर को डिकॉक्स करने में उपयोगी है।
गोखरू का पानी: पेशाब की जलन दूर भगाए
आयुर्वेद के अनुसार गोखरू (Tribulus terrestris) किडनी टॉनिक है। बाबा रामदेव इसे उबालकर पीने की सलाह देते हैं।आयुर्वेद में गोक्षुरा को किडनी के लिए प्रभावी बताया गया है, इसे गोखरू भी कहते हैं। इसके सेवन से यूरिक, एसिड, क्रिएटिनिन, किडनी स्टोन जैसे विकारों में लाभ मिलता है।
जौ का आटा: शरीर की गर्मी को करे दूर
जौ का पानी घर पर बनाना बहुत आसान है—100-250 ग्राम जौ दाने लें, अच्छे से धोकर 3-4 घंटे पानी में भिगो दें, फिर 3-4 कप पानी के साथ धीमी आंच पर 45 मिनट उबालें। आंच बंद कर ठंडा होने दें, छान लें और बोतल में भरें। दिन में 1-2 गिलास पिएं, स्वाद के लिए नींबू रस या काला नमक मिलाएं। आयुर्वेद में चरक संहिता इसे पित्त-शामक बताता है, जो गर्मी दूर करता है, पाचन सुधारता है, टॉक्सिन निकालता है और ब्लड शुगर कंट्रोल करता है गर्मी या डायबिटीज में रोज अपनाएं—शरीर तरोताजा रहेगा। किडनी के लिए भी यह बहुत उपयोगी है.
जौ का आटा शरीर की गर्मी दूर करने के लिए बेहतरीन है, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में यह अंदर से ठंडक देता है, पाचन सुधारता है और कब्ज, गैस, अपच जैसी दिक्कतों से छुटकारा दिलाता है। चरक संहिता में जौ को 'यव' कहकर पित्त-शामक बताया गया है, जो ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है। रिसर्च दिखाती है कि इसके बीटा-ग्लूकन फाइबर से वजन घटता है और डायबिटीज का खतरा कम होता है । इसे रोटी, सत्तू या जौ पानी बनाकर आसानी से इस्तेमाल करें—शरीर डिटॉक्स होकर फ्रेश रहेगा। जौ में बीटा-ग्लूकन फाइबर होता है, जो टॉक्सिन बाहर फेंकता निकालने में लाभकारी है और सूजन घटाता है, यूरिक एसिड कंट्रोल करता है।
जो का पानी शुगर को नियंत्रित करता है। कोलेस्ट्रॉल कम करके बाइल एसिड को शरीर से बाहर निकालने में सहायक है। रिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के लिए भी जो का पानी उपयोगी है। जौ के पानी में पोटैशियम मैग्नीशियम आयन और कैल्शियम आदि होते हैं जो शरीर के लिए उपयोगी होते हैं। इस पानी/Barley water से पित्त दोष भी संतुलित होता है।
Cure For Kidney Disease by Yoga and Herbs (Baba Ramdev)
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य है। कोई भी उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। आयुर्वेदिक चीजें सहायक हैं, लेकिन इलाज का विकल्प नहीं।