शिव गुटिका के फायदे उपयोग घटक और सेवन विधि
शिव गुटिका के फायदे, उपयोग, घटक और सेवन की विधि
शिव गुटिका क्या है, परिचय
शिलाजीतं त्रिफलाक्वाथेन भावितं गुटिकारूपम् ॥
शतं वर्षं सेवेत् तत् कायं कुर्यात् कायकलपं परम् ।
शिव गुटिका के उपयोग और लाभ /फायदे
रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए लाभकारी
शिव गुटिका शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए बहुत गुणकारी है। शिलाजीत और शतावरी जैसे घटक द्रव्य के कारण यह व्याधिक्षमत्व (रोग प्रतिरोधक क्षमता) के लिए अत्यंत लाभकारी है। शिव गुटिका व्याधिक्षमत्व वर्धक रसायन औषधि है। शिलाजीत के ओज बढ़ता है और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। शतावरी मज्जा धातु पोषक प्रभाव से प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बल प्रदान करती है। गिलोय एंटीवायरल-एंटीबैक्टीरियल क्रिया से संक्रमणों से लड़ने की शक्ति बढ़ाता है। त्रिफला रक्त शुद्धि कर विषाक्त पदार्थ निष्कासित करता है। चरक संहिता में शिलाजतु को सर्वरोग प्रतिरोधक कहा गया है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, क्रॉनिक संक्रमण और कमजोर इम्यूनिटी के कारण होने वाली बीमारियों से शरीर स्वाभाविक रूप से रक्षा करता है।यकृत और प्लीहा के लिए गुणकारी
शिव गुटिका यकृत और प्लीहा के लिए लाभकारी होती है। इसके सेवन से शरीर डीटॉक्स होती है। शरीर से विषाक्त प्रदार्थ निकलने पर आरोग्य प्राप्त होता है। रक्त को साफ़ करने के लिए भी यह ओषधि उपयोगी है। अतः शिव गुटिका के सेवन से यकृत और प्लीहा विकारों में लाभ मिलता है। शिव गुटिका का एक लाभ यह की यह लीवर को डिटॉक्सीफाई करने और पीलिया, हेपेटाइटिस और अन्य लीवर से संबंधित विकारों को दूर करने में सहायकश्वसन विकारो में लाभकारी
शिव गुटिका श्वास संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी है। इसके सेवन से क्लिष्ट बलगम ढीला होकर शरीर से बाहर निकलता है। गले और फेफड़ो में जमा कफ दूर होता है, गले में खरास कम होती है और संक्रमण दूर होता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी, खांसी में सुधार होता है। फेफड़ों की सूजन को दूर करने में भी यह ओषधि लाभकारी है।मस्तिष्क विकारों में लाभकारी
यह ओषधि तंत्रिका तंत्र को मजबूत करती है और मिर्गी तनाव, अवसाद, अत्यधिक चिंता, स्मृति लोप आदि में लाभकारी है। शिव गुटिका के घटक मस्तिष्क को शांत करते हैं और अवसाद, चिंता से मुक्त करते हैं। स्मृति में सुधार होता है और गणितीय कार्यों में सुधार होता है। शिव गुटिका मस्तिष्क विकारों में अत्यंत लाभकारी तंत्रिका टॉनिक है। शिलाजीत और शतावरी के मज्जा धातु पोषक गुणों से नाड़ी तंत्र मजबूत होता है। मुलेठी मानसिक शांति प्रदान करती है, जबकि गिलोय वातानुलोम कर मिर्गी, उन्माद, अपस्मार को नियंत्रित करता है। दशमूल वात नाड़ी शोधहर प्रभाव से अवसाद, अत्यधिक चिंता और तनाव नष्ट होते हैं। त्रिफला मेध्य रसायन गुण से स्मृति वृद्धि, बुद्धि प्रसादन और गणितीय कार्यक्षमता में सुधार करता है। चरक संहिता में इसे वात व्याधिनाशक कहा गया है।पाचन विकारों में लाभकारी
शिव गुटिका के उपयोग से पाचन तंत्र को शक्ति मिलती है। मंदाग्नि में सुधार होता है, अजीर्ण, गैस्ट्राइटिस में सुधार होता है।इस ओषधि में अनेकों ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर के चयापचय पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। शिव गुटिका पाचन विकारों में अत्यंत लाभकारी रसायन औषधि है। त्रिफला के दीपन-पाचन गुणों से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, मंदाग्नि दूर होती है। शिलाजीत अमा नाशक प्रभाव से अजीर्ण, गैस्ट्राइटिस, अम्लपित्त और पेट फूलना नष्ट करता है। गिलोय और मुलेठी स्निग्ध दीपन गुणों से चयापचय सुधारते हैं, आंतों को पोषण देते हैं। दशमूल वातानुलोमन कर पाचन तंत्र को सुचारू बनाता है। चरक संहिता में इसे अग्निदीपक कहा गया है। नियमित सेवन से भोजन पाचन दुरुस्त होता है, कब्ज-दस्त विकार दूर होते हैं और पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है।हृदय स्वास्थ्य के लिए गुणकारी
शिव गुटिका के सेवन से हृदय को शक्ति मिलती है। इसके सेवन से तंत्रिका तंत्र मजबूत बनता है और रक्त का संचार सुचारु होता है। शिव गुटिका हृदय स्वास्थ्य के लिए गुणकारी रसायन है। शिलाजीत और मुलेठी के हृदय बल्य गुणों से हृदय की पेशियाँ मजबूत बनती हैं, धड़कन सामान्य रहती है। दशमूल वातहर प्रभाव से तंत्रिका तंत्र सुदृढ़ होता है, रक्त संचार सुचारू रहता है। त्रिफला कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है। चरक संहिता में शिलाजतु को हृदय रोगहर कहा गया है। नियमित सेवन से उच्च रक्तचाप, हृदयाघात का खतरा कम होता है, तनाव घटता है और समग्र हृदय शक्ति बढ़ती है।त्वचा विकारों में लाभकारी
शिव गुटिका ओषधि के सेवन से त्वचा का संक्रमण दूर होता है। शरीर से विषाक्त प्रदार्थ निकलने से त्वचा अधिक चमकदार और स्वस्थ बनती है। कील मुहासों को दूर करने में भी यह ओषधि लाभकारी है। शिव गुटिका त्वचा विकारों में अत्यंत लाभकारी है। त्रिफला और गिलोय के रक्तशोधक गुणों से शरीर के विषाक्त पदार्थ दूर होते हैं, जिससे त्वचा स्वाभाविक रूप से चमकदार बनती । शिव गुटिका के घटक शिलाजीत के एंटीऑक्सीडेंट और मुलेठी के एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव से कील-मुहांसे, एक्जिमा, सोरायसिस, खुजली और पुराने त्वचा संक्रमण दूर होते हैं। यह वर्ण प्रसादन (त्वचा निखार), कंडूहर (खुजली नाशक) और रक्तविकारहर गुणों से युक्त है। चरक संहिता में शिलाजतु को त्वक् रोगहर कहा गया है। नियमित सेवन से पित्तजन्य दाग-धब्बे मिटते हैं, कोलेजन उत्पादन बढ़ता है और त्वचा युवा-स्वस्थ रहती है।मूत्र विकारों में लाभ
शिव गुटिका के सेवन से मूत्र का प्रवाह बढ़ता है, खुलकर मूत्र आता है और मूत्र पथ का संक्रमण दूर होता है। शिव गुटिका मूत्र विकारों में अत्यंत लाभकारी है। शिलाजीत और त्रिफला के मूत्रप्रेरक गुणों से मूत्र प्रवाह बढ़ता है, मूत्रत्याग सुगम होता है। यह मूत्रमार्ग शोध (UTI), प्रमेह, मूत्रकृच्छ, गुर्दे की कमजोरी और मूत्र असंयम में रामबाण है। दशमूल वातहर प्रभाव से मूत्राशय की सूजन कम करता है, जबकि गिलोय एंटीमाइक्रोबियल क्रिया से संक्रमण नष्ट करता है। चरक संहिता में शिलाजतु को मूत्रातिसारहर कहा गया है। नियमित सेवन से मूत्र प्रणाली शुद्ध होती है, क्रिस्टल निर्माण रुकता है और गुर्दे की कार्यक्षमता बढ़ती है।शिव गुटिका के अन्य लाभ
- यह ओषधि एंटीबायोटिक, मधुमेह रोधी, विष रोधी, हाइपोलिपिडेमिक रोधी, सूजन रोधी, दर्द निवारक, प्रतिरक्षा-संशोधक, एंटीवायरल, रोगाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त होती है।
- शिव गुटिका शरीर के सेवन से वजन बढ़ाने, लक्षणों को कम करने और रक्त संचार में सुधार करने में भी सहायक है।
- त्वचा की रंगत निखारने में यह ओषधि उपयोगी है, त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ाने, चमक बढ़ाने, कील मुहासे दूर करने में लाभकारी।
- शिव गुटिका तपेदिक, गठिया, दस्त, पीलिया, बवासीर, एनीमिया आदि विकारों में लाभकारी है।
- बुखार, प्लीहा संबंधी विकारों, उल्टी, पेट फूलना, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, स्वादहीनता, कमजोरी और मुंह, आंख और स्मृति संबधी विकारों में गुणकारी है।
- शिव गुटिका के फाइटोकेमिकल घटक एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त है।
शिव गुटिका के सम्पूर्ण लाभ
- शिव गुटिका सूजन को कम करके और बलगम को ढीला करके शरीर से बाहर निकालने, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी संबंधी खांसी साँसों के विकारों में अत्यंत लाभकारी है।
- शिव गुटिका मिर्गी, चिंता, स्मृति ह्रास, तनाव और न्यूरोलॉजिकल विकारों में लाभकारी है।
- भूख वृद्धि, सूजन दूर करने, अपच, गैस्ट्राइटिस, गैस, पेट फूलना आदि विकारों को दूर करने में लाभकारी।
- लीवर डिटॉक्सीकरण, पीलिया, हेपेटाइटिस, यकृत वृद्धि और अन्य लीवर रोगों के उपचार में उपयोगी।
- रक्त शुद्धि और सूजन कम करके एक्जिमा, सोरायसिस, मुंहासे और पुरानी त्वचा रोगों में लाभदायक है।
- इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों से बार बार बुखार का आना, वायरल-बैक्टीरियल संक्रमण दूर कर रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि में सहायक है।
- मूत्र प्रवाह सुधार, मूत्र पथ संक्रमण (UTI), गुर्दे की कमजोरी और प्रमेह (मधुमेह) विकारों को दूर करने में सहायक है।
- प्रतिरक्षा प्रणाली को बल देकर संक्रमणों से शरीर को शक्ति देने में लाभकारी।
- विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने, रक्त शुद्धि के लिए उपयोगी।
- यह ओषधि कायाकल्प औषधि है जो समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाने, दीर्घायु और ओजस में वृद्धि करता है।
- मस्तिष्क स्वास्थ्य सुधार, स्मृति वर्धन, मानसिक तनाव कम करने, अवसाद को दूर करने में लाभकारी।
- वात, पित्त और कफ दोषों को दूर कर त्रिदोष का संतुलन करने में सहायक।
शिव गुटिका के घटक
शिव गुटिका के मुख्य पादप घटकों का आयुर्वेदिक विवरण निम्नलिखित है।गिलोय (गुडूची)
आयुर्वेदिक नाम: अमृतवल्लरी, गुडूची/Tinospora cordifoliaगुडूच्या मधुरा तिक्ता कषाया लघु रूक्षला ।
शीतोष्णा कफपित्तनुत् त्रिषध्या सर्वरोगहृत् ॥
- रस: तिक्त, कषाय, मधुर |
- गुण: लघु, रूक्ष |
- वीर्य: उष्ण |
- विपाक: मधुर
- लाभ: ज्वरनाशक, इम्यूनिटी बूस्टर, रक्तशोधक, पांडुनाशक, कफ-पित्तहर।
- आयुर्वेद में गिलोय को अमृता कहा गया है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर वायरल संक्रमणों से शरीर को मुक्त करता है, शक्ति बढ़ाती है।
- गिलोय डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे ज्वरों को शीघ्र नष्ट करने में रामबाण औषधि है।
- गिलोय कब्ज, अपच, गैस्ट्राइटिस और मंदाग्नि जैसी पाचन समस्याओं में लाभकारी है।
- गिलोय ब्लड शुगर लेवल संतुलित रखकर मधुमेह नियंत्रण करती है।
- गिलोय जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया रोग को अपने एंटी-आर्थराइटिक गुणों से दूर करती है।
- गिलोय अस्थमा, खांसी और ब्रोंकाइटिस में कफ विकार को दूर करने में सहायक है।
- गिलोय के सेवन से पीलिया, फैटी लीवर और हेपेटाइटिस में लीवर को डिटॉक्सीफाई करने में सहायक है।
- गिलोय एक्जिमा, मुंहासे और खुजली जैसे त्वचा रोगों में रक्त शुद्धिकरण में लाभ मिलता है।
- गिलोय मानसिक विकारों में लाभ मिलता है, अवसाद में लाभ मिलता है।
- गिलोय रसायन भी है जो ओज देती है दीर्घायु प्रदान करने वाली रसायन है।
- गिलोय सत्व: पीलिया, कमजोरी
- शिव गुटिका: रसायन, त्रिदोषहर (आपकी पोस्ट में मुख्य घटक)
- चंद्रप्रभा वटी: मूत्र रोग, प्रमेह
- महासुदर्शन चूर्ण: ज्वर, पाचन
- पंचतिक्त घृत गुग्गुलु: गठिया, त्वचा रोग
मुलेठी (यष्टिमधु)
यष्टिमधु, मधुयष्ट/Glycyrrhiza glabraयष्ट्याह्वया मधुरा स्निग्धा गुरु शीता वृषा शुकला ।
कफपित्तकृत् वातानिलदोषहरा रसायनी ॥
- रस: मधुर |
- गुण: स्निग्ध, गुरु |
- वीर्य: शीत |
- विपाक: मधुर
- लाभ: कंठरोग, खांसी, अल्सर, तनावनाशक, हृदय बल्य, कफ-पित्तशामक।
- यष्टिमधु चूर्ण: खांसी, कंठ रोग, अल्सर
- मुलेठी घृत: नेत्र रोग, श्वसन विकार
- शिव गुटिका: रसायन, त्रिदोषहर (आपकी पोस्ट का मुख्य घटक)
- कांति वटी: त्वचा रोग, रक्त शुद्धि
- सितोपलादि चूर्ण: श्वास-कास, अस्थमा
- महातिक्तं घृत: पित्त विकार, त्वचा रोग
शतावरी Shatavari
शतावरी, नारीणां नरेश्वरी/Asparagus racemosusशतावरी मधुरा स्निग्धा शीता स्तन्यजननी मता ।
वृष्या पुत्रप्रदा हृद्या रसायनी च विशेषतः ॥
- रस: मधुर |
- गुण: स्निग्ध, गुरु |
- वीर्य: शीत |
- विपाक: मधुर
- लाभ: स्त्री रोग, स्तन्यजनन, वाजीकरण, पित्तशामक, ओजस वर्धक।
- शतावरी कल्प/घृत: स्तन्यजनन, गर्भ रक्षा, मेनोपॉज
- फलघृत: गर्भिणी पोषण, शिशु विकास
- शिव गुटिका: रसायन, त्रिदोषहर (आपकी पोस्ट का मुख्य घटक)
- चंद्रप्रभा वटी: प्रमेह, मूत्र रोग, स्त्री विकार
- दशमूलारिष्ट: प्रसवोत्तर, वात रोग
- महातिक्तं क्वाथ: पित्त विकार, त्वचा रोग
शिलाजीत (मुख्य घटक)
आयुर्वेदिक नाम: शिलाजतु, रसोपल/Asphaltum punjabianumशिलाजतु हिमवत्सर्वगिरिषु पर्वतेषु च ।
कृष्णं रसानिलं दीप्तं सर्वरोगहरं परम् ॥
- रस: तिक्त, कषाय, लवण |
- गुण: लघु, स्निग्ध |
- वीर्य: शीत |
- विपाक: कटु
- लाभ: रसायन, वाजीकरण, बल्य, प्रमेहहर, मेदोनाशक, त्रिदोषहर।
- शिव गुटिका: रसायन, प्रमेह-यकृत रोग (आपकी पोस्ट का मुख्य घटक)
- शिलाजीत चूर्ण/सत्व: बल्य, वाजीकरण, ओजस वर्धन
- शिलाजीतादि वटी: गठिया, यौन कमजोरी
- चंद्रलोक रस: प्रमेह, मेदोरोग
- शिलाजीत रसायन: कायाकल्प, दीर्घायु
दशमूल (दस मूल)
बिल्व, अग्निमान्थ, श्योनाक, पाटल, गनकारी, शालमली, प्रशनिपर्णी, गोक्षुर, बृहती, कंटकारीदशमूलं सरसो मूत्रं तैलं चाश्वतरिस्तथा ।
वातरोगेषु सर्वेषु सर्वं सेव्यं विशेषतः ॥
- रस: मधुर, तिक्त |
- गुण: लघु, स्निग्ध |
- वीर्य: उष्ण |
- विपाक: मधुर
- लाभ: वातहर, श्वास-कास, सूजन, प्रसवोत्तर कमजोरी, बल्य।
- दशमूल क्वाथ: वात रोग, सूजन, श्वास-कास
- दशमूलारिष्ट: प्रसवोत्तर, कमजोरी, पाचन सुधार
- दशमूल घृत: गर्भिणी पोषण, गठिया
- शिव गुटिका: रसायन, त्रिदोषहर (आपकी पोस्ट का मुख्य घटक)
- प्रसारिणी तेल: जोड़ दर्द, पक्षाघात
- नारायण तेल: वात रोग, मालिश
त्रिफला (त्रिफल)
त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) Triphala (Emblica+Terminalia chebula+bellerica)त्रिफलं अमृतं दिव्यम् एकं रसायनमुत्तमम् ।
न चाऽप्यन्यं किमप्यस्ति त्रिफलं सर्वरोगहृत् ॥
- गुण: लघु, रूक्ष |
- वीर्य: शीत (आंवला), उष्ण (बिभीतकी) |
- विपाक: मधुर
- लाभ: रसायन, नेत्र रोग, पाचन, कब्ज, चक्षुष्य, विषहर।
- त्रिफला चूर्ण: कब्ज, पाचन, शरीर को डीटोक्स करने में सहायक, अजीर्ण, दीपन, आफरा में सहायक.
- त्रिफला घृत: नेत्र रोग, त्वचा रोग आदि विकारों में लाभकारी.
- शिव गुटिका: यह ओषधि रसायन, त्रिदोषहर, अवसाद रोधी है.
- त्रिफला गूग्गुलु: मोटापा, थायरॉइड आदि विकारों में गुणकारी.
- च्यवनप्राश: रसायन, पाचन को दुरुस्त करने, अजीर्ण, मन्दाग्नि, मेध्य, रसायन है.
- त्रिफलादी क्वाथ: ज्वर, पित्त विकार में लाभकारी, आखों के विकारों में उपयोगी है.
शिव गुटिका सेवन से सम्बंधित सावधानियां और दुष्प्रभाव
- स्वंय से चिकित्सा ना करें, शिव गुटिका का उपयोग करने से पूर्व वैद्य से परामर्श अवश्य प्राप्त करें।
- छोटे बच्चे, गर्भधारण अवस्था के दौरान, किसी गंभीर बिमारी से ग्रस्त होने पर इस ओषधि का उपयोग नहीं करना चाहिये।
- वैद्य द्वारा बताई गई मात्रा से अधिक का उपयोग ना करें। पित्त विकार, एसिडिटी के दौरान इसका सेवन ना करें।
- नवजीवन शिव गुटिका Navjeewan Shiva Gutika
- व्यास शिव गुटिका Vyas Shiva Gutika
- झंडू शिव (हिमेज) गुटिका Zandu Shiva Gutika
- बेसिक आयुर्वेदा शिव गुटिका Basic Ayurveda
- एस.डी.एम. आयुर्वेद शिव गुटिका
- शिव गुटिका- अमृता आयुर्वेदा
- https://journalcmpr.com/issues/shiva-gutika-critical-approach-its-pharmacological-action
- https://www.mdpi.com/2223-7747/6/4/42
- A comparative clinical study to evaluate the therapeutic effect of shivagutika in patients with H.I.V infection
- Shilpa & Venkatesh (2011): "Therapeutic potential of Shiva Gutika

