ऑफिस में होता है पीठ दर्द आजमाएं ये उपाय
ऑफिस में होता है पीठ दर्द आजमाएं ये उपाय
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लैपटॉप, डेस्कटॉप या मोबाइल के सामने घंटों काम करना आम हो गया है। चाहे ऑफिस हो, घर का वर्क फ्रॉम होम हो या पढ़ाई लिखाई , लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने से पीठ में खिंचाव, मांसपेशियों में अकड़न और तेज दर्द की समस्या बढ़ जाती है, कई बार तो स्लिप डिस्क की हद तक समस्या होने लगती है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि हर 45-60 मिनट में सिर्फ 2-5 मिनट का छोटा ब्रेक लेने से, उठने बैठने के तरीकों में बदलाव से आप इन सभी परेशानियां दूर रह सकते हैं। आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार योगासन मांशपेशियों को रिलैक्स करते हैं और शरीर के रक्त प्रवाह सुधारते हैं, जोड़ों को लचीलापन देते हैं और पूरे शरीर को तरोताजा रखते हैं। योगासन से इससे पोस्चर बेहतर होता है, थकान दूर होती है।लगातार बैठने के नुकसान: क्यों होता है पीठ दर्द
लगातार एक ही मुद्रा/ पोजीशन बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, खासकर लंबर रीजन (कमर) पर। इससे डिस्क हर्नियेशन, सायटिका और मसल स्ट्रेन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में 1.71 अरब लोग पीठ दर्द से जूझ रहे हैं, और भारत में 20-30% वयस्कों को यह समस्या है। शहरी जीवनशैली, गलत कुर्सी या स्क्रीन हाइट के कारण यह और बढ़ जाती है। अगर समय रहते छोटे ब्रेक न लिए जाएं, तो यह क्रॉनिक पेन बन सकता है, जो चलने-फिरने और काम करने में बाधा डालता है।भारत सरकार का आयुष मंत्रालय हमेशा योग और आसान व्यायाम की सलाह देता है। उनके दिशानिर्देशों के मुताबिक, हर घंटे में ब्रेक लेकर स्ट्रेचिंग करें। ये ब्रेक सिर्फ आराम नहीं देते, बल्कि:
- मांसपेशियों को रिलैक्स करते हैं।
- ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं, जिससे ऑक्सीजन पहुंचती है।
- जोड़ों की स्टिफनेस दूर करते हैं।
- तनाव कम कर मूड फ्रेश रखते हैं।
- ऊपरी बॉडी स्ट्रेच: कुर्सी से उठें, पैर कंधे जितने फैलाएं। दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर उंगलियां क्रॉस करें। 15-20 सेकंड तक पीठ सीधी रखें और सांस लें। धीरे नीचे लाएं। इससे पूरी पीठ खुलती है।
- कंधे घुमाना: बैठे-बैठे या खड़े होकर कंधों को आगे की तरफ 10 बार गोल-गोल घुमाएं, फिर पीछे की तरफ 10 बार। यह ऊपरी पीठ और गर्दन की अकड़न तुरंत दूर करता है।
- कैट-काउ स्ट्रेच: कुर्सी पर घुटनों के बल झुकें (या फ्लोर पर)। सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर गो arched करें (कैट पोज), फिर सांस लेते हुए नीचे धनुषाकार (काउ पोज)। 8-10 बार दोहराएं। कमर दर्द में जबरदस्त राहत।
- सीडेड ट्विस्ट: कुर्सी पर सीधे बैठें। दाहिने हाथ को बाएं घुटने पर रखकर धड़ को दाएं घुमाएं। 10 सेकंड होल्ड, फिर दूसरी तरफ। स्पाइनल ट्विस्ट से जोड़ लचीले होते हैं।
- स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड: खड़े होकर हाथ नीचे लटकाएं, घुटने हल्के मोड़ें। 20 सेकंड रुकें। पीठ के निचले हिस्से का खिंचाव दूर होता है।
- सही पोस्चर अपनाएं: पीठ सीधी रखें, स्क्रीन आंखों के लेवल पर हो। फुटरेस्ट यूज करें।
- एर्गोनॉमिक कुर्सी: कमर को सपोर्ट देने वाली चुनें।
- टाइमर सेट करें: फोन पर 45 मिनट का अलार्म लगाएं।
- योग ऐड करें: भुजंगासन, बालासन या सुप्त पवनमुक्तासन रोज 10 मिनट।
- हाइड्रेशन: 8-10 गिलास पानी पिएं, डिहाइड्रेशन दर्द बढ़ाता है।
- वॉकिंग ब्रेक: ब्रेक में 1-2 मिनट टहलें।
पीठ दर्द को जड़ से खत्म करने के लिए अपनाएं ये 10 योगासन
कैट-काउ पोज (मार्जरासन-बिटिलासन)
यह योगासन रीढ़ को लचीला बनाता है, कंधों की जकड़न खोलता है।कैसे करें: हाथ-पैरों पर आकर सांस इन लेते पेट नीचे झुकाएं (काउ), सांस बाहर छोड़ते पीठ ऊपर गोमेद करें (कैट)। 8-10 बार दोहराएं।
फायदा: इस आसन से अकड़न दूर होती है और स्पाइनल मोबिलिटी बढ़ती है।
सावधानी: धीरे करें, गर्दन न झटकें।
अधोमुख श्वानासन (डाउनवर्ड फेसिंग डॉग)
यह आसन पूरी पीठ को अच्छी तरह स्ट्रेच करता है और साइटिका दर्द में विशेष रूप से लाभकारी साबित होता है। इसमें मुख्य रूप से हैमस्ट्रिंग और ग्लूट्स मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। अभ्यास करने के लिए हाथों और पैरों को फैलाकर उल्टा 'V' आकार बनाएं तथा एड़ियों को नीचे की ओर दबाने का प्रयास करें। इसे 45 सेकंड तक होल्ड करें। इससे रीढ़ की हड्डी लंबी होती है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है। यदि मांसपेशियां कड़ी हैं तो घुटनों को हल्का मोड़कर रखें।
त्रिकोणासन (एक्सटेंडेड ट्रायंगल)
यह आसन रीढ़ की हड्डी को घुमावदार तरीके से स्ट्रेच देता है तथा तनाव को कम करने में सहायक होता है। इसमें लैट्स और पैरों की मांसपेशियां मुख्य रूप से काम करती हैं। करने के लिए पैरों को 3-4 फीट की दूरी पर रखें, एक हाथ को नीचे तथा दूसरे को ऊपर ले जाकर घुमाव लाएं। प्रत्येक साइड पर 30 सेकंड तक रहें। यह साइटिका और गर्दन दर्द को दूर भगाता है। कमर को हमेशा सीधी रखने का ध्यान रखें।
स्फिंक्स पोज
यह आसन निचली पीठ को मजबूत बनाता है तथा छाती को खोलने में मदद करता है। स्पाइन एक्सटेंसर मांसपेशियां इसमें सक्रिय रहती हैं। पेट के बल लेटकर कोहनियों के सहारे ऊपरी धड़ को धीरे से ऊपर उठाएं। इसे 2-3 मिनट तक बनाए रखें। इससे पाचन शक्ति बेहतर होती है और तनाव में कमी आती है। कूल्हों को जमीन पर ही दबाकर रखें।
भुजंगासन (कोबरा पोज)
यह लोअर बैक की मांसपेशियों को टोन करता है तथा साइटिका से राहत प्रदान करता है। पैरों और कंधों की मांसपेशियां इसमें प्रमुख भूमिका निभाती हैं। हाथों के दबाव से छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। 20 सेकंड तक होल्ड करें। इससे लचीलापन बढ़ता है तथा थकान दूर होती है। कोहनियों को मुड़ी हुई अवस्था में ही रखें।शलभासन (लोकस्ट पोज)
सेतुबंधासन (ब्रिज पोज)
अर्ध मत्स्येंद्रासन (हाफ स्पाइनल ट्विस्ट)
द्विपाद पादोत्तानासन (डबल लेग स्पाइनल ट्विस्ट)
यह रीढ़ को पूर्ण विश्राम देता है। एब्डॉमिनल्स और चेस्ट मसल्स इसमें शामिल होती हैं। पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को एक साइड गिराएं। प्रत्येक तरफ 30 सेकंड होल्ड करें। इससे कूल्हों और पीठ के दर्द में राहत मिलती है। कंधों को नीचे दबाकर रखें।बालासन (चाइल्ड्स पोज)
यह पूरे शरीर को आराम पहुंचाने वाला आसन है। पीठ और कूल्हों की मांसपेशियां इसमें स्ट्रेच होती हैं। घुटनों के बल बैठकर धड़ को आगे की ओर झुकाएं। 3-5 मिनट तक रहें। इससे तनाव मुक्ति मिलती है तथा रिकवरी तेज होती है। यदि असुविधा हो तो तकिया का सहारा लें।वैज्ञानिक प्रमाण: योग के सिद्ध फायदे
एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन (2017) के अध्ययन में पाया गया कि योग क्रॉनिक पीठ दर्द में फिजियोथेरेपी के बराबर प्रभावी है, जिसमें दर्द 40% तक कम हो जाता है तथा दवाओं की आवश्यकता घट जाती है। एक अन्य शोध में योग अभ्यास से कार्यक्षमता 30% तक बढ़ी पाई गई। PMC रिव्यू में भी इन्हें लोअर बैक पेन के लिए सुरक्षित और उपयोगी बताया गया है।कब डॉक्टर से मिलें?
अगर दर्द 2 हफ्ते से ज्यादा रहे, पैरों में सुन्नपन हो, या वजन घट रहा हो, तो तुरंत फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराएं। MRI या X-ray की जरूरत पड़ सकती है।इन छोटे ब्रेक्स को अपनी आदत बनाएं, पीठ दर्द दूर होता और आप अधिक कार्यक्षमता से अपना काम कर सकेंगे। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।



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